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पीएचसी में रुपये न देने पर स्टाफ नर्सों ने की अभद्रता
हमीरपुर
Updated Sun, 03 Dec 2017 11:02 PM IST
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भरुआसुमेरपुर। कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव कराने आई एक महिला के तीमारदारों ने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्साें अभद्रता कर जबरिया सात सौ रुपये छीनने का आरोप लगाया है। प्रसूता की जेठानी की शिकायत पर महिला हेल्पलाइन व बाल संरक्षण अधिकारी की टीम मौके पर पहुंची। जेठानी के बयान लिए। इस बीच नर्सों ने उनसे भी अभद्रता की। टीम ने पूरे प्रकरण से लखनऊ कंट्रोल रूम को सूचित किया और रिपोर्ट तैयार कर सीएमओ को भेजी है। सीएमओ ने कार्रवाई करने की बात कहीं है।
शनिवार शाम स्टेशन रोड निवासी आरती सिंह अपनी देवरानी संध्या सिंह को प्रसव पीड़ा होने पर बांकी रोड स्थित सरकारी अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया। आरती ने बताया कि अस्पताल में स्टाफ नर्स शालिनी व चांदनी मौजूद थीं। रात करीब दो बजे संध्या ने एक बेटे को जन्म दिया। बच्चा होने पर दोनों स्टाफ नर्सों ने उससे 2100 रुपये की मांग की।
जब उसने रुपये देने में असमर्थता जताई तो नर्साें ने अभद्रता करते हुए जच्चा बच्चा को रामभरोसे छोड़ दिया। आरती ने महिला बाल विकास विकास की हेल्पलाइन 181 आशा जीवन ज्योति को सूचना देकर मदद मांगी। साथ बाल संरक्षण अधिकारी को भी सूचना दी। घटना की सूचना मिलने के बाद रविवार को हेल्पलाइन 181 की टीम सदस्य शोभन वर्मा, नेहा सोनकर, ममता कुशवाहा व बाल संरक्षण अधिकारी गोपाल मिश्रा मौके पर पहुंचे।
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टीम ने प्रसूता की जेठानी आरती सिंह से बयान लेना जब शुरू किया तो नर्साें ने फिर से अभद्रता शुरू कर दी। जिस पर हेल्पलाइन टीम की प्रभारी शोभना वर्मा ने लखनऊ कंट्रोल रूम को घटना की जानकारी देकर रुपये लिए जाने की बात को सही बताया। जांच टीम ने बताया कि प्रसूता के तीमारदारों से सात सौ रुपये लिए जाने की बात सही है।
रिपोर्ट तैयार सीएमओ के साथ शासन को भेजकर कार्रवाई कराने को कहा गया है। उधर प्रभारी चिकित्साधिकारी/डिप्टी सीएमओ डा.रामऔतार ने बताया कि उन्हें भी सूचना मिली है। वह सरकारी कार्य से लखनऊ आए हैं। मुख्यालय पहुंचने पर मंगलवार को जांचकर कार्रवाई करेंगे। उधर आरती सिंह ने आरोप लगाया कि रात दो बजे प्रसव के बाद स्टाफ नर्सों ने जच्चा बच्चा का कोई इलाज नहीं किया। इस मामले में स्टाफ नर्सों का कहना है कि नवजात की दादी ने खुशी में उन्हें सात सौ रुपये बतौर पुरस्कार दिए हैं। कहा कि जबरिया रुपये मांगने व इलाज तथा देखरेख न की शिकायत निराधार है।
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शनिवार शाम स्टेशन रोड निवासी आरती सिंह अपनी देवरानी संध्या सिंह को प्रसव पीड़ा होने पर बांकी रोड स्थित सरकारी अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया। आरती ने बताया कि अस्पताल में स्टाफ नर्स शालिनी व चांदनी मौजूद थीं। रात करीब दो बजे संध्या ने एक बेटे को जन्म दिया। बच्चा होने पर दोनों स्टाफ नर्सों ने उससे 2100 रुपये की मांग की।
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जब उसने रुपये देने में असमर्थता जताई तो नर्साें ने अभद्रता करते हुए जच्चा बच्चा को रामभरोसे छोड़ दिया। आरती ने महिला बाल विकास विकास की हेल्पलाइन 181 आशा जीवन ज्योति को सूचना देकर मदद मांगी। साथ बाल संरक्षण अधिकारी को भी सूचना दी। घटना की सूचना मिलने के बाद रविवार को हेल्पलाइन 181 की टीम सदस्य शोभन वर्मा, नेहा सोनकर, ममता कुशवाहा व बाल संरक्षण अधिकारी गोपाल मिश्रा मौके पर पहुंचे।
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टीम ने प्रसूता की जेठानी आरती सिंह से बयान लेना जब शुरू किया तो नर्साें ने फिर से अभद्रता शुरू कर दी। जिस पर हेल्पलाइन टीम की प्रभारी शोभना वर्मा ने लखनऊ कंट्रोल रूम को घटना की जानकारी देकर रुपये लिए जाने की बात को सही बताया। जांच टीम ने बताया कि प्रसूता के तीमारदारों से सात सौ रुपये लिए जाने की बात सही है।
रिपोर्ट तैयार सीएमओ के साथ शासन को भेजकर कार्रवाई कराने को कहा गया है। उधर प्रभारी चिकित्साधिकारी/डिप्टी सीएमओ डा.रामऔतार ने बताया कि उन्हें भी सूचना मिली है। वह सरकारी कार्य से लखनऊ आए हैं। मुख्यालय पहुंचने पर मंगलवार को जांचकर कार्रवाई करेंगे। उधर आरती सिंह ने आरोप लगाया कि रात दो बजे प्रसव के बाद स्टाफ नर्सों ने जच्चा बच्चा का कोई इलाज नहीं किया। इस मामले में स्टाफ नर्सों का कहना है कि नवजात की दादी ने खुशी में उन्हें सात सौ रुपये बतौर पुरस्कार दिए हैं। कहा कि जबरिया रुपये मांगने व इलाज तथा देखरेख न की शिकायत निराधार है।