Jemimah Rodrigues: कौन हैं जेमिमा रॉड्रिग्स? पढ़ें 'बेबी' से भारतीय मध्यक्रम की रीढ़ बनने तक का भावनात्मक सफर
आज जेमिमा रॉड्रिग्स भारतीय महिला क्रिकेट की आत्मा हैं। उन्हें न किसी गेंदबाज का डर है, न कोई घबराहट। कभी सबकी 'बेबी' कही जाने वाली जेमिमा अब उस मिडल ऑर्डर की रीढ़ हैं, जिसके भरोसे भारत ने विश्व क्रिकेट की अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज की है।
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Pure moments of joy! 💙
Tears, smiles, and family hugs. Jemimah’s match-winning knock says it all! 😭💪
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पांच सितंबर 2000 को मुंबई में जन्मीं जेमिमा ने फरवरी 2018 में महज 17 साल की उम्र में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। शुरुआती दिनों में उनसे बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन सफर आसान नहीं रहा। उन्हें टीम से बाहर भी किया गया, आलोचना भी झेलनी पड़ी। मगर जेमिमा ने कभी हार नहीं मानी। वह खुद कहती हैं कि वह टीम में सबसे छोटी थीं, सब उन्हें प्यार से 'बेबी' कहते थे।' लेकिन अब जेमिमा बेबी नहीं रहीं। उनके चेहरे की मुस्कान जितनी मासूम थी, उतनी ही मजबूत थी उनकी सोच। यही वजह है कि जब उन्हें मौके मिले, उन्होंने हर बार खुद को साबित किया।
उन्हें बीच में ड्रॉप भी किया गया। फिर 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने अपने बल्ले से चमक बिखेरी थी। हालांकि, 2023 महिला टी20 विश्व कप के बाद टीम से उन्हें बाहर कर दिया गया था। 2024 में एकबार फिर जेमिमा ने वापसी की और अब वह इस टीम का अहम हिस्सा हैं। जेमिमा क्रिकेट में अपने विकास का श्रेय इंग्लैंड में अब बंद हो चुकी किआ सुपर लीग (केएसएल) को देती हैं। यह किसी विदेशी टी20 लीग में उनकी पहली उपस्थिति थी। उस टूर्नामेंट में उनके आंकड़े असाधारण थे। तब जेमिमा ने 57.28 की औसत और 149.62 के स्ट्राइक रेट से 401 रन बनाए थे। इसमें 58 गेंदों पर नाबाद 112 रन शामिल हैं।
#JemimahRodrigues said, “I was mentally not well, and fighting with anxiety after getting dropped. Then I read a verse from bible that ‘If you stay still, God will fight for you.’ I cried on almost every day during this World Cup.”#INDWvsAUSW #CWC25 #WomensWorldCup2025 pic.twitter.com/eep0Mxc9t0
— Sumit Dubey (@ImSumitDubey) October 30, 2025
Jemimah Rodrigues in tears after receiving player of the match award 👏🏻 pic.twitter.com/MTjQ06KiDA
— Richard Kettleborough (@RichKettle07) October 30, 2025
Jemimah Rodrigues said, “I was mentally not well, and fighting with anxiety after getting dropped. Then I read a verse from bible that ‘If you stay still, God will fight for you.’ I cried on almost every day during this World Cup.”#INDWvsAUSW pic.twitter.com/JZTSddrTvL
— Ahmad Haseeb (@iamAhmadhaseeb) October 30, 2025
