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शिक्षकों का मनमाने ढंग से वेतन निर्धारण कर रहे अधिकारी
Updated Thu, 01 Nov 2018 01:48 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
शिक्षा विभाग में कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों के वेतन निर्धारण में शासनादेशों की धज्जियां उड़ाने और अधिकारियों द्वारा चहेते अध्यापकोें का मनमाने ढंग से वेतन निर्धारण का मामला सामने आया है। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से मामला निदेशालय के संज्ञान में लाया गया है। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं कि वे सेवा नियमावली के अनुसार ही शिक्षकों का वेतन निर्धारण करें।
अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा बीएस रावत की ओर से जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि शिक्षकों के वित्तीय प्रकरणों में उप शिक्षाधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से शासनादेशों को परिभाषित किया जा रहा है। इससे एक ही जिले में अलग अलग विकास खंडों में एक ही संवर्ग के शिक्षकों को अलग अलग वेतनमान दिया जा रहा है। इससे विसम परिस्थितियां हो गईं हैं। इतना ही नहीं साल 2014 में औपबंधिक आधार पर नियुक्त शिक्षकों को निदेशालय से वेतन वृद्धि किए जाने के आदेश के उपरांत अलग अलग जिलों के विकासखंडों में अधिकारियों द्वारा वेतन वृद्धि के लिए अलग अलग मानक अपनाए जा रहे हैं, जो नियमों के विपरीत हैं। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इस संबंध में उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से भी शिकायतें दर्ज कराई गईं हैं। ऐसे में शिक्षकों के वेतन निर्धारण के संबंध में पूर्व में दिए गए निर्देशों और उत्तराखंड राजकीय प्रारंभिक शिक्षा सेवा नियमावली 2012 के प्रावधानों के अनुसार ही वेतन निर्धारण किया जाए। वेतन निर्धारण में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता न बरती जाए।
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शिक्षा विभाग में कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों के वेतन निर्धारण में शासनादेशों की धज्जियां उड़ाने और अधिकारियों द्वारा चहेते अध्यापकोें का मनमाने ढंग से वेतन निर्धारण का मामला सामने आया है। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से मामला निदेशालय के संज्ञान में लाया गया है। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं कि वे सेवा नियमावली के अनुसार ही शिक्षकों का वेतन निर्धारण करें।
अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा बीएस रावत की ओर से जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि शिक्षकों के वित्तीय प्रकरणों में उप शिक्षाधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से शासनादेशों को परिभाषित किया जा रहा है। इससे एक ही जिले में अलग अलग विकास खंडों में एक ही संवर्ग के शिक्षकों को अलग अलग वेतनमान दिया जा रहा है। इससे विसम परिस्थितियां हो गईं हैं। इतना ही नहीं साल 2014 में औपबंधिक आधार पर नियुक्त शिक्षकों को निदेशालय से वेतन वृद्धि किए जाने के आदेश के उपरांत अलग अलग जिलों के विकासखंडों में अधिकारियों द्वारा वेतन वृद्धि के लिए अलग अलग मानक अपनाए जा रहे हैं, जो नियमों के विपरीत हैं। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इस संबंध में उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से भी शिकायतें दर्ज कराई गईं हैं। ऐसे में शिक्षकों के वेतन निर्धारण के संबंध में पूर्व में दिए गए निर्देशों और उत्तराखंड राजकीय प्रारंभिक शिक्षा सेवा नियमावली 2012 के प्रावधानों के अनुसार ही वेतन निर्धारण किया जाए। वेतन निर्धारण में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता न बरती जाए।
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