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फोटो -- सौर ऊर्जा के साथ अन्य विकल्प भी तलाशने होंगे
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा के साथ अन्य विकल्प भी तलाशने होंगे। ऊर्जा अंतरण की प्रक्रिया बहुत ही धीमी है। केवल प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से इसका समाधान नहीं खोला जा सकता। यह विचार सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) में शुक्रवार को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने रखे।
ऊर्जा भविष्य निर्माण, चुनौती व अवसर विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि सीएसआईआर एनसीएल पुणे के पूर्व निदेशक पद्मश्री डा. स्वामीनाथन शिवराम और विशिष्ट अतिथि पीईआरसीए चेन्नई के निदेशक डॉ. वी. सिवसुब्रमण्यम ने संयुक्त रूप से किया। डॉ. स्वामीनाथन शिवराम ने कहा कि प्रौद्योगिकी के साथ लोकनीति, अवसंरचना प्रबंधन और आर्थिक सुधार भी आवश्यक है। साथ ही सौर ऊर्जा के साथ अन्य स्रोतों पर भी ध्यान देना होगा। छात्र संयोजक अमित कुमार ने बताया कि ऊर्जा और पर्यावरण के लिए पॉलिमर, अपशिष्ट कार्बन उपयोग, हरित रसायन विज्ञान, ऊर्जा अनुप्रयोग को संगोष्ठी में शामिल किया गया है। सीएसआईआर आईआईपी के निदेशक डॉ. अंजन रे ने संस्थान की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान में विकसित बायोजेट ईंधन से भारत में पहली बार विमानों ने सफल उड़ान भरने में सफलता हासिल की।
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ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा के साथ अन्य विकल्प भी तलाशने होंगे। ऊर्जा अंतरण की प्रक्रिया बहुत ही धीमी है। केवल प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से इसका समाधान नहीं खोला जा सकता। यह विचार सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) में शुक्रवार को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने रखे।
ऊर्जा भविष्य निर्माण, चुनौती व अवसर विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि सीएसआईआर एनसीएल पुणे के पूर्व निदेशक पद्मश्री डा. स्वामीनाथन शिवराम और विशिष्ट अतिथि पीईआरसीए चेन्नई के निदेशक डॉ. वी. सिवसुब्रमण्यम ने संयुक्त रूप से किया। डॉ. स्वामीनाथन शिवराम ने कहा कि प्रौद्योगिकी के साथ लोकनीति, अवसंरचना प्रबंधन और आर्थिक सुधार भी आवश्यक है। साथ ही सौर ऊर्जा के साथ अन्य स्रोतों पर भी ध्यान देना होगा। छात्र संयोजक अमित कुमार ने बताया कि ऊर्जा और पर्यावरण के लिए पॉलिमर, अपशिष्ट कार्बन उपयोग, हरित रसायन विज्ञान, ऊर्जा अनुप्रयोग को संगोष्ठी में शामिल किया गया है। सीएसआईआर आईआईपी के निदेशक डॉ. अंजन रे ने संस्थान की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान में विकसित बायोजेट ईंधन से भारत में पहली बार विमानों ने सफल उड़ान भरने में सफलता हासिल की।
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