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थाना-चौकी पास, रिपोर्ट लिखाने जाओ दूर
Dehradun
Updated Sat, 01 Jun 2013 05:30 AM IST
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देहरादून। दिखने का थाना पांच किलोमीटर पर और रिपोर्ट लिखाने वाला साठ किलोमीटर दूर। हाथी के दांतों सरीखी यह स्थिति रानीपोखरी और थानो न्याय पंचायत के दर्जनों गांवों पर लागू है। वर्षों पूर्व अविभाजित यूपी में हुए गलत परिसीमन का खामियाजा भुगत रहे हजारों ग्रामीण छोटी से छोटी चोरी, मारपीट और अन्य मामलों के लिए मीलों लंबी दौड़ से आजिज आ चुके हैं। रिपोर्ट दर्ज कराने उनके कदम रानीपोखरी थाने के पास से गुजरते तो हैं, लेकिन यहां थमते नहीं। गलती से थम भी जाएं तो उन्हें श्यामपुर थाने का रास्ता दिखा दिया जाता है। लेकिन राज्य गठन के 12 साल बाद भी सरकार की नजरें इस ओर नहीं पड़ी हैं। ऐसा भी नहीं कि ग्रामीणों ने कभी इस पर आवाज नहीं उठाई या शासन तक बात नहीं पहुंची, लेकिन ‘बेवजह की सिरदर्दी कौन ले’ की तर्ज पर सुधार की फाइल अफसरों की अलमारियों की शोभा बढ़ा रही है।
यह है समस्या
रानीपोखरी थाने के सृजन से पूर्व इस क्षेत्र के लगभग सभी गांव ऋषिकेश थाने में आते थे। तब रानीपोखरी और श्यामपुर में पुलिस चौकियां थीं। रानीपोखरी चौकी में 27 गांव शामिल थे, जबकि 23 गांव श्यामपुर से जोड़े गए। वर्ष 2003 में रानीपोखरी थाना बना तो श्यामपुर से जुड़े 23 गांवों को भी यहां लाने की उम्मीद जगी, लेकिन नौ साल बाद भी पुलिस, प्रशासन और शासन का ध्यान क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और जनता की परेशानियों पर नहीं गया है।
ये गांव श्यामपुर चौकी में
धारकोट, शिम्याद, सीरियो, बैरागढ़, रखवाल, तलाई अपर, रामनगर, डांडा विशनगढ़, चोकियो, घंडोल, बडेरना कलां, बडेरना खुर्द, बडेरना मझला, कटकूर खुर्द, अखंडवाली भिलंग, कुठार, लडवाकोट, लल्द्वाड़ी, गढ़ तंगोली, कंडोगल, कुठाल और धम्मूवाला। इनमें से अधिकतर गांव पर्वतीय क्षेत्र में आते हैं और ज्यादातर की श्यामपुर चौकी से दूरी 25 से 60 किलोमीटर तक पड़ती है।
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पुलिस भी परेशान
संबंधित गांवों की दूरी का खामियाजा ग्रामीणों के साथ श्यामपुर चौकी पुलिस को भी भुगतना पड़ता है। ग्रामीणों की मानें तो मामूली घटनाआें पर पुलिसकर्मी भी 60 किलोमीटर की लंबी दौड़ लगाना मुनासिब नहीं समझते। ऐसा इसलिए भी कि छोटी मारपीट आदि पर पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी भाग निकलते हैं या मामला स्थानीय लोग सुलटा लेते हैं। क्षेत्र में पुलिस अकसर तभी नजर आती है, जब यहां कोई बड़ा हादसा या घटना हो जाए।
नए परिसीमन की जरूरत
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मानें तो रानीपोखरी थाने के माध्यम से कई बार प्रस्ताव शासन को भेजा, लेकिन फाइल कहां है कुछ पता नहीं चल रहा। ग्रामीण कहते हैं कि विसंगति ठीक की जानी चाहिए। आसपास के सभी गांवों को श्यामपुर-ऋषिकेश से हटाकर रानीपोखरी या डोईवाला थाने से जोड़ा जाना चाहिए। इनमें से तीन-चार गांव रायपुर थाने से जुड़ सकते हैं। सुविधा को देखते हुए ग्रामीण जौलीग्रांट और लालतप्पड़ पुलिस चौकी को भी रानीपोखरी थाने से जोड़ने की बात कहते हैं।
जनहित से जुड़ा मुद्दा इतने लंबे समय से अटका है, हैरत की बात है। यह मेरे संज्ञान में नहीं था। पूर्व में दिए गए प्रस्ताव या इस संबंध में आने वाले किसी भी नए प्रस्ताव को प्राथमिकता के आधार देखा जाएगा।
-बीवीआरसी पुरुषोत्तम, जिलाधिकारी
