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IND vs AUS: यशस्वी ने अपने अतीत के संघर्षों को याद किया, बोले- इससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ता है
Tue, 26 Nov 2024 04:24 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पर्थ
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पर्थ
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Tue, 26 Nov 2024 04:24 PM IST
सार
यशस्वी के लिए भारतीय टीम में जगह बनाना इतना आसान नहीं था, लेकिन उनकी लगन और मेहनत से वह इस मुकाम पर पहुंचने में सफल रहे। यशस्वी ने 11 साल की उम्र में मुंबई में कदम रखा था।
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यशस्वी जायसवाल
- फोटो : BCCI
विस्तार
भारतीय टीम के स्टार युवा सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल आज भले ही सफल खिलाड़ी हैं, लेकिन वह अपने अतीत के संघर्ष को नहीं भूले हैं। यशस्वी का कहना है कि उनकी कहानी ऐसी चीज है जिससे उन्हें आत्मविश्वास मिलता है। यशस्वी फिलहाल ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर हैं और पहले टेस्ट मैच की दूसरी पारी में उन्होंने शानदार शतक जड़ा था। यशस्वी का ऑस्ट्रेलिया में यह पहला मुकाबला था। भारत ने पहला टेस्ट 295 रन से जीता जिसमें यशस्वी ने दूसरी पारी में 161 रन बनाए थे।
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संघर्ष भरा रहा है यशस्वी का जीवन
यशस्वी के लिए भारतीय टीम में जगह बनाना इतना आसान नहीं था, लेकिन उनकी लगन और मेहनत से वह इस मुकाम पर पहुंचने में सफल रहे। यशस्वी ने 11 साल की उम्र में मुंबई में कदम रखा था। वह मैदानकर्मियों के साथ टेंट में रहे और किसी तरह अपना गुजारा चलाया। यशस्वी का सफर उनकी लगन, प्रतिबद्धता और जिजीविषा की कहानी कहता है। इन संघर्षों से मिले अनुभव का इस्तेमाल वह मैदान के भीतर और बाहर की हर लड़ाई जीतने के लिए कर रहे हैं।
यशस्वी के लिए भारतीय टीम में जगह बनाना इतना आसान नहीं था, लेकिन उनकी लगन और मेहनत से वह इस मुकाम पर पहुंचने में सफल रहे। यशस्वी ने 11 साल की उम्र में मुंबई में कदम रखा था। वह मैदानकर्मियों के साथ टेंट में रहे और किसी तरह अपना गुजारा चलाया। यशस्वी का सफर उनकी लगन, प्रतिबद्धता और जिजीविषा की कहानी कहता है। इन संघर्षों से मिले अनुभव का इस्तेमाल वह मैदान के भीतर और बाहर की हर लड़ाई जीतने के लिए कर रहे हैं।
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अपने संघर्ष को लेकर यशस्वी ने कहा, यह ऐसी चीज है जो मुझे आत्मविश्वास देती है कि मैं किसी भी स्थिति से बाहर निकल सकता हूं। मैं हमेशा संघर्ष का सामना करने को तैयार रहता हूं। मुझे चुनौतियों का सामना करने में मजा आता है और मैं हर लड़ाई जीतना चाहता हूं। इससे मैं यही सीखता हूं और मुझे लगता है कि मैं खुशकिस्मत हूं कि ऐसी जिंदगी मिली जिससे मुझे खुद के बारे में सीखने का मौका और आत्मविश्वास मिला। जीवन में अलग-अलग तरह की चुनौतियों का सामना करने का हौसला मिला। यह अद्भुत है और मैं जो कुछ भी कर रहा हूं , उसके लिए ईश्वर को धन्यवाद देना चाहता हूं। मैं वही कर रहा हूं जिससे मुझे प्यार है। मैं हर गेंद का मजा लेना चाहता हूं।
पर्थ में पहली पारी में खाता भी नहीं खोल पाने के बाद दूसरी पारी में शतक पूरा होने के बाद अलग अंदाज में जश्न के बारे में पूछने पर यशस्वी ने कहा, मैने अलग अंदाज में शतक पूरा किया। मैं दिमाग में कुछ और सोच रहा था और अचानक कुछ और हो गया, जिसके बाद मैं सोच रहा था कि अब क्या करूं। मैंने फिर सोचा, चलो ठीक है। मैं इस पल का मजा लेता हूं। मैं भाग्यशाली हूं और यह अनुभव मेरे साथ हमेशा रहेगा। मैंने अपने परिवार को कॉल किया और उनके साथ भी जश्न का हिस्सा बना। मेरा भाई मुझसे हमेशा क्रिकेट के बारे में बात करता है।