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Yuvraj Singh: 'अभिषेक के साथ काम कर कोचिंग का नजरिया बदला', युवराज बोले- मैं योगराज जैसा नहीं, मेरा तरीका अलग

Wed, 05 Nov 2025 06:35 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Wed, 05 Nov 2025 06:35 PM IST
सार

युवराज ने बताया कि अभिषेक शर्मा और शुभमन गिल के साथ उनका जुड़ाव तब से है जब वे संन्यास के करीब थे। उन्होंने कहा, 'शुरुआत में मैं बस अपने अनुभव साझा कर रहा था, लेकिन धीरे-धीरे समझ आया कि कोचिंग एक यात्रा है। इस सफर ने मुझे सिखाया कि कैसे एक टैलेंट को आगे बढ़ाया जाता है।'

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Yuvraj Singh: Working with Abhishek Sharma Taught Me What It Means to Be a Coach
योगराज, युवराज और अभिषेक शर्मा - फोटो : ANI

विस्तार

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्टार ऑलराउंडर युवराज सिंह ने कहा कि अभिषेक शर्मा के साथ काम करने ने उन्हें एक कोच और मेंटर बनने का असली अर्थ समझाया। युवराज ने स्वीकार किया कि जब वे खुद 19 साल के थे, तब कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था जो उनके मन की बातें या उस उम्र की असुरक्षाओं को समझ सके।
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उन्होंने पीटीआई से बातचीत में कहा, 'जब मैं 19 साल का था, तब मेरे सामने चुनौतियां थीं लेकिन कोई उन्हें समझ नहीं पाया। आज जब मैं अभिषेक जैसे युवा खिलाड़ियों को देखता हूं, तो ठीक समझ आता है कि वे क्या झेल रहे हैं। कोचिंग का मतलब सिर्फ यह बताना नहीं कि क्या करना है, बल्कि उनके दिमाग में उतरकर यह समझना है कि वे क्या सोच रहे हैं।'
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युवराज ने बताया कि अभिषेक शर्मा और शुभमन गिल के साथ उनका जुड़ाव तब से है जब वे संन्यास के करीब थे। उन्होंने कहा, 'शुरुआत में मैं बस अपने अनुभव साझा कर रहा था, लेकिन धीरे-धीरे समझ आया कि कोचिंग एक यात्रा है। इस सफर ने मुझे सिखाया कि कैसे एक टैलेंट को आगे बढ़ाया जाता है।'
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‘डर के बिना खेलने की आजादी ही असली ताकत’
अभिषेक शर्मा ने जिस तरह भारतीय टी20 टीम में आकर बल्लेबाजी की नई परिभाषा लिखी है, उसके पीछे युवराज के मुताबिक कप्तान सूर्यकुमार यादव और कोच गौतम गंभीर का बड़ा हाथ है। युवराज ने कहा, 'जब कोच और कप्तान खिलाड़ी को बिना डर खेलेने की आजादी देते हैं, तो वही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनती है। डरमुक्त क्रिकेट से ही बड़े नतीजे निकलते हैं।'

उन्होंने अपने 2011 वर्ल्ड कप के अनुभव से तुलना करते हुए कहा, 'जब गैरी कर्स्टन कोच थे, तो वे हमेशा कहते थे कि अगर तुम अपने तरीके से खेलो, तो टीम को जीत की स्थिति में पहुंचा दोगे। आज वही आत्मविश्वास अभिषेक में भी दिखता है।'
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युवराज ने यह भी बताया कि अभिषेक की सफलता एक-दो महीने की मेहनत नहीं, बल्कि चार से पांच साल के लगातार काम का परिणाम है। “अभिषेक की वर्क एथिक और मेहनत कमाल की है। लोग सिर्फ पिछले छह-नौ महीनों की बात करते हैं, लेकिन यह उसकी चार साल की तैयारी का नतीजा है,” उन्होंने कहा।

 ‘मैं योगराज सिंह जैसा नहीं, मेरा तरीका अलग है’
अपने पिता योगराज सिंह से तुलना पर युवराज ने साफ कहा कि वे बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'मैं अपने पिता जैसा सख्त नहीं हूं। मेरी कोचिंग का तरीका पूरी तरह अलग है। मैं मानता हूं कि जब आप किसी को सिखा रहे होते हैं, तो आपको उनके नजरिए से चीजें समझनी चाहिए। यह रिश्ता पुश एंड पुल जैसा होना चाहिए, थोड़ा देना, थोड़ा लेना।'
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