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सुशील दोशी की कलम से: पाकिस्तान-द.अफ्रीका मैच विश्व कप का अब तक का सबसे रोमांचक मुकाबला, शीर्ष-4 टीमें लगभग तय
सार
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार के साथ ही पाकिस्तान की इस विश्व कप में चुनौती लगभग समाप्त हो चुकी है। टीम का सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करना अब बेहद मुश्किल है। पाकिस्तान की कमजोरियों को लेकर मशहूर कमेंटेटर सुशील दोशी ने अपनी राय रखी है। आइए जानते हैं...
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सुशील दोशी की कलम से
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नमस्कार! मैं सुशील दोशी एक बार फिर से आपका स्वागत करता हूं। विश्व कप के मुकाबले बहुत ही जबरदस्त चल रहे हैं। शुक्रवार को पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका का जो मुकाबला हुआ था उसने दिलचस्पी के सारे प्रतिमान तोड़ दिए। दक्षिण अफ्रीका ने एक विकेट से जीत हासिल की और एक बार फिर से दिखा दिया कि उनका विजयरथ इस विश्व कप में रुकना नहीं चाहता है। उनकी चुनौती बहुत ही कड़ी होगी।
देखिए पाकिस्तान के लिए तो ये करो या मरो वाली स्थिति थी और कोशिश उनकी यही थी कि जिस मैच में हम कर सकते हैं उसमें मरने की जरूरत क्या है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने भरसक कोशिश की, इसमें भी कोई संदेह नहीं है। उनके गेंदबाजों ने काफी अच्छा काम किया, लेकिन फिर भी दक्षिण अफ्रीका को एक विकेट से जीतने से वे रोक नहीं पाए। आखिरी में ऐसी हालत हो गई थी कि 271 का जो लक्ष्य था न वो शायद हासिल न हो पाए।
पाकिस्तान ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया था और स्क्रू को कसना शुरू कर दिया था और तब लग रहा था कि दक्षिण अफ्रीका शायद हार जाए, लेकिन फिर आखिरी विकेट की भागीदारी में केशव महाराज ने वह काम कर दिखाया। महाराज एक गेंदबाज हैं, लेकिन इस मैच में एक बल्लेबाज की हैसियत से टीम को जीत तक पहुंचाया और टीम को एक विकेट की रोमांचकारी जीत दिला दी।
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ऐसा लगा जैसे कोई दिलचस्प जासूसी किताब का क्लाइमेक्स पढ़ रहे हों। सबसे ज्यादा रोमांचकारी कोई मुकाबला हुआ तो वह पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के बीच मैच है। पाकिस्तान की कमजोरियां एक बार फिर से उभरकर सामने आईं। उनका स्पिन आक्रमण एक बार फिर कमजोर साबित हुआ। उनका तेज आक्रमण तो अच्छा ही है, जिसमें शाहीन अफरीदी हैं, हारिस रऊफ हैं और मोहम्मद वसीम जूनियर ने भी शानदार गेंदबाजी की। जो स्पिन गेंदबाज हैं, वह बेहद मामूली साबित हुए और यही पाकिस्तान की हार का कारण बना। साथ ही उनकी बल्लेबाजी में भी उतनी गहराई नहीं दिखी।
टीम बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान के ऊपर बहुत ज्यादा निर्भर करती है और अगर ये दोनों रन नहीं बनाते तो टीम गिर जाती है और उसका पतन हो जाता है। हमने देखा कि जब अर्धशतक लगाने के बाद बाबर आउट हुए तो बाकी के खिलाड़ी कुछ खास नहीं कर पाए। 50 ओवर जो टीम टिक नहीं पाती, वो विश्व कप जीत नहीं सकती। हमने बारबार देखा है कि पाकिस्तान की टीम अधिकांश मैचों में 50 ओवर नहीं खेल पाई है।
दक्षिण अफ्रीका का गेंदबाजी आक्रमण बहुत अच्छा है। मार्को यानसेन ऊंचे कद के हैं। उनकी गेंद टप्पा खाकर ऊंची आती है। उनके खिलाफ रन बनाने मुश्किल काम है। इसके अलावा तबरेज शम्सी ने भी बहुत अच्छी गेंदबाजी की। वह एक चाइनामैन गेंदबाज हैं और कुलदीप के किस्म के बॉलर हैं। उन्होंने चाइनामैन, गुगली और टॉप स्पिन का बेहतरीन मिश्रण किया। उन्होंने चार विकेट निकाले और दक्षिण अफ्रीका की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कुल मिलाकर अब साफ होता जा रहा है कि सेमीफाइनल में पहुंचने की दावेदार जो चार टीमें हैं उनमें तीन टीमों के नाम तो लगभग तय हो गए हैं। भारत सेमीफाइनल खेलने जा रहा है। उसके अलावा दक्षिण अफ्रीका अब इस जीत के साथ मजबूत दावेदार हो गया है। इसके अलावा न्यूजीलैंड भी अब एक शक्तिशाली चुनौती पेश कर रहा है। चौथे स्थान के लिए ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका अच्छी चुनौती पेश कर रहे हैं।
