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Sri Lanka crisis: श्रीलंका संकट पर सनथ जयसूर्या बोले- नेताओं ने देश को बर्बाद किया, एशिया कप पर कही बड़ी बात
Wed, 13 Jul 2022 07:39 PM IST
रोहित राज
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रोहित राज
Updated Wed, 13 Jul 2022 07:39 PM IST
सार
जयसूर्या ने सरकार के खिलाफ हो रहे आंदोलन में प्रदर्शनकारियों का साथ दिया है। आमलोगों की तरह जयसूर्या को भी उम्मीद है कि बहुत जल्द लोकतंत्र वापस आएगा और लंबे समय में चीजें धीरे-धीरे सामान्य हो जाएंगी।
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सनथ जयसूर्या
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
श्रीलंका को भारी वित्तीय संकट और अशांति से जूझते हुए देखकर पूर्व कप्तान सनथ जयसूर्या दुखी और नाराज दोनों हैं। उन्होंने सरकार के खिलाफ हो रहे आंदोलन में प्रदर्शनकारियों का साथ दिया है। जयसूर्या का मानना है कि देश को नेताओं ने बर्बाद कर दिया है। उन्हें उम्मीद है कि देश में लोकतंत्र जल्द ही बहाल हो जाएगा। साथ ही पूर्व श्रीलंकाई कप्तान को उम्मीद है कि अगले महीने उनका देश एशिया कप का आयोजन कर सकता है।
जयसूर्या ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, "यह एक बहुत ही दुखद स्थिति है कि श्रीलंकाई जनता को क्या करना पड़ रहा है। मेरा देश पीड़ित है और मुझे आवश्यक खाद्य पदार्थों को खरीदने के लिए लंबी कतारों में खड़े लोगों को देखकर दुख हो रहा है। बिजली नहीं है, ईंधन नहीं है और इसके ऊपर सभी बुनियादी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। आम आदमी के लिए इससे बदतर कुछ नहीं हो सकता था।"
'राजनेताओं ने देश को गलत तरीके से चलाया'
जयसूर्या ने गुस्से में कहा, "यह स्थिति वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है। उम्मीद है कि आज 13 जुलाई को गोतबाया अपना इस्तीफा दे देंगे। मेरे पास यह बताने के लिए कोई शब्द नहीं हैं कि हमारे राजनेताओं ने देश को पूरी तरह गलत तरीके से चलाया है।" जयसूर्या ने 90 के दशक में वनडे क्रिकेट में बल्लेबाजी की परिभाषा बदल दी थी। उन्होंने शुरुआती ओवरों में विस्फोटक बल्लेबाजी की और अन्य टीमों को पावरप्ले में खेलना सिखाया।
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राष्ट्रपति भवन के अंदर आमलोगों ने कुछ गलत नहीं किया: जयसूर्या
जयसूर्या ने आगे कहा, "यदि आप मुझसे जनता के बारे में पूछें, जो वर्तमान में राष्ट्रपति भवन के अंदर हैं, तो मुझे कुछ भी गलत नहीं लगता क्योंकि वे अपने विरोध प्रदर्शन में शांतिपूर्ण रहे हैं। उन्हें बार-बार सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाने के लिए कहा गया है। हां, बहुत सारे लोग श्रीलंका के विभिन्न हिस्सों से आए हैं। वे सभी राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग को लेकर नौ जुलाई को कोलंबो पहुंचे।''
उन्होंने कहा, "सभी को राष्ट्रपति भवन के सामानों की देखभाल करने के लिए कहा गया था क्योंकि कुछ चीजें बहुत मूल्यवान हैं। इमारत के अंदर कुछ भी अप्रिय नहीं हुआ है।" आमलोगों की तरह जयसूर्या को भी उम्मीद है कि बहुत जल्द लोकतंत्र वापस आएगा और लंबे समय में चीजें धीरे-धीरे सामान्य हो जाएंगी।
'रानिल विक्रमसिंघे के पास विकल्प नहीं'
यह पूछे जाने पर कि क्या वह कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की पदोन्नति का समर्थन करते हैं, तो श्रीलंका के पूर्व कप्तान ने कहा, ''रानिल के पास कोई विकल्प नहीं है, लेकिन उन्हें स्पीकर महिंदा यापा अभयवर्धने के आदेशों का पालन करना होगा और उसी के अनुसार करना होगा। देश में शांति और लोकतंत्र को वापस बहाल करने के लिए रानिल को अन्य लोगों के साथ साजिथ प्रेमदासा (विपक्ष के नेता) से बात करने की आवश्यकता होगी। उन्हें देश के मुस्लिम नेताओं, तमिल नेताओं से चर्चा करने की जरूरत है। हमें अपने देश में लोकतंत्र बहाल करने की जरूरत है।"
'श्रीलंका में हर कोई क्रिकेट को प्यार करता है'
राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शनकारियों के घुसने के बावजूद श्रीलंका-ऑस्ट्रेलिया के मैच पर कोई असर नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों ने मैच में खलल नहीं डाला। इससे जयसूर्या को अगस्त में शुरू होने वाले एशिया कप टी20 की मेजबानी करने में सक्षम होने का भरोसा मिला। उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि एशिया कप होगा और टूर्नामेंट के लिए कोई खतरा नहीं है। श्रीलंका में हर कोई क्रिकेट और हर देश के क्रिकेटरों से प्यार करता है। श्रीलंकाई जनता के पास किसी भी क्रिकेटर के खिलाफ कुछ भी नहीं है। टूर्नामेंट को शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित करने में सभी समर्थन देंगे।"
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जयसूर्या ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा, "यह एक बहुत ही दुखद स्थिति है कि श्रीलंकाई जनता को क्या करना पड़ रहा है। मेरा देश पीड़ित है और मुझे आवश्यक खाद्य पदार्थों को खरीदने के लिए लंबी कतारों में खड़े लोगों को देखकर दुख हो रहा है। बिजली नहीं है, ईंधन नहीं है और इसके ऊपर सभी बुनियादी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। आम आदमी के लिए इससे बदतर कुछ नहीं हो सकता था।"
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'राजनेताओं ने देश को गलत तरीके से चलाया'
जयसूर्या ने गुस्से में कहा, "यह स्थिति वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है। उम्मीद है कि आज 13 जुलाई को गोतबाया अपना इस्तीफा दे देंगे। मेरे पास यह बताने के लिए कोई शब्द नहीं हैं कि हमारे राजनेताओं ने देश को पूरी तरह गलत तरीके से चलाया है।" जयसूर्या ने 90 के दशक में वनडे क्रिकेट में बल्लेबाजी की परिभाषा बदल दी थी। उन्होंने शुरुआती ओवरों में विस्फोटक बल्लेबाजी की और अन्य टीमों को पावरप्ले में खेलना सिखाया।
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राष्ट्रपति भवन के अंदर आमलोगों ने कुछ गलत नहीं किया: जयसूर्या
जयसूर्या ने आगे कहा, "यदि आप मुझसे जनता के बारे में पूछें, जो वर्तमान में राष्ट्रपति भवन के अंदर हैं, तो मुझे कुछ भी गलत नहीं लगता क्योंकि वे अपने विरोध प्रदर्शन में शांतिपूर्ण रहे हैं। उन्हें बार-बार सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाने के लिए कहा गया है। हां, बहुत सारे लोग श्रीलंका के विभिन्न हिस्सों से आए हैं। वे सभी राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग को लेकर नौ जुलाई को कोलंबो पहुंचे।''
उन्होंने कहा, "सभी को राष्ट्रपति भवन के सामानों की देखभाल करने के लिए कहा गया था क्योंकि कुछ चीजें बहुत मूल्यवान हैं। इमारत के अंदर कुछ भी अप्रिय नहीं हुआ है।" आमलोगों की तरह जयसूर्या को भी उम्मीद है कि बहुत जल्द लोकतंत्र वापस आएगा और लंबे समय में चीजें धीरे-धीरे सामान्य हो जाएंगी।
'रानिल विक्रमसिंघे के पास विकल्प नहीं'
यह पूछे जाने पर कि क्या वह कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की पदोन्नति का समर्थन करते हैं, तो श्रीलंका के पूर्व कप्तान ने कहा, ''रानिल के पास कोई विकल्प नहीं है, लेकिन उन्हें स्पीकर महिंदा यापा अभयवर्धने के आदेशों का पालन करना होगा और उसी के अनुसार करना होगा। देश में शांति और लोकतंत्र को वापस बहाल करने के लिए रानिल को अन्य लोगों के साथ साजिथ प्रेमदासा (विपक्ष के नेता) से बात करने की आवश्यकता होगी। उन्हें देश के मुस्लिम नेताओं, तमिल नेताओं से चर्चा करने की जरूरत है। हमें अपने देश में लोकतंत्र बहाल करने की जरूरत है।"
'श्रीलंका में हर कोई क्रिकेट को प्यार करता है'
राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शनकारियों के घुसने के बावजूद श्रीलंका-ऑस्ट्रेलिया के मैच पर कोई असर नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों ने मैच में खलल नहीं डाला। इससे जयसूर्या को अगस्त में शुरू होने वाले एशिया कप टी20 की मेजबानी करने में सक्षम होने का भरोसा मिला। उन्होंने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि एशिया कप होगा और टूर्नामेंट के लिए कोई खतरा नहीं है। श्रीलंका में हर कोई क्रिकेट और हर देश के क्रिकेटरों से प्यार करता है। श्रीलंकाई जनता के पास किसी भी क्रिकेटर के खिलाफ कुछ भी नहीं है। टूर्नामेंट को शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित करने में सभी समर्थन देंगे।"