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डाक्टर देने वाला कालेज ही बीमार
Updated Tue, 27 Jun 2017 11:23 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
दीपक तले अंधेरा की कहावत गुरुकुल आयुर्वेदिक परिसर पर सटीक बैठती है। 95 वर्षों से देश को आयुर्वेद के डाक्टर दे रहा गुरुकुल आयुर्वेदिक परिसर खुद बीमार है। लाइफ लाइन समझी जाने वाली सड़कें उबड़-खाबड़ हो गई तो कैंपस भी जर्जर हो गया है। कई वर्षों से रंगाई पुताई नहीं होने से दीवारें बदरंग हो गई हैं। अधिकारी बताते हैं कि मरम्मत के लिए बजट नहीं मिलने से यह स्थिति बनी है।
आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए 1922 में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय परिसर में आयुर्वेदिक कालेज की स्थापना की गई। देश की आजादी के बाद कालेज में अनेक विकास कार्य हुए और शोध कार्यों पर बढ़ावा दिया गया। कालेज से पढ़ाई कर छात्रों ने देश में आयुर्वेद के साथ-साथ उच्च पदों पर सेवाएं दी। गुरुकुल आयुर्वेदिक परिसर में 108 बेड के अस्पताल के साथ-साथ प्रत्येक मर्ज के विशेषज्ञों की अच्छी खासी तादाद है। बीएएमएस की 50 सीटों के साथ एमडी की भी 12 सीटें हैं। उत्तराखंड बनने के बाद से आयुर्वेद कालेज परिसर का विकास ठप हो गया है। जबकि सरकार बराबर आयुष प्रदेश बनाने का दावा करते नहीं थकती। गुरुकुल कालेज के अस्पताल की एंबुलेंस वैन का 6-7 वर्षों से संचालन नहीं होने से चह जर्जर हो गई है। कालेज के प्रोफेसरों ने बताया कि कुलपति और अन्य अधिकारियों को परिसर में निरीक्षण कराने के बाद भी बजट जारी नहीं हो सका। विधायक आदेश चौहान को कई बार प्रस्ताव देने के बाद उन्होंने भी कुछ नहीं किया। अब नई सरकार के आयुष मंत्री हरक सिंह रावत को निरीक्षण कराया है और उन्होंने आश्वासन दिया है।
भवन निर्माण अधूरा
गुरुकुल परिसर में तीन साल पहले यूपी पीडब्ल्यूडी ने ओपीडी के लिए नई बिल्डिंग बनाने का काम शुरू किया, लेकिन बजट नहीं मिलने पर संस्था ने काम अधूरा छोड़ दिया। बिल्डिंग में बिजली, पानी की फिटिंग तक नहीं हो सकी। बिल्डिंग में केवल स्टोर खोल रखा है। जहां पंखे और लाइट के लिए दूसरी बिल्डिंग से बिजली का तार जोड़ रखे हैं।
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वर्जन
आयुर्वेद को बढ़ावा देने की बात केवल भाषणों में हो रही है, मौके पर कुछ नहीं हो रहा। नई यूनिवर्सिटी बनी है, संसाधनों के अभाव होने की बात कर दी जाती है। अब नए आयुष मंत्री को बदहाली दिखाई है, उन्हें प्रस्ताव भेजे जाएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया है।
प्रो. बल्लभ सती, निदेशक, गुरुकुल परिसर।
हरिद्वार।
दीपक तले अंधेरा की कहावत गुरुकुल आयुर्वेदिक परिसर पर सटीक बैठती है। 95 वर्षों से देश को आयुर्वेद के डाक्टर दे रहा गुरुकुल आयुर्वेदिक परिसर खुद बीमार है। लाइफ लाइन समझी जाने वाली सड़कें उबड़-खाबड़ हो गई तो कैंपस भी जर्जर हो गया है। कई वर्षों से रंगाई पुताई नहीं होने से दीवारें बदरंग हो गई हैं। अधिकारी बताते हैं कि मरम्मत के लिए बजट नहीं मिलने से यह स्थिति बनी है।
आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए 1922 में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय परिसर में आयुर्वेदिक कालेज की स्थापना की गई। देश की आजादी के बाद कालेज में अनेक विकास कार्य हुए और शोध कार्यों पर बढ़ावा दिया गया। कालेज से पढ़ाई कर छात्रों ने देश में आयुर्वेद के साथ-साथ उच्च पदों पर सेवाएं दी। गुरुकुल आयुर्वेदिक परिसर में 108 बेड के अस्पताल के साथ-साथ प्रत्येक मर्ज के विशेषज्ञों की अच्छी खासी तादाद है। बीएएमएस की 50 सीटों के साथ एमडी की भी 12 सीटें हैं। उत्तराखंड बनने के बाद से आयुर्वेद कालेज परिसर का विकास ठप हो गया है। जबकि सरकार बराबर आयुष प्रदेश बनाने का दावा करते नहीं थकती। गुरुकुल कालेज के अस्पताल की एंबुलेंस वैन का 6-7 वर्षों से संचालन नहीं होने से चह जर्जर हो गई है। कालेज के प्रोफेसरों ने बताया कि कुलपति और अन्य अधिकारियों को परिसर में निरीक्षण कराने के बाद भी बजट जारी नहीं हो सका। विधायक आदेश चौहान को कई बार प्रस्ताव देने के बाद उन्होंने भी कुछ नहीं किया। अब नई सरकार के आयुष मंत्री हरक सिंह रावत को निरीक्षण कराया है और उन्होंने आश्वासन दिया है।
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भवन निर्माण अधूरा
गुरुकुल परिसर में तीन साल पहले यूपी पीडब्ल्यूडी ने ओपीडी के लिए नई बिल्डिंग बनाने का काम शुरू किया, लेकिन बजट नहीं मिलने पर संस्था ने काम अधूरा छोड़ दिया। बिल्डिंग में बिजली, पानी की फिटिंग तक नहीं हो सकी। बिल्डिंग में केवल स्टोर खोल रखा है। जहां पंखे और लाइट के लिए दूसरी बिल्डिंग से बिजली का तार जोड़ रखे हैं।
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आयुर्वेद को बढ़ावा देने की बात केवल भाषणों में हो रही है, मौके पर कुछ नहीं हो रहा। नई यूनिवर्सिटी बनी है, संसाधनों के अभाव होने की बात कर दी जाती है। अब नए आयुष मंत्री को बदहाली दिखाई है, उन्हें प्रस्ताव भेजे जाएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया है।
प्रो. बल्लभ सती, निदेशक, गुरुकुल परिसर।