अब इन दोनों के जो मुकाबले होंगे, लोग उस पर गौर करेंगे और देखेंगे कि कौन सी टीम आगे बढ़ती है। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी लगता है। यह विश्व कप अब रोमांचक स्थिति में आ गया है। आइए आप और हम मिलकर इस जोरदार टूर्नामेंट को जिस दिलचस्पी के साथ अभी तक देख रहे हैं, उसी तरह से आगे भी देखना जारी रखेंगे। धन्यवाद।
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देखिए पाकिस्तान के लिए तो ये करो या मरो वाली स्थिति थी और कोशिश उनकी यही थी कि जिस मैच में हम कर सकते हैं उसमें मरने की जरूरत क्या है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने भरसक कोशिश की, इसमें भी कोई संदेह नहीं है। उनके गेंदबाजों ने काफी अच्छा काम किया, लेकिन फिर भी दक्षिण अफ्रीका को एक विकेट से जीतने से वे रोक नहीं पाए। आखिरी में ऐसी हालत हो गई थी कि 271 का जो लक्ष्य था न वो शायद हासिल न हो पाए।
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पाकिस्तान ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया था और स्क्रू को कसना शुरू कर दिया था और तब लग रहा था कि दक्षिण अफ्रीका शायद हार जाए, लेकिन फिर आखिरी विकेट की भागीदारी में केशव महाराज ने वह काम कर दिखाया। महाराज एक गेंदबाज हैं, लेकिन इस मैच में एक बल्लेबाज की हैसियत से टीम को जीत तक पहुंचाया और टीम को एक विकेट की रोमांचकारी जीत दिला दी।
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ऐसा लगा जैसे कोई दिलचस्प जासूसी किताब का क्लाइमेक्स पढ़ रहे हों। सबसे ज्यादा रोमांचकारी कोई मुकाबला हुआ तो वह पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के बीच मैच है। पाकिस्तान की कमजोरियां एक बार फिर से उभरकर सामने आईं। उनका स्पिन आक्रमण एक बार फिर कमजोर साबित हुआ। उनका तेज आक्रमण तो अच्छा ही है, जिसमें शाहीन अफरीदी हैं, हारिस रऊफ हैं और मोहम्मद वसीम जूनियर ने भी शानदार गेंदबाजी की। जो स्पिन गेंदबाज हैं, वह बेहद मामूली साबित हुए और यही पाकिस्तान की हार का कारण बना। साथ ही उनकी बल्लेबाजी में भी उतनी गहराई नहीं दिखी।
टीम बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान के ऊपर बहुत ज्यादा निर्भर करती है और अगर ये दोनों रन नहीं बनाते तो टीम गिर जाती है और उसका पतन हो जाता है। हमने देखा कि जब अर्धशतक लगाने के बाद बाबर आउट हुए तो बाकी के खिलाड़ी कुछ खास नहीं कर पाए। 50 ओवर जो टीम टिक नहीं पाती, वो विश्व कप जीत नहीं सकती। हमने बारबार देखा है कि पाकिस्तान की टीम अधिकांश मैचों में 50 ओवर नहीं खेल पाई है।
दक्षिण अफ्रीका का गेंदबाजी आक्रमण बहुत अच्छा है। मार्को यानसेन ऊंचे कद के हैं। उनकी गेंद टप्पा खाकर ऊंची आती है। उनके खिलाफ रन बनाने मुश्किल काम है। इसके अलावा तबरेज शम्सी ने भी बहुत अच्छी गेंदबाजी की। वह एक चाइनामैन गेंदबाज हैं और कुलदीप के किस्म के बॉलर हैं। उन्होंने चाइनामैन, गुगली और टॉप स्पिन का बेहतरीन मिश्रण किया। उन्होंने चार विकेट निकाले और दक्षिण अफ्रीका की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कुल मिलाकर अब साफ होता जा रहा है कि सेमीफाइनल में पहुंचने की दावेदार जो चार टीमें हैं उनमें तीन टीमों के नाम तो लगभग तय हो गए हैं। भारत सेमीफाइनल खेलने जा रहा है। उसके अलावा दक्षिण अफ्रीका अब इस जीत के साथ मजबूत दावेदार हो गया है। इसके अलावा न्यूजीलैंड भी अब एक शक्तिशाली चुनौती पेश कर रहा है। चौथे स्थान के लिए ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका अच्छी चुनौती पेश कर रहे हैं।
अब इन दोनों के जो मुकाबले होंगे, लोग उस पर गौर करेंगे और देखेंगे कि कौन सी टीम आगे बढ़ती है। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी लगता है। यह विश्व कप अब रोमांचक स्थिति में आ गया है। आइए आप और हम मिलकर इस जोरदार टूर्नामेंट को जिस दिलचस्पी के साथ अभी तक देख रहे हैं, उसी तरह से आगे भी देखना जारी रखेंगे। धन्यवाद।