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समय पर नहीं आई 108, नवजात की मौत
ब्यूरो / अमर उजाला, त्यूनी
Updated Sat, 15 Oct 2016 11:46 AM IST
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स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के उत्तराखंड सरकार के तमाम दावों के बावजूद प्रदेश में जच्चा और बच्चा की मृत्यु पर लगाम नहीं लग पा रही है।
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हाल ही में इलाज नहीं मिलने और 108 सेवा की लापरवाही से गर्भवती की मौत के बाद शुक्रवार को नवजात ने पैदा होने के चंद मिनटों बाद वाहन में ही दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि समय पर 108 एंबुलेंस नहीं पहुंचने के कारण मासूम की जान गई है। उनका कहना है कि प्रसूता और नवजात को समय पर इलाज नहीं मिल सका। घटना देहरादून जिले के त्यूनी तहसील स्थित दुर्गम गांव बुल्हाड़ की है।
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चंद्र बहादुर की पत्नी कलेशा (19) को बृहस्पतिवार की रात प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने रात 10:26 बजे आपातकालीन 108 एंबुुलेंस सेवा को फोन किया। इसके बाद चकराता से 108 एंबुलेंस बुल्हाड़ गांव के लिए रवाना हुई। पूर्व जिला पंचायत सदस्य विजयपाल सिंह रावत का आरोप है कि जब देर रात 12 बजे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची तो वह निजी वाहन से ही प्रसूता को लेकर चकराता रवाना हुए।
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गांव से करीब आठ किमी आगे कांडोई के समीप महिला ने वाहन में ही बच्चे को जन्म दे दिया। लेकिन कुछ देर बाद ही नवजात ने दम तोड़ दिया। आधे रास्ते से ही परिजन महिला को लेकर गांव लौट गए।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने कहा लगाया कि 108 कर्मियों ने रास्ता खराब होने के चलते एंबुलेंस के गांव तक नहीं पहुंचने की बात कही है। उनका आरोप है कि जौनसार बावर क्षेत्र के अस्पतालों में डॉक्टर भी नहीं है। जिसके चलते आए दिन लोगों को समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण जान गंवानी पड़ती है।
गांव की दूरी चकराता से करीब 55 किमी है। फोन आते ही एंबुलेंस गांव के लिए मूव कर गई। लेकिन बिनसोन से आगे सड़क बदहाल होने के चलते एंबुलेंस आगे नहीं बढ़ सकी। हमने वहीं करीब 30-40 मिनट तक इंतजार किया। इस बीच हम लगातार कॉलर के संपर्क में रहे। बाद में कॉलर ने ही हमें बच्चे के जन्म लेने और फिर उसके मृत होने की जानकारी देकर लौट जाने को कहा।
- पंकज, 108 कर्मी
आरोपों को गंभीरता से लेकर इसकी जांच कराई जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- मनीष टिक्कू, सीईओ 108 सेवा