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पपाया मैन ने खोजी सेब उत्पादन की आधुनिक तकनीक
Updated Sat, 14 Jul 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
उद्यान के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले पपाया मैन सुधीर चड्ढा ने उत्तराखंड में सेब उत्पादन की नई तकनीक की खोज की है। इसकी बदौलत काश्तकारों को मुनाफा होगा। इससे प्रदेश में रोजगार के लिए हो रहे पलायन को भी रोका जा सकेगा और देश में सेब का आयात भी कम होगा।
शुक्रवार को परेड ग्राउंड स्थित प्रेस क्लब में पत्रकारों से बात करते हुए सुधीर चड्ढा ने कहा कि पहले सेब का बाग लगाकर व्यवसायी को फ सल के लिए करीब आठ से दस साल का इंतजार करना पड़ता था। इससे काश्तकारों को बहुत मेहनत और देखभाल करने की जरूरत होती थी। देशभर में सेब के उत्पादन के बावजूद लाखों टन सेब विदेशों से आयात किया जाता है। चड्ढा ने बताया कि उन्होंने तकनीक के अध्ययन के लिए सेब की फ सल के लिए मशहूर कई देशों का दौरा किया। इटली, हॉलेंड आदि मुल्कों से तकनीक की जानकारी हासिल कर प्रदेश में सेब की नई प्रजाति विकसित की है। यह फसल लगाकर काश्तकार एक हेक्टेयर में पांच साल में पांच से दस लाख रुपये तक की आमदनी कर सकते हैं।
चड्ढ़ा ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर साल देश में लगभग चार लाख टन सेब का आयात किया जाता है। जोकि हिमाचल के संपूर्ण उत्पादन का लगभग आधा है। यदि उत्तरकाशी में सेब का सही रूप से उत्पादन किया जाए तो आने वाले पांच सालों में आयात को रोकने में उत्तराखंड का एक जिला ही काफ ी होगा। उन्होंने कहा कि इटली के विशेषज्ञों के सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश में सेब के साथ-साथ अखरोट, चेरी और नवीन प्रजातियों के फल की संभावनाएं भी हैं। प्रदेश में सेब उत्पादन के क्षेत्र में क्रांति लाने के उद्देश्य से शुरू की गई सीएम एप्पल मिशन के अच्छे परिणाम आने लगे हैं। प्रेस वार्ता में सुदीप चड्ढ़ा, सुशंात चड्ढ़ा, श्रीकांत, प्रवीन राणा और एसएस रावत मौजूद रहे।
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उद्यान के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले पपाया मैन सुधीर चड्ढा ने उत्तराखंड में सेब उत्पादन की नई तकनीक की खोज की है। इसकी बदौलत काश्तकारों को मुनाफा होगा। इससे प्रदेश में रोजगार के लिए हो रहे पलायन को भी रोका जा सकेगा और देश में सेब का आयात भी कम होगा।
शुक्रवार को परेड ग्राउंड स्थित प्रेस क्लब में पत्रकारों से बात करते हुए सुधीर चड्ढा ने कहा कि पहले सेब का बाग लगाकर व्यवसायी को फ सल के लिए करीब आठ से दस साल का इंतजार करना पड़ता था। इससे काश्तकारों को बहुत मेहनत और देखभाल करने की जरूरत होती थी। देशभर में सेब के उत्पादन के बावजूद लाखों टन सेब विदेशों से आयात किया जाता है। चड्ढा ने बताया कि उन्होंने तकनीक के अध्ययन के लिए सेब की फ सल के लिए मशहूर कई देशों का दौरा किया। इटली, हॉलेंड आदि मुल्कों से तकनीक की जानकारी हासिल कर प्रदेश में सेब की नई प्रजाति विकसित की है। यह फसल लगाकर काश्तकार एक हेक्टेयर में पांच साल में पांच से दस लाख रुपये तक की आमदनी कर सकते हैं।
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चड्ढ़ा ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर साल देश में लगभग चार लाख टन सेब का आयात किया जाता है। जोकि हिमाचल के संपूर्ण उत्पादन का लगभग आधा है। यदि उत्तरकाशी में सेब का सही रूप से उत्पादन किया जाए तो आने वाले पांच सालों में आयात को रोकने में उत्तराखंड का एक जिला ही काफ ी होगा। उन्होंने कहा कि इटली के विशेषज्ञों के सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश में सेब के साथ-साथ अखरोट, चेरी और नवीन प्रजातियों के फल की संभावनाएं भी हैं। प्रदेश में सेब उत्पादन के क्षेत्र में क्रांति लाने के उद्देश्य से शुरू की गई सीएम एप्पल मिशन के अच्छे परिणाम आने लगे हैं। प्रेस वार्ता में सुदीप चड्ढ़ा, सुशंात चड्ढ़ा, श्रीकांत, प्रवीन राणा और एसएस रावत मौजूद रहे।
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