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बारिश ने गंगा जल को संक्रमित होने से बचा लिया
रजा शास्त्री
Updated Fri, 12 Jul 2013 09:53 AM IST
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जल प्रलय के बाद पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश ने गंगा जल को संक्रमित होने से बचा लिया है। गंगा में जल का वाल्यूम सामान्य से कई गुना अधिक है, जिससे पानी में वायरस और बैक्टीरिया नहीं बढ़ पा रहे।
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उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव विनोद सिंघल का कहना है कि गंगा में जल बहुत अधिक होने से संक्रमण का खतरा टल रहा है।
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जल विज्ञानियों ने आशंका व्यक्त की थी कि भूस्खलन, शवों के सड़ने और दूसरी गंदगी के कारण आपदा के तीन हफ्ते के बाद गंगा जल में प्रदूषण अधिक बढ़ेगा। खासतौर पर वायरस और बैक्टीरिया का खतरा बताया जा रहा था।
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इस आशंका के मद्देनजर उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रतिदिन गंगा जल के सैंपल की जांच करा रहा है। लेकिन लगातार बारिश की वजह से गंगा में बराबर बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। इससे वायरस और बैक्टीरिया का पानी में लोड नहीं बढ़ पा रहा है।
अधिक संक्रमण नहीं फैला
गंगा की स्थिति का आकलन कर रहे विज्ञानियों का कहना है कि मानव शव या तो किनारे लग गए या फिर नदी की गाद में दबे हुए हैं। बहाव तेज है और पानी सीधे ग्लेशियर से आने की वजह से हरिद्वार, ऋषिकेश में इसका तापमान कम रहता है। इस वजह से शवों से अधिक संक्रमण नहीं फैल पा रहा है।
विज्ञानियों का कहना है कि हरिद्वार के आगे मैदानी क्षेत्रों में पानी में वायरस और बैक्टीरिया का लोड डायल्यूट हो जाएगा। आपदा के बाद मंदाकिनी से गंगा में आने वाला मानव संक्रमण शून्य हो गया है। गंगोत्री का पानी फिलहाल ठीक है।
लगातार पानी की मानीटरिंग
बोर्ड के सदस्य सचिव सिंघल ने बताया कि पानी की मानीटरिंग लगातार हो रही है। बारिश से सिल्ट की मात्रा बढ़ी है। इससे बीओडी (बायो-केमिकल आक्सीजन डिमांड) बढ़ गई है। सामान्य तौर पर आक्सीजन प्रति लीटर पानी तीन मिग्रा होनी चाहिए। सिंघल का कहना है कि पानी में ठहराव आएगा तभी वायरस और बैक्टीरिया पनपने का खतरा पैदा होगा। बहाव तेज होने तक कोई खतरा नहीं है।