2025 महिला वनडे विश्व कप के सेमीफाइनल में भारत मुश्किल स्थिति में था। रन धीरे-धीरे आ रहे थे और हर चेहरा तनाव से भरा था। लेकिन जब जेमिमा क्रीज पर उतरीं, सबकुछ बदल गया। उन्होंने धैर्य और क्लास के साथ एक शानदार 127 रन की नाबाद पारी खेली, जिसने भारत को तीसरी बार महिला वनडे विश्व कप के फाइनल में पहुंचा दिया। 2005 और 2017 के बाद भारतीय टीम तीसरी बार फाइनल में पहुंची, जहां दो नवंबर को उसका सामना दक्षिण अफ्रीका से होगा और महिला क्रिकेट को एक नया विश्व चैंपियन मिलेगा।
मैच खत्म होने के बाद कैमरों ने जो दिखाया, वो सिर्फ एक खिलाड़ी का जश्न नहीं था, वो एक कहानी की पराकाष्ठा थी। जेमिमा के चेहरे पर आंसू थे, लेकिन वे आंसू हार या थकान के नहीं थे। वे उन वर्षों की मेहनत, संघर्ष और विश्वास के प्रतीक थे। वो पल सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि हर उस लड़की के लिए था जिसने कभी बड़े सपने देखे हों और रास्ते में ठोकरें खाई हों।
जेमिमा के करियर का एक बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने इंग्लैंड की किआ सुपर लीग में खेलना शुरू किया। यह किसी विदेशी टी20 लीग में उनका पहला अनुभव था। वह सिर्फ 18 साल की थीं और पहली बार अकेले विदेश में रह रही थीं। उन्हें खुद अपने कपड़े धोने, खाना बनाने और सफर का खर्च संभालना पड़ता था। जेमिमा बताती हैं, 'मैं सिर्फ 18 साल की थी जब मैंने अकेले विदेश यात्रा की। मुझे अपने कपड़े धोने से लेकर अपना खाना खुद पकाने, अपार्टमेंट में रहने और खेलों के लिए यात्रा करने तक के पैसे खुद से प्रबंधित करने पड़ते थे। तो उस अनुभव ने मुझे बहुत बदल दिया, क्योंकि मुझे कहीं पर भी अकेले रहने की आदत नहीं थी। भारतीय टीम में भी मैं टीम में 'बेबी' की तरह थी। मुझे शुरू शुरू में बहुत प्यार किया जाता था और देखभाल की जाती थी और मैं सभी को जानती थी। हालांकि, कई बार मैंने बहुत अकेला भी महसूस किया है, लेकिन इसने मुझे एक इंसान के रूप में बहुत बदल दिया और मुझे और अधिक स्वतंत्र बना दिया।'
महिला प्रीमियर लीग में दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलते हुए जेमिमा को ऑस्ट्रेलिया की महान कप्तान मेग लैनिंग के साथ खेलने का मौका मिला। जेमिमा बताती हैं, 'मेग से मैंने सीखा कि दबाव में शांत कैसे रहना चाहिए। जब कप्तान खुद संयम में रहती है, तो पूरी टीम में आत्मविश्वास आता है।' यही सादगी और संयम अब उनके खेल का हिस्सा बन चुका है। चाहे विकेट गिर रहे हों या रन न आ रहे हों, जेमिमा की आंखों में कभी घबराहट नहीं दिखती, सिर्फ भरोसा दिखता है।
जेमिमा का कहना है, 'जिस तरह से लैनिंग टीम का नेतृत्व करती है और दबाव में भी इतनी शांत रहती हैं, यह एक ऐसी चीज है जो मैं वास्तव में उनसे सीखा। उन्हें बस इतना पता होता है कि वह क्या कर रही हैं और यही उन्हें दबाव में भी शांत रहने में मदद करता है, जो मुझे लगता है कि एक कप्तान के सबसे बड़े गुणों में से एक है। मैच के अंत में हर कोई दबाव में होता है, लेकिन अगर आप अपने कप्तान को शांत देखते हैं, तो इसमें कुछ ऐसा होता है जिससे पूरी टीम को शांत और दिमाग को ठंडा रखने में मदद मिलती है।'
