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रूट को लेकर खूब रुलाएगी कांवड़ यात्रा
Updated Thu, 15 Jun 2017 10:27 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नौ जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन बार बार रूट बदल रहा है। ऐसे में रूट से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ने के साथ टकराव बढ़ने की आशंका भी है। केवल एक ही हरिद्वार-लक्सर मार्ग है जो यात्रा को सकुशल निकाल सकता है।
प्रशासन फाटक के रास्ते ज्वालापुर से यात्रा निकालने की तैयारी करने में जुटा है। जबकि यात्रा को चंद्राचार्य चौक के रास्ते भेल और शिवालिक नगर होते हुए निकाले। ज्वालापुर फाटक वाले मार्ग से यात्रा निकालने का निर्णय भारी पड़ सकता है। अप और डाउन गाड़ियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि यह रेलवे फाटक पांच दस मिनट के लिए ही खुलता है और जबरन बंद करना पड़ता है। यह तय है कि यदि इसी मार्ग से कांवड़ियों को वापस भेजा गया तो न तो फाटक कभी बंद हो पाएगा और न ही रेल गाड़ियां हरिद्वार आ पाएंगी। इस सूरत में रेल गाड़ियों को लक्सर और रुड़की में रोकना मजबूरी बन जाएगी।
आर्यनगर से ट्रांसपोर्ट नगर होते हुए यात्रा निकालना सुरक्षा की दृष्टि से भी गलत होगा। इस मार्ग पर हजारों वाहन प्रति दिन गुजरते हैं, जिन्हें ज्वालापुर और हरिद्वार के बीच जाने का केवल एक ही रास्ता है। हाईवे पर केवल भारी वाहन ही निकाले जा सकते हैं। कांवड़ यात्रा को रोड़ीबेलवाला के रास्ते शंकराचार्य चौक और सिंहद्वार होते हुए रेलवे लाल पुल मार्ग से ले जाना बीच में गहरी खाई के कारण कतई असंभव है। यहां भी समस्या रेलवे लाइन को पार करने की है। इस रास्ते से बेहतर मार्ग तो मध्य हरिद्वार से भगत सिंह चौक होते हुए भेल और शिवालिक नगर के रास्ते यात्रा को बहादराबाद मार्ग पर ले जाना होता। सबसे बेहतर रास्ता देशरक्षक औषधालय या बैरागी द्वीप से जियापोता होते हुए लक्सर और रुड़की की ओर ले जाना है। इस रास्ते से यदि यात्रा निकले तो लाखों कांवडिय़ों की भीड़ से पहले ही परेशान हरिद्वारवासियों को नगर में चलने का कोई मार्ग मिल सकता है।
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कांवड़ यात्रा आरंभ होने में अब चंद दिन शेष हैं। सावन का महीना नौ जुलाई गुरु पूर्णिमा से प्रारंभ हो जाएगा। गुरु पूर्णिमा से ही कांवड़ यात्रा शुरू होगी।
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हरिद्वार।
नौ जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन बार बार रूट बदल रहा है। ऐसे में रूट से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ने के साथ टकराव बढ़ने की आशंका भी है। केवल एक ही हरिद्वार-लक्सर मार्ग है जो यात्रा को सकुशल निकाल सकता है।
प्रशासन फाटक के रास्ते ज्वालापुर से यात्रा निकालने की तैयारी करने में जुटा है। जबकि यात्रा को चंद्राचार्य चौक के रास्ते भेल और शिवालिक नगर होते हुए निकाले। ज्वालापुर फाटक वाले मार्ग से यात्रा निकालने का निर्णय भारी पड़ सकता है। अप और डाउन गाड़ियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि यह रेलवे फाटक पांच दस मिनट के लिए ही खुलता है और जबरन बंद करना पड़ता है। यह तय है कि यदि इसी मार्ग से कांवड़ियों को वापस भेजा गया तो न तो फाटक कभी बंद हो पाएगा और न ही रेल गाड़ियां हरिद्वार आ पाएंगी। इस सूरत में रेल गाड़ियों को लक्सर और रुड़की में रोकना मजबूरी बन जाएगी।
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आर्यनगर से ट्रांसपोर्ट नगर होते हुए यात्रा निकालना सुरक्षा की दृष्टि से भी गलत होगा। इस मार्ग पर हजारों वाहन प्रति दिन गुजरते हैं, जिन्हें ज्वालापुर और हरिद्वार के बीच जाने का केवल एक ही रास्ता है। हाईवे पर केवल भारी वाहन ही निकाले जा सकते हैं। कांवड़ यात्रा को रोड़ीबेलवाला के रास्ते शंकराचार्य चौक और सिंहद्वार होते हुए रेलवे लाल पुल मार्ग से ले जाना बीच में गहरी खाई के कारण कतई असंभव है। यहां भी समस्या रेलवे लाइन को पार करने की है। इस रास्ते से बेहतर मार्ग तो मध्य हरिद्वार से भगत सिंह चौक होते हुए भेल और शिवालिक नगर के रास्ते यात्रा को बहादराबाद मार्ग पर ले जाना होता। सबसे बेहतर रास्ता देशरक्षक औषधालय या बैरागी द्वीप से जियापोता होते हुए लक्सर और रुड़की की ओर ले जाना है। इस रास्ते से यदि यात्रा निकले तो लाखों कांवडिय़ों की भीड़ से पहले ही परेशान हरिद्वारवासियों को नगर में चलने का कोई मार्ग मिल सकता है।
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कांवड़ यात्रा आरंभ होने में अब चंद दिन शेष हैं। सावन का महीना नौ जुलाई गुरु पूर्णिमा से प्रारंभ हो जाएगा। गुरु पूर्णिमा से ही कांवड़ यात्रा शुरू होगी।