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तैनाती तहसील भटवाड़ी में और जिला मुख्यालय पर बैठकर कर रहे हैं काम
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उत्तरकाशी। सीमांत क्षेत्र के विकास और ग्रामीणों की सुविधा के लिए दशकों पूर्व स्थापित भटवाड़ी तहसील से अधिकांश सरकारी विभागों द्वारा अपने दफ्तर समेट लिए जाने से ग्रामीणों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने की बाध्यता के चलते क्षेत्र के ग्रामीण पलायन करने को मजबूर हैं।
क्षेत्र के कुशला प्रसाद रतूड़ी, क्षेत्र पंचायत सदस्य राघवानंद नौटियाल आदि ने बताया कि यहां तहसील एवं ब्लाक के साथ ही जल संस्थान, सिंचाई, बाल विकास, खादी ग्रामोद्योग, सब कोषागार समेत दो दर्जन से ज्यादा विभागों के दफ्तर खुले थे। इन दफ्तरों में अधिकारी-कर्मचारियों की मौजूदगी से यहीं ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान हो जाता था। सीमांत क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों पर भी अधिकारियों की नजर रहती थी। अब हाल यह है कि अधिकांश दफ्तर बंद हो चुके हैं। भटवाड़ी के नाम पर तैनात अधिकारी-कर्मचारी जिला मुख्यालय से ही कार्य संपादित कर रहे हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2010 में भटवाड़ी में आयी आपदा के बाद तो स्थिति बहुत विकट हो गई है। सरकार ने विकासखंड के निचले इलाकों की सुविधा के लिए जोशियाड़ा में उपतहसील बनायी। अब स्थिति यह है कि भटवाड़ी मुख्य तहसील में सन्नाटा पसरा है। तहसील का पुराना भवन भूधंसाव की चपेट में आकर ध्वस्त हो चुका है। एनटीपीसी के कुछ कमरों में तहसील दफ्तर तो खोला गया, लेकिन यहां कोई अधिकारी नहीं रहता। क्षेत्र के राजेश रतूड़ी, विनोद रतूड़ी, रवि रावत ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर भटवाड़ी में स्वीकृत सभी दफ्तरों को पुनर्जीवित करने व अधिकारी-कर्मचारियों को वहीं ड्यूटी पर तैनात करने की मांग की है।
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क्षेत्र के कुशला प्रसाद रतूड़ी, क्षेत्र पंचायत सदस्य राघवानंद नौटियाल आदि ने बताया कि यहां तहसील एवं ब्लाक के साथ ही जल संस्थान, सिंचाई, बाल विकास, खादी ग्रामोद्योग, सब कोषागार समेत दो दर्जन से ज्यादा विभागों के दफ्तर खुले थे। इन दफ्तरों में अधिकारी-कर्मचारियों की मौजूदगी से यहीं ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान हो जाता था। सीमांत क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों पर भी अधिकारियों की नजर रहती थी। अब हाल यह है कि अधिकांश दफ्तर बंद हो चुके हैं। भटवाड़ी के नाम पर तैनात अधिकारी-कर्मचारी जिला मुख्यालय से ही कार्य संपादित कर रहे हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2010 में भटवाड़ी में आयी आपदा के बाद तो स्थिति बहुत विकट हो गई है। सरकार ने विकासखंड के निचले इलाकों की सुविधा के लिए जोशियाड़ा में उपतहसील बनायी। अब स्थिति यह है कि भटवाड़ी मुख्य तहसील में सन्नाटा पसरा है। तहसील का पुराना भवन भूधंसाव की चपेट में आकर ध्वस्त हो चुका है। एनटीपीसी के कुछ कमरों में तहसील दफ्तर तो खोला गया, लेकिन यहां कोई अधिकारी नहीं रहता। क्षेत्र के राजेश रतूड़ी, विनोद रतूड़ी, रवि रावत ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर भटवाड़ी में स्वीकृत सभी दफ्तरों को पुनर्जीवित करने व अधिकारी-कर्मचारियों को वहीं ड्यूटी पर तैनात करने की मांग की है।
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