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सरकार 108 के नए 'करार' को तैयार
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 04 Dec 2013 11:41 AM IST
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उत्तराखंड में पांच बरस से बिना करार से चल रही 108 आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का अब नए सिरे से करार होगा।
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नए करार की शर्तें तैयार कर दी हैं, जिसमें शत प्रतिशत सरकारी अनुदान की चार बरस से मिल रही रियायत खत्म करते हुए अब 95 फीसदी सरकार और पांच फीसदी कंपनी की हिस्सेदारी तय होगी।
गौरतलब है कि अमर उजाला ने बिना करार सेवा संचालन के मामले का खुलासा किया, जिसके बाद शासन ने नई शर्तों के साथ करार की कवायद आरंभ की है। इतना ही नहीं कैग ने हाल ही में अपने परफार्मेंस ऑडिट में भी 108 सेवा पर कई आडिट आपत्तियां दर्ज करवाई हैं।
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करार किए बिना सेवाएं
वर्ष 2008 में सरकार ने जिस निजी संस्थान से 108 सेवा संचालन का करार किया था वह अब आस्तित्व में नहीं है। 2009 से जिस कंपनी के माध्यम से सेवाएं चल रही हैं उसके साथ औपचारिक एमओयू हस्ताक्षरित नहीं है।
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नवंबर 2012 में मामला उजागर होने के बाद शासन के कान खड़े हुए हुए कि आखिर इतने लंबे अरसे तक एमओयू में नई कंपनी से करार किए बिना सेवाएं कैसे चलती रही है।
मंगलवार को मुख्य सचिव सुभाष कुमार की अध्यक्षता में अपर मुख्य सचिव वित्त राकेश शर्मा और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओमप्रकाश की बैठक में यह फैसला लिया कि 9 दिसंबर को विभाग और 108 जीवीके ईएमआरआई के बीच करार होगा।
क्या है मामला
सत्यम कंप्यूटर्स ने ईएमआरआई (इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट) का गठन कियी था, जिसके साथ 2008 में मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी के सीधे निर्देश पर 108 सेवा संचालित करने का करार हुआ। शासन ने कंपनी से एमओयू में इमरजेंसी सेवाएं संचालित करने का 95 फीसदी राज्य सरकार को तथा 5 फीसदी ईएमआरआई को दिया।
जनवरी 2009 में सत्यम कंप्यूटर्स आर्थिक घोटाले में फंस गया, जिसके बाद ईएमआरआई को जीवीके कंपनी ने खरीद लिया। शासन ने पुराने करार को चालू रख शतप्रतिशत अनुदान का लाभ भी कंपनी को दे दिया।