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12 साल में कटे 11 हजार पेड़
देहरादून/ब्यूरो
Updated Fri, 14 Jun 2013 01:48 PM IST
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राजधानी से हरियाली गायब होती जा रही है। नए पौधे लग तो रहे हैं, लेकिन वह पेड़ नहीं बन पा रहे हैं। खासतौर पर खतरनाक पेड़ों की आड़ में आम और लीची के बागों का सुनियोजित तरीके से सफाया हो रहा है। इसको लेकर जंगलात से लेकर उद्यान महकमे तक पर सवाल खड़ा हो रहा है।
तीन माह पहले सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में खुलासा हुआ था कि पिछले 12 साल में 11 हजार से अधिक हरे पेड़ों का दून से सफाया हो चुका है। इस अवधि में सबसे अधिक 2306 हरे पेड़ों की हत्या 2012 में की गई।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 2012 में निजी जमीनों पर 800 हरे पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी। जबकि 142 पुराने पेड़ काटे गए। निजी जमीनों से खतरनाक हो चुके 946 पेड़ काटे गए, जबकि सार्वजनिक स्थानों पर यह आंकड़ा 143 रहा। इसके अलावा सार्वजनिक हरे पेड़ 275 काटे गए। अगर इसी तेजी से हरे पेड़ों की हत्या होती रही तो आने वाले दिनों में स्थिति बेहद खतरनाक हो जाएगी।
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पिछले पांच साल में कटे पेड़
2008 521
2009 863
2010 548
2011 2212
2012 2306
(नोट : इसमें सिर्फ वही मामले शामिल हैं, जिनकी अनुमति मांगी गई। साथ ही उन मामलों को भी शामिल नहीं किया गया है, जिनमें चालान किया गया)
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तीन माह पहले सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में खुलासा हुआ था कि पिछले 12 साल में 11 हजार से अधिक हरे पेड़ों का दून से सफाया हो चुका है। इस अवधि में सबसे अधिक 2306 हरे पेड़ों की हत्या 2012 में की गई।
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उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 2012 में निजी जमीनों पर 800 हरे पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी। जबकि 142 पुराने पेड़ काटे गए। निजी जमीनों से खतरनाक हो चुके 946 पेड़ काटे गए, जबकि सार्वजनिक स्थानों पर यह आंकड़ा 143 रहा। इसके अलावा सार्वजनिक हरे पेड़ 275 काटे गए। अगर इसी तेजी से हरे पेड़ों की हत्या होती रही तो आने वाले दिनों में स्थिति बेहद खतरनाक हो जाएगी।
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पिछले पांच साल में कटे पेड़
2008 521
2009 863
2010 548
2011 2212
2012 2306
(नोट : इसमें सिर्फ वही मामले शामिल हैं, जिनकी अनुमति मांगी गई। साथ ही उन मामलों को भी शामिल नहीं किया गया है, जिनमें चालान किया गया)