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हत्या के दोषी को उम्रकैद
अमर उजाला, इटावा
Updated Fri, 26 Oct 2018 11:56 PM IST
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court
- फोटो : PTI
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अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम मोहम्मद कमरुज्जमा खान ने शुक्रवार को चार साल पुराने हत्या के मामले में दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही पांच हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला मडै़या ख्याली राम निवासी राम शंकर का पुत्र रवि कुमार घर पर ही सिलाई का काम करता था। उसने अपने ही मोहल्ले के दीपक कुमार को रुपये उधार दिए थे। दीपक रुपये वापस नहीं कर रहा था। 11 जुलाई 2014 की रात को रवि कुमार उधार के रुपये मांगने के लिए दीपक के घर गया था। रवि ने जब उससे रुपये वापस मांगे तो इसी बात को लेकर दोनों में विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि दीपक ने रवि पर ईंट व चाकू से हमला कर दिया। हमले में रवि की मौके पर ही मौत हो गई। जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग मौके पर पहुंचे थे। इस संबंध में रवि के पिता राम शंकर ने दीपक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने मामले की सुनवाई के लिए पत्रावली कोर्ट में पेश कर दी। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम मोहम्मद कमरुज्जमा खान ने की। पक्ष विपक्ष की दलीलों को सुना।
सहायक शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार ने जो साक्ष्य प्रस्तुत किए उन्हें बचाव पक्ष काट नहीं सका। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने दीपक कुमार को दोषी करार दिया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा पांच हजार के अर्थदंड से भी दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर उसे दो माह का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला मडै़या ख्याली राम निवासी राम शंकर का पुत्र रवि कुमार घर पर ही सिलाई का काम करता था। उसने अपने ही मोहल्ले के दीपक कुमार को रुपये उधार दिए थे। दीपक रुपये वापस नहीं कर रहा था। 11 जुलाई 2014 की रात को रवि कुमार उधार के रुपये मांगने के लिए दीपक के घर गया था। रवि ने जब उससे रुपये वापस मांगे तो इसी बात को लेकर दोनों में विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि दीपक ने रवि पर ईंट व चाकू से हमला कर दिया। हमले में रवि की मौके पर ही मौत हो गई। जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग मौके पर पहुंचे थे। इस संबंध में रवि के पिता राम शंकर ने दीपक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने मामले की सुनवाई के लिए पत्रावली कोर्ट में पेश कर दी। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम मोहम्मद कमरुज्जमा खान ने की। पक्ष विपक्ष की दलीलों को सुना।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार ने जो साक्ष्य प्रस्तुत किए उन्हें बचाव पक्ष काट नहीं सका। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने दीपक कुमार को दोषी करार दिया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा पांच हजार के अर्थदंड से भी दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर उसे दो माह का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ेगा।
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