बैट था मुंबई में, गेंद पुणे में और बल्लेबाज को दे दिया कैच आउट!
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वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के हाथों मिली हार के बाद से ही बांग्लादेश अपने इस पड़ोसी टीम से बेहद नाराज है। बांग्लादेश का मानना है कि वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में भारत के साथ मुकाबले में कुछ फैसले उसके खिलाफ लिए गए जिस कारण उसे हार का सामना करना पड़ा।
बांग्लादेश पहली बार वर्ल्ड कप का क्वार्टर फाइनल मुकाबला खेल रहा था और सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए अपना पूरा दमखम लगा दिया लेकिन अंपायरों के फैसलों ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इस मैच के बाद दोनों टीमों के रिश्तों में तल्खी आ गई जो इस सीरीज में भी खूब दिखी।
तीन मैचों की वनडे सीरीज के पहले दो मैच जीतकर बांग्लादेश ने पहले ही उस हार का बदला ले लिया, लेकिन इस दौरान उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों को छेड़ने और परेशान करने का मौका भी नहीं छोड़ा। उन्होंने विराट कोहली, रोहित शर्मा और कप्तान धोनी को अपना निशाना बनाया।
पहले दो मैचों में शानदार खेल दिखाने वाले बांग्लादेशी खिलाड़ियों ने तीसरे मैच में भी एक गलत फैसले के लिए अपील कर दी और अंपायर इतने महान कि उन्होंने बल्लेबाज को आउट भी कर दिया।
इस बार गलत अंपायरिंग से खुश हो गए बांग्लादेशी
हम यहां बात कर रहे हैं भारतीय पारी के दौरान एक बेहद घटिया फैसले की। यह पूरा वाकया हुआ भारतीय पारी के 44वें ओवर में। इस समय भारत पहले दो मैचों में बेहद निराशाजनक बल्लेबाजी के बाद आज बड़े स्कोर की ओर बढ़ रहा था। 43 ओवर तक भारत ने 3 विकेट पर 246 रन बना लिए थे और क्रीज पर कप्तान धोनी 63 और अंबाती रायडू 44 रन पर खेल रहे थे। दोनों के बीच चौथे विकेट के लिए 88 रनों की साझेदारी हो चुकी थी।
भारतीय पारी का 44वां ओवर मशरफे मुर्तजा डाल रहे थे लेकिन इस ओवर की तीसरी गेंद जो स्लोअर बॉल थी और लेग की दिशा में जा रही थी जिसे बल्लेबाज रायडू ने शॉर्ट फाइन की दिशा में खेलने की कोशिश की और वह इसे बल्ले से खेलने से चूक गए।
लेकिन यह गेंद बल्लेबाज के बैट से लगने के बजाए उनके थाई पैड पर जा टकराई और यहां से गेंद फिर पीछे की ओर गई जिसे विकेटकीपर लिटन दास ने आसानी से लपक लिया।
गेंदबाज और विकेटकीपर ने इस पर कैच की अपील की और अंपायर ने तुरंत अपनी अंगुली ही उठा दी। गलत फैसले दिए जाने से आहत रायडू ने इस पर आपत्ति भी जताई और इशारा भी किया कि गेंद बल्ले से नहीं लगी है।
अंपायर के गलत फैसले से वह बेहद नाराज दिखे और पवेलियन लौटने से पहले फैसले का विरोध करते हुए वह विकेट के करीब से भी गुजरे। वहीं उनके साथ अर्धशतकीय साझेदारी करने वाले धोनी भी कुछ नहीं कर सके। हालांकि उन्होंने अंपायर की ओर हताशा भरी निगाह से देखा लेकिन अंपायर की अंगुली उठ चुकी थी और रायडू को वापस जाना ही था।
लेकिन इस फैसले को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि बल्ला था मुंबई में और गेंद थी पुणे में, अंपायर ने आउट दिया बल्लेबाज को।
पहले मैच में कैच होने से पहले से ही कैच आउट दे दिया था
साथ ही इस मैच में जिस तरह से अंपायर ने बड़ी चूक करते हुए अंबाती रायडू को कैच आउट करार दिया उसे अंपायरिंग जगत का एक बड़ा विवादित फैसला करार दिया जा सकता है।
इस गलत फैसले से बांग्लादेशी क्रिकेट प्रशंसक भी बेहद खुश होंगे क्योंकि उन्हें वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में जिस खराब अंपायरिंग से शिकायत आईसीसी से थी आज वही खराब अंपायरिंग उनके पक्ष में चली गई।
ऐसा नहीं है कि इस सीरीज में खराब अंपायरिंग का यह पहला वाकया है। इससे पहले कुछ मौकों पर गलत फैसले लिए गए। इनमें एक बेहद अजीबोगरीब फैसला पहले वनडे में लिया गया।
भारतीय पारी के दौरान ओपनर शिखर धवन को नौंवें ओवर में अंपायर ने विकेट के पीछे कैच आउट करार दे दिया जबकि विकेटकीपर मुशफिकुर रहीम ने कैच भी नहीं पकड़ा था। धवन अंपायर का निर्णय देखकर पवेलियन लौटने ही वाले थे लेकिन पता चला कि कैच हुआ ही नहीं। इस बीच धवन को मैदान पर चहलकदमी करते देख बांग्लादेशी फील्डरों ने उन्हें रनआउट करने की भी कोशिश की। लेकिन वे इसमें नाकाम रहे। यह फैसला भी खराब अंपायरिंग का एक ज्वलंत उदाहरण है।