जेमिमा का मानना है कि अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने और वहां सामंजस्य बैठाने और अच्छा प्रदर्शन करने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्हें अलग अलग पिचों पर खेलने में मदद मिलती है। 2023 में जेमिमा को महिला टी20 विश्व कप के बाद भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया था और उन्होंने इसे मुश्किल और चुनौतीपूर्ण क्षण करार दिया था। उन्होंने कहा, 'मैं तब सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नहीं थी। लेकिन जब मुझे 2024 महिला टी20 विश्व कप के लिए चुना गया तो मैंने ऊपर देखकर भगवान से थैंक यू कहा। पिछले साल ठीक इसी समय मुझे टीम से बाहर कर दिया गया था, लेकिन इस बार मैं यहां हूं। इसने मेरा दृष्टिकोण बदल दिया। मैं जिस भी स्थिति में हूं, मैं इसके लिए ऊपर वाले की आभारी हूं और मेरी यात्रा आसान नहीं थी।'
हर खिलाड़ी के पीछे एक कहानी होती है, और जेमिमा की कहानी उनके परिवार से शुरू होती है। उनकी मां लविता और पिता इवान रोड्रिग्स हमेशा उनके साथ रहे। जेमिमा कहती हैं, 'जब मैं खराब फॉर्म में थी, लोग मुझसे उम्मीद छोड़ चुके थे। लेकिन मेरे माता-पिता ने नहीं। वे हमेशा कहते थे- तुम्हारे अंदर कुछ खास है।' 2023 में जेमिमा के माता पिता ने स्टेडियम में भारत-पाकिस्तान मैच का सीधा प्रसारण देखा था। उस मैच में जेमिमा ने 38 गेंद में आठ चौके की मदद से 53 रन की पारी खेली थी। वह बताती हैं, 'अर्धशतक लगाने के बाद उनकी तरफ बल्ला उठाना मेरे लिए खास पलों में से एक है, क्योंकि इस सफर में किसी और से ज्यादा उन्होंने मेरा समर्थन किया। वे मुझ पर विश्वास करते थे, चाहे जो भी हो, यहां तक कि जब कोई मुझ पर विश्वास नहीं करता था, तब भी वे हमेशा वहां थे।' मां लविता और पिता इवान के साथ-साथ कोच प्रशांत शेट्टी की मदद से जेमिमा हर मुश्किल परिस्थितियों से निकलने में कामयाब रहीं हैं।
जेमिमा के खेलने की शैली कुछ हद तक महान बल्लेबाज मिताली राज से मिलती जुलती है। गेंद पर आक्रामण करणा उनका नैसर्गिक खेल नहीं है। वह गेंदबाजों का लय बिगाड़ने के लिए क्रीज का उपयोग करती हैं और शॉट टाइमिंग पर काफी विश्वास रखती हैं। स्पिनरों के खिलाफ वह पुल और स्लॉग-स्वीप शॉट भी काफी खेलती हैं। जेमिमा का कहना है, 'मेरे पिता हमेशा मुझसे कहते हैं कि आपको रन बनाने के लिए शक्तिशाली होने की आवश्यकता नहीं है। आपको बस दिमाग रखने और अपने तरीके से रन बनाने की जरूरत है और यह मुझे मिली सबसे अच्छी सलाहों में से एक है और मैं उस पर टिके रहने की कोशिश करती हूं।' यही वजह है कि जेमिमा के आदर्श खिलाड़ी विराट कोहली हैं, जो उनकी तरह टाइमिंग पर काफी ध्यान देते हैं।
जेमिमा ने भारत के लिए अब तक तीन टेस्ट, 58 वनडे और 112 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। टेस्ट में उनके नाम 58.75 की औसत से 235 रन हैं। इसमें तीन अर्धशतक शामिल हैं। वहीं, 58 वनडे में उनके नाम 35.20 की औसत से 1725 रन हैं। इसमें तीन शतक और आठ अर्धशतक है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मौजूदा महिला विश्व कप के सेमीफाइनल में 127 रन की नाबाद पारी उनकी सर्वश्रेष्ठ पारी है। टी20 में जेमिमा ने 30.06 की औसत और 116.47 के स्ट्राइक रेट से 2375 रन बनाए हैं। इनमें 13 अर्धशतक शामिल हैं। 76 रन की पारी उनकी सर्वश्रेष्ठ पारी रही है। इसके अलावा जेमिमा ने वनडे में पांच विकेट और टी20 अंतरराष्ट्रीय में एक विकेट भी लिए हैं।