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ऐसे मिलेगी आफत से 14 घंटे पहले चेतावनी
आफताब अजमत
Updated Fri, 12 Jul 2013 09:45 AM IST
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उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) प्रदेश में पहले आई इस तरह की आपदाओं का रिकार्ड तैयार कर रहा है। भूकंप को छोड़ बारिश और मौसम की वजह से आई आपदाओं पर मुख्य फोकस है।
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पुरानी आपदाओं से मिलने वाले सबक के आधार पर भविष्य के लिए बचाव का ऐसा मॉडल तैयार करने की बात कही जा रही है, जो आफत आने से 14 घंटे पहले ही सटीक चेतावनी दे सकेगा।
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कई बार बारिश्ा बनी तबाही का सबब
यूसैक के निदेशक डा. एमएम किमोठी ने बताया कि पहाड़ पर बारिश अब तक कई बार बड़ी तबाही का सबब बन चुकी है। ऐसे में केंद्र पुरानी बड़ी घटनाओं का रिकार्ड जुटा रहा है। इसके तहत तबाही के वक्त की परिस्थितियों, उस दौरान मौसम और बारिश के परिवर्तन आदि की बारीकि से जानकारी ली जा रही है।
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इन सब डाटा के आधार पर एक ऐसा मॉडल तैयार किया जाएगा, जिससे एक निश्चित मात्रा तक बारिश होने के बाद आपदा का अंदाजा लगाया जा सकेगा। वैज्ञानिक मौसम और बारिश के विभिन्न पहलुओं के विश्लेषण के आधार पर 12 से 14 घंटे पहले ही बता सकेंगे कि किस जगह पर कितना नुकसान हो सकता है। डा. किमोठी ने बताया कि इसके लिए यूसैक के वैज्ञानिकों की एक टीम जुट गई है।
हर क्षेत्र का अलग डाटा
डा. किमोठी ने बताया कि प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों में आपदा का अलग इतिहास रहा है। कहीं भारी बारिश मुसीबत का सबब बनती है तो कहीं भूस्खलन। ऐसे में मौसम, भूगोल आदि की अलग परिस्थितियों के चलते आपदा प्रभावित क्षेत्रों का अलग-अलग रिकार्ड तैयार किया जा रहा है।
ऐसे काम करेगा मॉडल
यूसैक का नया मॉडल मौसम विभाग और मौसम के कई अन्य स्रोतों पर काम करेगा। डा. किमोठी के मुताबिक मौसम विभाग का पूरा डाटा हर निश्चित समय के बाद यूसैक के पास उपलब्ध होगा। मौसम के दूसरे कारकों में होने वाले परिवर्तन की पूरी जानकारी भी नियमित अपडेट की जाएगी। इसके बाद केंद्र अपने मॉडल के आधार पर तबाही का खाका पहले ही तैयार कर सकेगा।
पुरानी आपदाएं
-वर्ष 1998 में रुद्रप्रयाग जिले की मदमहेश्वर घाटी में बादल फटा। कई गांव इसकी जद में आए, 105 लोगों की मौत हुई थी।
-वर्ष 2001 में केदारघाटी के फाटा में बादल फटा। कई घर तबाह हुए। आपदा में तब 25 लोग मारे गए थे। दर्जनों गांवों पर असर।
-वर्ष 2002 मे टिहरी जिले के बूढ़ाकेदार में बादल फटा। कई गांव तबाह हुए। इस आपदा में 33 लोग मारे गए थे। इनमें से अधिकतर मलबे में बह गए थे।
-वर्ष 2005 में अगस्त्यमुनि के विजयनगर में बादल फटने से कई घर, रास्ते क्षतिग्रस्त हो गए थे। यहां पांच लोगों की मौत हुई।
-वर्ष 2010 में बागेश्वर के सुमगढ़ में बादल फटने के बाद मलबा सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में जा घुसा था। हादसे में 18 मासूम मारे गए।
-वर्ष 2012 ऊखीमठ में बादल फटा। क्षेत्र के बीस गांव पूरी तरह तबाह हो गए। सैकड़ों मकान, गोशालाएं, रास्ते क्षतिग्रस्त हुए, 53 लोगों की मौत हुई।
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