सिडनी की नस्लीय घटना पर भड़के पूर्व क्रिकेटर, भज्जी बोले- तब मेरे धर्म को दी गई थी गालियां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चल रही टेस्ट सीरीज नस्लभेद के ताजा मामलों से दागदार हो गई है। सिडनी में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट मैच में दर्शकों द्वारा भारतीय खिलाड़ियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार ने सभी को निराश किया है, यही कारण है कि अब इसकी हर तरफ आलोचना हो रही है।
दरअसल सिडनी क्रिकेट मैदान में चल रहे टेस्ट मैच के लगातार तीसरे और फिर चौथे दिन ऑस्ट्रेलिया के कुछ नशेड़ी दर्शकों ने फील्डिंग कर रहे भारतीय गेंदबाज मोहम्मद सिराज को अपशब्द कहे और उन पर नस्लीय टिप्पणी की। इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए सुरक्षाकर्मियों ने भी तुरंत कार्रवाई करते हुए छह दर्शकों की चिन्हित कर तुरंत मैदान से बाहर कर दिया। उधर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने पूरे प्रकरण पर माफी मांगी और इस पर एक्शन लेने की बात कही। वहीं कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी इस पूरे मामले पर नाराजगी जताते हुए उसकी कड़ी आलोचना की है।
ऑस्ट्रेलिया में खुद नस्लभेद का शिकार हो चुके पूर्व भारतीय गेंदबाज हरभजन सिंह ने ट्वीट कर लिखा, 'मैंने खुद ऑस्ट्रेलिया में खेलते हुए मैदान पर कई बातें सुनी हैं। उन्होंने मेरे रंग और धर्म समेत कई चीजों पर टिप्पणी की। यह पहली बार नहीं है जब भीड़ ने इस तरह की बकवास की है। आप कैसे उन्हें रोकेंगे??
I personally have heard many things on the field while playing in Australia about Me My religion My colour and much more..This isn’t the first time the crowd is doing this nonsense..How do u stop them ?? #AUSvIND
— Harbhajan Turbanator (@harbhajan_singh) January 10, 2021
टीम इंडिया के पूर्व बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'तुम करो तो व्यंग (sarcasm) और कोई करे तो रेसिज्म। एससीजी में जो ऑस्ट्रेलियाई भीड़ कर रही है वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
Tum karo toh Sarcasm , aur koi Kare toh Racism .
— Virender Sehwag (@virendersehwag) January 10, 2021
Very unfortunate with what some of the Australian crowd has been doing at the SCG and spoiling the vibes of a good test series. pic.twitter.com/mrDTbX4t7i
भारतीय टीम के एक और पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने ट्वीट किया, 'एससीजी में जो हो रहा है वह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बेहूदगी के लिए कोई जगह यहीं है। कभी समझ नहीं पाया कि खेल के मैदान में खिलाड़ियों को अपशब्द कहने की क्या जरुरत है। अगर आप यहां खेल देखने नहीं आए हैं और सम्मान नहीं दे सकते हैं तो कृपया यहां आकर माहौल ना खराब करें।
Very unfortunate to see what’s happening at SCG. There is no place for this rubbish. Never understood the need to yell abuse at players on a sporting field.. If you’re not here to watch the game and can’t be respectful, then pls don’t come and spoil the atmosphere. #AUSvIND
— VVS Laxman (@VVSLaxman281) January 10, 2021
वहीं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर और कोच टॉम मूडी ने भी दर्शकों के बर्ताव की आलोचना की है. उन्होंने लिखा, 'अस्वीकार्य व्यवहार, नस्लवाद के लिए कोई जगह नहीं है, मुझे उम्मीद है कि इससे कड़ाई से निपटा जाएगा।'
Unacceptable behaviour there is no place for racism, I hope this is dealt in the most severe way. #AUSvIND
— Tom Moody (@TomMoodyCricket) January 10, 2021
यह एक नियमित मामला बनता जा रहा है- अजहरुद्दीन
पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने ऑस्ट्रेलिया में खेल के दौरान भारतीय खिलाड़ियों पर नस्लीय टिप्पणियों को नियमित घटना करार दिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) से इसे हमेशा के लिए खत्म करने के उपाय ढूंढने का आग्रह किया। इस पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा, 'जब भी हम ऑस्ट्रेलिया में खेलते हैं, ऐसी कुछ चीजें होती हैं। यह एक नियमित मामला बनता जा रहा है। इन सब बातों को किसी को भी तरह से बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'आईसीसी को इस मामले का जल्द से हमेशा के लिए हल निकालना चाहिए।'
स्थायी समाधान और सख्त कार्रवाई की दरकार- गौतम गंभीर
वहीं, टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, 'यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। नस्लीय दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए और किसी के खिलाफ नस्लीय दुर्व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। सख्त कानून और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।' उन्होंने आगे कहा, 'स्टेडियम से सिर्फ भीड़ को बाहर कर देना ही नहीं समाधान है। ऐसा बहुत पहले होता था और यह भविष्य में तब तक हो सकता है, जब तक आपके पास कोई स्थायी समाधान और सख्त कार्रवाई न हो। सख्त कानून की आवश्यकता है और उसके लिए सजा होनी चाहिए।'