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DRS पर फिर उठी उंगलियां, विराट निराश,गावस्कर ने उठाए सवाल
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 21 Nov 2016 12:41 AM IST
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डीआरएस
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भारत में पहली बार प्रायोगिक तौर पर डीआरएस यानी डिसीजन रिव्यू सिस्टम को भारत-इंग्लैंड टेस्ट सीरीज के दौरान लागू किया गया है। इसकी उपयोगिता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं लेकिन एक बार फिर विशाखापट्टनम टेस्ट में भारतीय खिलाड़ी खासकर कप्तान विराट कोहली नाखुश नजर आए। उनकी इस नाखुशी का सुनील गावस्कर सहित कई खिलाड़ियों ने समर्थन भी किया।
जीत के 405 रनों के स्कोर का पीछा करने उतरी इंग्लैंड ने अच्छी शुरुआत की। पहले विकेट के लिए तरस रही टीम इंडिया ने 46 और 47 वें ओवर में कप्तान कुक के पैड पर गेंद लगने के बाद रिव्यू लिया। दोनों ही बार गेंद स्टंप पर लग रही थी लेकिन अंपायर्स कॉल के आधार पर कुक को नॉट आउट करार दिया गया। लेकिन इस बीच भारत ने 80 ओवर में मिलने वाले दोनों रिव्यू गंवा दिए। दोनों ही बार गेंद लाइन पर पिच नहीं हुई थी। दोनों ही बार बल्लेबाजों को नॉट आउट करार दिया। उस वक्त इंग्लैंड का स्कोर 70 रन था।
पहली बार जड़ेजा की गेंद पर कुक अंदर आती एक गेंद को खेलने से चूक गए। गेंद उनके पैड पर लगी। ऐसे में कप्तान कोहली ने रिव्यू लिया। रिव्यू में मालूम हुआ कि गेंद लाइन के बाहर पिच हुई लेकिन गेंद लेग स्टंप पर आधी से ज्यादा लग रही थी। इसके अगले ही ओवर में अश्विन की गेंद पर कुक चूक गए। गेंद पहले पैड पर लगी फिर बैट पर। खिलाड़ियों की अपील पर अंपायर ने कुक को नॉट ऑउट करार दिया। जब रिव्यू लिया गया तो गेंद लाइन पर नहीं पड़ी थी ऐेसे में थर्ड अंपायर ने कुक को नॉट आउट करार दिया।
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इसके बाद सुनील गावस्कर ने कॉमेंट्री के दौरान कहा कि यदि अंपायर्स कॉल पर ही तीसरे अंपायर को रहना है तो रिव्यू की जरूरत ही क्या है। इस बात के लिए रिव्यू लिया जाता है कि गेंद स्टंप पर लग रही थी या नहीं, तो गेंद के स्टंप पर लगने पर भी ग्राउंड अंपायर के निर्णय पर जाना गलत है। तीसरे अंपायर को यह देखना चाहिए कि गेंद स्टंप पर लग रही है या नहीं, यदि लग रही है तो उसे आउट देना चाहिए। यदि अंपायर कॉल पर ही जाना है तो रिव्यू की कोई आवश्यक्ता नहीं है।
ऐसे में लग रहा है कि डीआरएस के विरोध में महेंद्र सिंह धोनी के बाद विराट कोहली भी हो जाएंगे। जिन आशाओं के साथ डीआरएस को लागू किया गया है। डीआरएस उन आशाओं पर खरा नहीं उतर रहा है। ऐसे में भारत में इसके इस्तेमाल पर फिर प्रश्नचिन्ह खड़े हो सकते हैं।
जीत के 405 रनों के स्कोर का पीछा करने उतरी इंग्लैंड ने अच्छी शुरुआत की। पहले विकेट के लिए तरस रही टीम इंडिया ने 46 और 47 वें ओवर में कप्तान कुक के पैड पर गेंद लगने के बाद रिव्यू लिया। दोनों ही बार गेंद स्टंप पर लग रही थी लेकिन अंपायर्स कॉल के आधार पर कुक को नॉट आउट करार दिया गया। लेकिन इस बीच भारत ने 80 ओवर में मिलने वाले दोनों रिव्यू गंवा दिए। दोनों ही बार गेंद लाइन पर पिच नहीं हुई थी। दोनों ही बार बल्लेबाजों को नॉट आउट करार दिया। उस वक्त इंग्लैंड का स्कोर 70 रन था।
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पहली बार जड़ेजा की गेंद पर कुक अंदर आती एक गेंद को खेलने से चूक गए। गेंद उनके पैड पर लगी। ऐसे में कप्तान कोहली ने रिव्यू लिया। रिव्यू में मालूम हुआ कि गेंद लाइन के बाहर पिच हुई लेकिन गेंद लेग स्टंप पर आधी से ज्यादा लग रही थी। इसके अगले ही ओवर में अश्विन की गेंद पर कुक चूक गए। गेंद पहले पैड पर लगी फिर बैट पर। खिलाड़ियों की अपील पर अंपायर ने कुक को नॉट ऑउट करार दिया। जब रिव्यू लिया गया तो गेंद लाइन पर नहीं पड़ी थी ऐेसे में थर्ड अंपायर ने कुक को नॉट आउट करार दिया।
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इसके बाद सुनील गावस्कर ने कॉमेंट्री के दौरान कहा कि यदि अंपायर्स कॉल पर ही तीसरे अंपायर को रहना है तो रिव्यू की जरूरत ही क्या है। इस बात के लिए रिव्यू लिया जाता है कि गेंद स्टंप पर लग रही थी या नहीं, तो गेंद के स्टंप पर लगने पर भी ग्राउंड अंपायर के निर्णय पर जाना गलत है। तीसरे अंपायर को यह देखना चाहिए कि गेंद स्टंप पर लग रही है या नहीं, यदि लग रही है तो उसे आउट देना चाहिए। यदि अंपायर कॉल पर ही जाना है तो रिव्यू की कोई आवश्यक्ता नहीं है।
ऐसे में लग रहा है कि डीआरएस के विरोध में महेंद्र सिंह धोनी के बाद विराट कोहली भी हो जाएंगे। जिन आशाओं के साथ डीआरएस को लागू किया गया है। डीआरएस उन आशाओं पर खरा नहीं उतर रहा है। ऐसे में भारत में इसके इस्तेमाल पर फिर प्रश्नचिन्ह खड़े हो सकते हैं।