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आरटीआई के दायरे में आएगा बीसीसीआई
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jul 2013 12:03 AM IST
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सरकार ने एक नए कानून के जरिए बीसीसीआई समेत सभी खेल संघों को सूचना अधिकार कानून (आरटीआई) के दायरे में लाने की तैयारी कर ली है।
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बीसीसीआई भले ही सरकार से किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं लेता हो लेकिन नया खेल कानून बनाने पर उसे न सिर्फ इसका पालन करना होगा बल्कि आरटीआई को भी स्वीकार करना होगा।
यही नहीं, प्रस्तावित नियमों का पालन न करने पर बीसीसीआई को भारत या इंडिया के नाम का प्रयोग करने से रोका जा सकता है।
नेशनल स्पोर्ट्स डेवलेपमेंट बिल 2013 का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित वर्किंग ग्रुप के चेयरमैन हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज मुकुल मुद्गल ने बताया कि मसौदा तैयार है।
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कैबिनेट में ले जाए जाने से पहले इसे इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। यही नहीं अब ऐसा कोई भी व्यक्ति खेल संघ का चुनाव नहीं लड़ पाएगा जिसके खिलाफ आरोप तय हो चुके होंगे।
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जस्टिस मुद्गल ने यह भी साफ किया सिर्फ क्रिकेट बोर्ड ही नहीं बल्कि आईपीएल भी आरटीआई के दायरे में आएगा। लेकिन उन्होंने यह जरूर साफ कर दिया कि आरटीआई के तहत नाडा, व्हेयरअबाउट, चयन संबंधी मामलों के अलावा गोपनीय कामर्शियल सूचनाएं, जांच व स्वास्थ्य संबंधी सूचनाएं जानने का अधिकार नहीं होगा।
पूर्व खेल मंत्री अजय माकन के कार्यकाल में भी क्रिकेट बोर्ड को आरटीआई के दायरे में लाने पर बिल कैबिनेट में पास नहीं हो सका था। खेल मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस पर फिर से वर्किंग ग्रुप गठित किया।
पहले क्रिकेट बोर्ड को आरटीआई के दायरे में नहीं रखने की बात सामने आई। लेकिन बीजिंग ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा, हॉकी खिलाड़ी वीरेन रसक्वीन्हा समेत नौ सदस्यीय वर्किंग ग्रुप ने बोर्ड समेत सभी खेल संघों को आरटीआई के दायरे में लाने की सिफारिश की है।
खेल मंत्रालय के सचिव पीके देब के अनुसार स्पोर्ट्स बिल के मसौदे के तहत सभी 66 खेल संघों को दो ग्रुपों में विभाजित किया गया है।
सभी खेल संघों को अपनी गतिविधियों के लिए मंत्रालय से मान्यता लेना जरूरी होगा। इनमें बोर्ड भी शामिल है। जो खेल संघ मंत्रालय से आर्थिक सहायता लेते हैं उन्हें आधिकारिक प्रमाण पत्र लेना होगा।
बिल का पालन नहीं करने पर बोर्ड की मान्यता खत्म हो सकती है। इससे क्रिकेट बोर्ड को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन देब के अनुसार बिल का पालन नहीं करने उसे भारत और इंडिया जैसे शब्दों के प्रयोग से रोका जा सकता है।
ये नहीं होंगे दायरे में
नाडा, व्हेयरअबाउट, खिलाड़ियों और कोच के चयन संबंधी मामले, गोपनीय कामर्शियल सूचनाएं, जांच व स्वास्थ्य संबंधी सूचनाएं जानने का अधिकार आरटीआई के तहत नहीं होगा।
बीसीसीआई के पैनल ने श्रीनिवासन को बड़ी तेजी से क्लीन चिट दे दी, जबकि दिल्ली और मुंबई पुलिस अभी मामले की जांच कर ही रही हैं। क्या बीसीसीआई देश के संविधान और कानून से भी ऊपर है। बीसीसीआई का तत्काल सूचना अधिकार कानून के दायरे में लाए जाने की जरूरत है। बोर्ड की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए यह बहुत जरूरी है।--कीर्ति आजाद
क्रिकेट बोर्ड समेत सभी खेल संघ आरटीआई के दायरे में होंगे। आईपीएल भी इसके दायरे में आएगा।--जस्टिस मुकुल मुद्गल