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Dehradun News: दस हजार महिलाकर्मी चुपचाप सह रहीं असुविधा का दर्द
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Iकैंप रोड औद्योगिक क्षेत्र में नहीं है एक भी सार्वजनिक शौचालयI
कैंप रोड औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाली 10 हजार महिला कर्मचारी पिछले कई वर्षों से चुपचाप असुविधा का दर्द झेल रही हैं। यहां करीब 60 से 70 औद्योगिक इकाईयां हैं। करीब 20 हजार कर्मचारी औद्योगिक क्षेत्र की फैक्टरियों में काम करते हैं। वहीं, रोजाना बड़ी संख्या में महिला और पुरूष काम की तलाश में औद्योगिक क्षेत्र में पहुंचते हैं। हैरानी की बात है कि यहां एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है। सबसे पास स्थित नगर पंचायत का सार्वजनिक शौचालय करीब तीन किलोमीटर दूर है। पुरूष कर्मचारी तो सड़क के किनारे पेड़, झाड़ियों या दीवार की आड़ लेकर शौच की शंका से मुक्ति पा लेते हैं, लेकिन महिला कर्मचारियों को इमरजेंसी में भी अपनी फैक्टरी तक या तीन किलोमीटर दूर स्थित सार्वजनिक शौचालय तक पहुंचने का इंतजार करना पड़ता है। महिला कर्मचारी अपनी आधी आबादी के हक के रूप में पिंक शौचालय के निर्माण की मांग कर रहीं हैं।
Iवर्जनI
Iचार सालों से इलेक्ट्रॉनिक आइटम बनाने की कंपनी में काम कर रही हूं। कंपनी से घर की दूरी तीन किलोमीटर है। कई बार इमरजेंसी होने पर बड़ी दिक्कत होती है। महिलाओं के शौचालय बनना बहुत जरूरी है। - सीमा, फैक्टरीकर्मी I
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Iऔद्योगिक क्षेत्र में महिला कर्मचारियों की संख्या सबसे अधिक है। यहां काम करने वाली कई महिलाएं इमरजेंसी में होने वाली परेशानी से रोज गुजरती हैं। महिलाओं के लिए अलग से महिला शौचालय बनाना चाहिए। - नैना भारद्वाज, फैक्टरीकर्मी I
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Iकंपनी में सुबह की शिफ्ट का समय आठ बजे है। घर से सात बजे ही निकलना पड़ता है। कई बार इमरजेंसी की स्थिति में बहुत परेशानी होती है। यहां कहीं भी शौचालय की व्यवस्था नहीं है। - ममता देवी, फैक्टरीकर्मी I
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Iकाम की तलाश कर रही हूं। कई कंपनियों नौकरी के लिए आवेदन कर रही हूं। इसमें काफी समय लगता है। इमरजेंसी में बड़ी दिक्कत हो जाती है। महिलाओं और पुरूषों के लिए अलग अलग शौचालय बनाए जाएं। - शिवानी देवी, बेरोजगारI
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I2003 में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हुआ था। पेयजल, शौचालय, स्ट्रीट लाइट जैसी कोई भी सुविधा के लिए कोई काम नहीं किया गया। उद्योग मित्रों की बैठक में शासन-प्रशासन को कई बार मूलभूत सुविधाओं की दिक्कतों के बारे में बताया जा चुका है। सरकार शायद कंपनियों के पलायन का इंतजार कर रही है। - सुनील उनियाल, अध्यक्ष, इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन, सेलाकुई I
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Iअभी तक मोबाइल शौचालय के लिए कोई पत्र नहीं आया है। अगर औद्योगिक क्षेत्र का कोई संगठन मांग करता है तो औद्योगिक क्षेत्र में मोबाइल शौचालय लगवाया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्र से नगर पंचायत को किसी प्रकार का कर नहीं मिलता है। ऐसे में शौचालय का निर्माण कैसे करवाया जाए। - एमएल शाह, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत सेलाकुई।I
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कैंप रोड औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाली 10 हजार महिला कर्मचारी पिछले कई वर्षों से चुपचाप असुविधा का दर्द झेल रही हैं। यहां करीब 60 से 70 औद्योगिक इकाईयां हैं। करीब 20 हजार कर्मचारी औद्योगिक क्षेत्र की फैक्टरियों में काम करते हैं। वहीं, रोजाना बड़ी संख्या में महिला और पुरूष काम की तलाश में औद्योगिक क्षेत्र में पहुंचते हैं। हैरानी की बात है कि यहां एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है। सबसे पास स्थित नगर पंचायत का सार्वजनिक शौचालय करीब तीन किलोमीटर दूर है। पुरूष कर्मचारी तो सड़क के किनारे पेड़, झाड़ियों या दीवार की आड़ लेकर शौच की शंका से मुक्ति पा लेते हैं, लेकिन महिला कर्मचारियों को इमरजेंसी में भी अपनी फैक्टरी तक या तीन किलोमीटर दूर स्थित सार्वजनिक शौचालय तक पहुंचने का इंतजार करना पड़ता है। महिला कर्मचारी अपनी आधी आबादी के हक के रूप में पिंक शौचालय के निर्माण की मांग कर रहीं हैं।
Iवर्जनI
Iचार सालों से इलेक्ट्रॉनिक आइटम बनाने की कंपनी में काम कर रही हूं। कंपनी से घर की दूरी तीन किलोमीटर है। कई बार इमरजेंसी होने पर बड़ी दिक्कत होती है। महिलाओं के शौचालय बनना बहुत जरूरी है। - सीमा, फैक्टरीकर्मी I
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Iऔद्योगिक क्षेत्र में महिला कर्मचारियों की संख्या सबसे अधिक है। यहां काम करने वाली कई महिलाएं इमरजेंसी में होने वाली परेशानी से रोज गुजरती हैं। महिलाओं के लिए अलग से महिला शौचालय बनाना चाहिए। - नैना भारद्वाज, फैक्टरीकर्मी I
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Iकंपनी में सुबह की शिफ्ट का समय आठ बजे है। घर से सात बजे ही निकलना पड़ता है। कई बार इमरजेंसी की स्थिति में बहुत परेशानी होती है। यहां कहीं भी शौचालय की व्यवस्था नहीं है। - ममता देवी, फैक्टरीकर्मी I
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Iकाम की तलाश कर रही हूं। कई कंपनियों नौकरी के लिए आवेदन कर रही हूं। इसमें काफी समय लगता है। इमरजेंसी में बड़ी दिक्कत हो जाती है। महिलाओं और पुरूषों के लिए अलग अलग शौचालय बनाए जाएं। - शिवानी देवी, बेरोजगारI
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I2003 में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हुआ था। पेयजल, शौचालय, स्ट्रीट लाइट जैसी कोई भी सुविधा के लिए कोई काम नहीं किया गया। उद्योग मित्रों की बैठक में शासन-प्रशासन को कई बार मूलभूत सुविधाओं की दिक्कतों के बारे में बताया जा चुका है। सरकार शायद कंपनियों के पलायन का इंतजार कर रही है। - सुनील उनियाल, अध्यक्ष, इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन, सेलाकुई I
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Iअभी तक मोबाइल शौचालय के लिए कोई पत्र नहीं आया है। अगर औद्योगिक क्षेत्र का कोई संगठन मांग करता है तो औद्योगिक क्षेत्र में मोबाइल शौचालय लगवाया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्र से नगर पंचायत को किसी प्रकार का कर नहीं मिलता है। ऐसे में शौचालय का निर्माण कैसे करवाया जाए। - एमएल शाह, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत सेलाकुई।I