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चौथी बार अटकी आयुर्वेद विवि की भर्ती प्रक्रिया
Updated Sun, 29 Apr 2018 02:24 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला देहरादून
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में स्थायी नियुक्तियों का विवादों से चोली-दामन का साथ हो गया है। वर्ष 2014 से चल रही शिक्षक, चिकित्सक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भर्ती पर चौथी बार रोक लगा दी गई है। दो बार तो आवेदन करने के बावजूद अभ्यर्थियों को पूरा शुल्क भी वापस नहीं मिल पाया है।
आयुर्वेद विवि में पहली बार करीब 30 पदों के लिए वर्ष 2014 में भर्ती निकली थी। उस वक्त प्रक्रिया शुरू हुई ही थी कि राजभवन ने रोक लगा दी। यह कहकर रोक लगाई गई कि फिलहाल संविदा के पदों से ही काम चलाया जा सकता है। इसके बाद करीब 167 पदों के लिए वर्ष 2015 में भर्ती निकली। इस भर्ती पर बड़ा विवाद हुआ। इस बीच भर्ती की प्रक्रिया में उस वक्त नया मोड़ आया जब लिखित परीक्षा कराने को लेकर हुए विवाद के बाद राजभवन ने इस पर भी रोक लगा दी। वर्ष 2016 में करीब 290 पदों के लिए तीसरी बार भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई। इसकी विज्ञप्ति जारी होने के दौरान ही विधानसभा चुनावों की अधिसूचना जारी हो गई थी। तब राजभवन ने अगली सरकार के आने तक प्रक्रिया स्थगित कर दी थी। अब आयुर्वेद विवि ने चौथी बार 292 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की। इसके तहत चिकित्साधिकारी भर्ती के लिए लिखित परीक्षा हुई। इस परीक्षा में प्रश्न पत्र की गड़बड़ी के चलते राजभवन ने प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। चार बार रोक लगने की वजह से अभ्यर्थी परेशान हैं।
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हाईकोर्ट पहुंचा आयुर्वेद विवि का मामला
उत्तराखंड आयुर्वेद विवि में चल रही तमाम गड़बड़ियों के मामले में कुछ लोगों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट में इस जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होनी है। बताया जा रहा है कि हाल ही में आयुर्वेद विवि में हुए विवादों को लेकर यह याचिका दाखिल की गई है।
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उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में स्थायी नियुक्तियों का विवादों से चोली-दामन का साथ हो गया है। वर्ष 2014 से चल रही शिक्षक, चिकित्सक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भर्ती पर चौथी बार रोक लगा दी गई है। दो बार तो आवेदन करने के बावजूद अभ्यर्थियों को पूरा शुल्क भी वापस नहीं मिल पाया है।
आयुर्वेद विवि में पहली बार करीब 30 पदों के लिए वर्ष 2014 में भर्ती निकली थी। उस वक्त प्रक्रिया शुरू हुई ही थी कि राजभवन ने रोक लगा दी। यह कहकर रोक लगाई गई कि फिलहाल संविदा के पदों से ही काम चलाया जा सकता है। इसके बाद करीब 167 पदों के लिए वर्ष 2015 में भर्ती निकली। इस भर्ती पर बड़ा विवाद हुआ। इस बीच भर्ती की प्रक्रिया में उस वक्त नया मोड़ आया जब लिखित परीक्षा कराने को लेकर हुए विवाद के बाद राजभवन ने इस पर भी रोक लगा दी। वर्ष 2016 में करीब 290 पदों के लिए तीसरी बार भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई। इसकी विज्ञप्ति जारी होने के दौरान ही विधानसभा चुनावों की अधिसूचना जारी हो गई थी। तब राजभवन ने अगली सरकार के आने तक प्रक्रिया स्थगित कर दी थी। अब आयुर्वेद विवि ने चौथी बार 292 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की। इसके तहत चिकित्साधिकारी भर्ती के लिए लिखित परीक्षा हुई। इस परीक्षा में प्रश्न पत्र की गड़बड़ी के चलते राजभवन ने प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। चार बार रोक लगने की वजह से अभ्यर्थी परेशान हैं।
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हाईकोर्ट पहुंचा आयुर्वेद विवि का मामला
उत्तराखंड आयुर्वेद विवि में चल रही तमाम गड़बड़ियों के मामले में कुछ लोगों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट में इस जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होनी है। बताया जा रहा है कि हाल ही में आयुर्वेद विवि में हुए विवादों को लेकर यह याचिका दाखिल की गई है।
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