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विश्व कप की अनसुनी दास्तान: खिलाड़ी जो पूरे टूर्नामेंट टीम का हिस्सा रहे, पर फाइनल तक नहीं खेल पाए एक भी मैच

Mon, 03 Nov 2025 12:07 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: स्वप्निल शशांक Updated Mon, 03 Nov 2025 12:07 AM IST
सार

ऐसे खिलाड़ी क्रिकेट के 'अनकहे नायक' होते हैं, जिनके योगदान आंकड़ों में नहीं, बल्कि माहौल में दिखते हैं। उनकी भूमिका हर रणनीति, हर जीत और हर हौसले में महसूस होती है।

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The Unsung Heroes: Players Who Never Took the Field But Made World Cup History
अरुंधति रेड्डी और सुनील वालसन - फोटो : ANI/Twitter

विस्तार

भारत की महिला टीम इतिहास रच दिया है। टीम इंडिया ने महिला वनडे विश्व कप 2025 के फाइनल में द. अफ्रीका को 52 रन से हरा दिया। और 52 साल के महिला वनडे विश्व कप के इतिहास में पहली बार खिताब जीता। 2025 महिला वनडे विश्व कप का फाइनल सिर्फ मैदान में मौजूद 11 खिलाड़ियों का नहीं, बल्कि उन तमाम चेहरों का भी सफर है जो कभी मैच नहीं खेल पाए, लेकिन फिर भी भारत के अभियान का हिस्सा बने रहे। महिला हो या पुरुष, क्रिकेट इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जब कोई खिलाड़ी पूरे विश्व कप में टीम का हिस्सा तो रहा, पर उसे मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला। फिर भी उनका नाम हमेशा वर्ल्ड कप फाइनलिस्ट के तौर पर दर्ज रहा।
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अगर भारतीय क्रिकेट की बात करें तो यह सिलसिला 1983 पुरुष विश्व कप से शुरू हुआ था। तब भारत की पुरुष टीम पहली बार वनडे विश्व कप फाइनल में पहुंची और चैंपियन बनी। तब सुनील वालसन कपिल देव की विजेता टीम में शामिल थे, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। वालसन भारतीय क्रिकेट के पहले ऐसे विश्व कप विजेता बने, जिन्होंने बिना खेले कप उठाया।
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इसके बाद 2003 विश्व कप में भी यही कहानी दोहराई गई। भारत फाइनल तक पहुंचा, लेकिन संजय बांगड़ और युवा पार्थिव पटेल दोनों को एक भी मैच में शामिल नहीं किया गया। हालांकि ये दोनों ड्रेसिंग रूम में टीम के अहम सदस्य बने रहे। भारत को तब फाइनल में ऑस्ट्रेलियाई टीम से हार मिली थी।
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महिला क्रिकेट में यह भावनात्मक सिलसिला 2005 विश्व कप में देखने को मिला, जब भारतीय महिला टीम पहली बार वनडे विश्व कप के फाइनल में पहुंची थी। उस टीम में करु जैन, अरुंधति किरकिरे और रीमा मल्होत्रा जैसी खिलाड़ी शामिल थीं, जिन्हें पूरे टूर्नामेंट में खेलने का मौका नहीं मिला। मगर उनके नाम उस ऐतिहासिक फाइनल के साथ दर्ज हैं जिसने भारतीय महिला क्रिकेट को पहचान दी।

2017 में, जब मिताली राज की अगुवाई में भारत एक बार फिर फाइनल तक पहुंचा, तब नुजहत परवीन टीम का हिस्सा थीं, पर उन्हें भी मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला। भारतीय टीम को इन दोनों विश्व कप के फाइनल में हार मिली थी।

अब 2025 विश्व कप के इस फाइनल में अरुंधति रेड्डी वही नाम बन गई हैं जो इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। भले ही उन्होंने एक भी मैच नहीं खेला हो, लेकिन उनके ड्रेसिंग रूम का उत्साह, अभ्यास सत्रों की ऊर्जा और टीम के भीतर की ताकत भारत की सफलता का हिस्सा हैं।

दरअसल, ऐसे खिलाड़ी क्रिकेट के 'अनकहे नायक' होते हैं, जिनके योगदान आंकड़ों में नहीं, बल्कि माहौल में दिखते हैं। उनकी भूमिका हर रणनीति, हर जीत और हर हौसले में महसूस होती है। आज अगर भारत पहली बार महिला वनडे विश्व कप जीतता है, तो यह सिर्फ 11 खिलाड़ियों की नहीं, बल्कि उन सबकी जीत होगी जिन्होंने कभी मैदान पर कदम नहीं रखा, लेकिन टीम के साथ दिल से खेले।
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