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गैंगस्टर के एक को पांच वर्ष का कारावास

Fri, 05 Jan 2018 12:55 AM IST
lalitpur
lalitpur Updated Fri, 05 Jan 2018 12:55 AM IST
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sentence to five year fine
अपराध्‍ा - फोटो : demo pic
ललितपुर।
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पंद्रह वर्ष पूर्व गैंगेस्टर के अपराध में पकड़े गए एक अभियुक्त को अपर सत्र न्यायाधीश (गैंगेस्टर कोर्ट) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने पांच वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। उक्त मामले में तीन अन्य आरोपियों की मुकदमा के दौरान मृत्यु हो चुकी है।


सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि 15 वर्ष पूर्व 26 मार्च 2003 को थाना कोतवाली के एसएचओ जगदीश सिंह ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि वह शहर में देखरेख व शांति व्यवस्था को मय हमराहियों के साथ गश्त कर रहे थे, कि उसी दौरान उन्हें जानकारी हुई कि थाना कोतवाली अंतर्गत मुुहल्ला वंशीपुरा निवासी गैंग लीडर जयदेव एक शातिर किस्म का अपराधी है। उसने अपने ही मुहल्ला के साथी राजा साकी और मुहल्ला पठापुरा निवासी किशन व भरत संगठित गिरोह बनाकर अपराध करने में संलिप्त रहते हैं। यह अपराधी अपने भय और आतंक के बल पर शहर क्षेत्र में नकबजनी और चोरियां करते हैं। इनके खिलाफ कोई भी व्यक्ति पुलिस को सूचना देने व न्यायालय में गवाही देने का साहस नहीं कर पाता है। 10 जुलाई 2001 को सिविल लाइन निवासी भगवानदास द्वारा धारा 452 व 380 का अभियोग पंजीकृत कराया था। जिसमें विवेचना के दौरान उक्त चारों अभियुक्तों के नाम प्रकाश में आए थे। इस मामले में अभियुक्त जयदेव व राजा को तीन माह एवं पांच-पांच सौ रुपये का अर्थदंड भी लगाया था। इसके बाद छह अगस्त 2001 को शहर के ही मुहल्ला लक्ष्मीपुरा निवासी आनंद कुमार जैन द्वारा उपरोक्त अपराधियों के खिलाफ धारा 457 व 380 के तहत मामला पंजीकृत कराया था। इसमें दुकान की खिड़की तोड़कर मसूर की चोरी की गई थी।
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यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। एसएचओ ने तहरीर में बताया था कि उपरोक्त तथ्यों व जनता द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर यह एक सुसंगठित गिरोह है व समाज विरोधी क्रियाकलाप में अभ्यस्त है। एसएचओ की तहरीर पर डीएम की संस्तुति पर यह मामला गैंगेस्टर के अपराध के तहत पंजीकृत होकर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल हुई थी। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बृहस्पतिवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर न्यायाधीश ने अभियुक्त जयदेव को पांच वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। उक्त मामले में तीन अन्य आरोपियों की मुकदमा के दौरान पूर्व में मृत्यु हो चुकी है।
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