स्थिति वाकई चिंताजनक है। जब थाना-चौकी पास हैं तो लोग दूर क्यों जाए। मामला कभी मेरे संज्ञान में नहीं आया। जितनी जल्दी हो सकेगा इस समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
-केवल खुराना, एसएसपी
स्थानीय कार्यकर्ताओं के माध्यम से मामला मेरे संज्ञान में आया था। मैंने खुद डीजीपी से इस संबंध में बात की थी। अगर अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है तो यह पुलिस प्रशासन की नाकामी है। विसंगति दूर क्यों नहीं हुई, इसे दिखवाया जाएगा।
-रमेश पोखरियाल निशंक, स्थानीय विधायक
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यह है समस्या
रानीपोखरी थाने के सृजन से पूर्व इस क्षेत्र के लगभग सभी गांव ऋषिकेश थाने में आते थे। तब रानीपोखरी और श्यामपुर में पुलिस चौकियां थीं। रानीपोखरी चौकी में 27 गांव शामिल थे, जबकि 23 गांव श्यामपुर से जोड़े गए। वर्ष 2003 में रानीपोखरी थाना बना तो श्यामपुर से जुड़े 23 गांवों को भी यहां लाने की उम्मीद जगी, लेकिन नौ साल बाद भी पुलिस, प्रशासन और शासन का ध्यान क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और जनता की परेशानियों पर नहीं गया है।
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ये गांव श्यामपुर चौकी में
धारकोट, शिम्याद, सीरियो, बैरागढ़, रखवाल, तलाई अपर, रामनगर, डांडा विशनगढ़, चोकियो, घंडोल, बडेरना कलां, बडेरना खुर्द, बडेरना मझला, कटकूर खुर्द, अखंडवाली भिलंग, कुठार, लडवाकोट, लल्द्वाड़ी, गढ़ तंगोली, कंडोगल, कुठाल और धम्मूवाला। इनमें से अधिकतर गांव पर्वतीय क्षेत्र में आते हैं और ज्यादातर की श्यामपुर चौकी से दूरी 25 से 60 किलोमीटर तक पड़ती है।
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पुलिस भी परेशान
संबंधित गांवों की दूरी का खामियाजा ग्रामीणों के साथ श्यामपुर चौकी पुलिस को भी भुगतना पड़ता है। ग्रामीणों की मानें तो मामूली घटनाआें पर पुलिसकर्मी भी 60 किलोमीटर की लंबी दौड़ लगाना मुनासिब नहीं समझते। ऐसा इसलिए भी कि छोटी मारपीट आदि पर पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी भाग निकलते हैं या मामला स्थानीय लोग सुलटा लेते हैं। क्षेत्र में पुलिस अकसर तभी नजर आती है, जब यहां कोई बड़ा हादसा या घटना हो जाए।
नए परिसीमन की जरूरत
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मानें तो रानीपोखरी थाने के माध्यम से कई बार प्रस्ताव शासन को भेजा, लेकिन फाइल कहां है कुछ पता नहीं चल रहा। ग्रामीण कहते हैं कि विसंगति ठीक की जानी चाहिए। आसपास के सभी गांवों को श्यामपुर-ऋषिकेश से हटाकर रानीपोखरी या डोईवाला थाने से जोड़ा जाना चाहिए। इनमें से तीन-चार गांव रायपुर थाने से जुड़ सकते हैं। सुविधा को देखते हुए ग्रामीण जौलीग्रांट और लालतप्पड़ पुलिस चौकी को भी रानीपोखरी थाने से जोड़ने की बात कहते हैं।
जनहित से जुड़ा मुद्दा इतने लंबे समय से अटका है, हैरत की बात है। यह मेरे संज्ञान में नहीं था। पूर्व में दिए गए प्रस्ताव या इस संबंध में आने वाले किसी भी नए प्रस्ताव को प्राथमिकता के आधार देखा जाएगा।
-बीवीआरसी पुरुषोत्तम, जिलाधिकारी
स्थिति वाकई चिंताजनक है। जब थाना-चौकी पास हैं तो लोग दूर क्यों जाए। मामला कभी मेरे संज्ञान में नहीं आया। जितनी जल्दी हो सकेगा इस समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
-केवल खुराना, एसएसपी
स्थानीय कार्यकर्ताओं के माध्यम से मामला मेरे संज्ञान में आया था। मैंने खुद डीजीपी से इस संबंध में बात की थी। अगर अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है तो यह पुलिस प्रशासन की नाकामी है। विसंगति दूर क्यों नहीं हुई, इसे दिखवाया जाएगा।
-रमेश पोखरियाल निशंक, स्थानीय विधायक