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गुलाब की खेती बनी आय का जरिया
Updated Sun, 25 Jun 2017 10:39 PM IST
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जोशीमठ। क्षेत्र के काश्तकारों को अब गुलाब की खेती खूब भाने लगी है। वर्तमान में क्षेत्र के 150 काश्तकार गुलाब की खेती कर रहे हैं और गुलाब से तैयार उत्पादों से काश्तकारों को अतिरिक्त आमदनी हो रही है। वहीं खेतों के किनारे गुलाब के पौधे लगे होने से खेतों में लगी फसलों की जंगली जानवरों से सुरक्षा भी हो रही है।
जोशीमठ ब्लॉक के सुनील, मेरग, परसारी, बडगांव और द्विंग गांवों के 150 काश्तकार गुलाब की खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। इस वर्ष क्षेत्र के ग्रामीणों ने कुल 20 कुंतल गुलाब के फूलों की पैदावार से 30 कुंतल गुलाब जल का उत्पादन किया। गुलाब जल का विपणन कर काश्तकार अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। क्षेत्र में काश्तकारों की संख्या को देखते हुए सगंध पौध केंद्र द्वारा यहां आठ केंद्र स्थापित किए गए हैं जहां काश्तकारों द्वारा उत्पादित गुलाबों से गुलाब जल तैयार किया जा रहा है। उत्पादों के विपणन के लिए केंद्र की ओर से काश्तकारों को पैकिंग सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है तथा केंद्र द्वारा क्षेत्र के उत्पादों को मेलों में लगने वाले स्टॉलों के माध्यम से प्रचारित-प्रसारित किया जा रहा है। काश्तकारों के अनुसार स्थानीय बाजार के साथ अब सौंदर्य प्रसाधन कंपनियां भी उत्पादों की आपूर्ति के लिए संपर्क करने लगी हैं। स्थानीय काश्तकार उमराव सिंह सिंह, आत्मा राम घिल्डियाल, नरेंद्र सिंह बिष्ट और केदार सिंह का कहना है कि गुलाब के उत्पादों से वे वर्ष भर में करीब 20 से 30 हजार की अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। साथ खेतों के किनारे गुलाब के पौधों के होने के चलते जंगली जानवर भी खेतों में फसलों को नुकसान नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
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जोशीमठ ब्लॉक के सुनील, मेरग, परसारी, बडगांव और द्विंग गांवों के 150 काश्तकार गुलाब की खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। इस वर्ष क्षेत्र के ग्रामीणों ने कुल 20 कुंतल गुलाब के फूलों की पैदावार से 30 कुंतल गुलाब जल का उत्पादन किया। गुलाब जल का विपणन कर काश्तकार अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। क्षेत्र में काश्तकारों की संख्या को देखते हुए सगंध पौध केंद्र द्वारा यहां आठ केंद्र स्थापित किए गए हैं जहां काश्तकारों द्वारा उत्पादित गुलाबों से गुलाब जल तैयार किया जा रहा है। उत्पादों के विपणन के लिए केंद्र की ओर से काश्तकारों को पैकिंग सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है तथा केंद्र द्वारा क्षेत्र के उत्पादों को मेलों में लगने वाले स्टॉलों के माध्यम से प्रचारित-प्रसारित किया जा रहा है। काश्तकारों के अनुसार स्थानीय बाजार के साथ अब सौंदर्य प्रसाधन कंपनियां भी उत्पादों की आपूर्ति के लिए संपर्क करने लगी हैं। स्थानीय काश्तकार उमराव सिंह सिंह, आत्मा राम घिल्डियाल, नरेंद्र सिंह बिष्ट और केदार सिंह का कहना है कि गुलाब के उत्पादों से वे वर्ष भर में करीब 20 से 30 हजार की अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। साथ खेतों के किनारे गुलाब के पौधों के होने के चलते जंगली जानवर भी खेतों में फसलों को नुकसान नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
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