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बिना केबल का रंगीन टीवी, 'आई हेट यू सचिन'
पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 24 Dec 2012 03:39 PM IST
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ऐसा भारत में ही हो सकता है जहां आप अपने 'भगवान' को कटघरे में खड़ा कर सवाल पूछ सकते हैं। यही नहीं उसकी काबिलियत पर उंगली उठाते हुए उसे यह 'पोस्ट' छोड़ने के लिए मजबूर भी कर सकते हैं। ऐसा ही कुछ क्रिकेट के 'युगपुरुष' सचिन तेंदुलकर के साथ भी हुआ।
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सचिन ने क्रिकेट के सबसे रोमांचक संस्करण को अलविदा कह अपने प्रशंसकों को बहुत निराशा दी है। उनके 23 साल के क्रिकेट कैरियर में यह पहला मौका है जब उन्होंने मुझे इतना दुख दिया है। मेरे हिसाब से सचिन को अभी और वनडे क्रिकेट खेलना चाहिए था।
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सचिन के वनडे क्रिकेट छोड़ने से कितना गहरा धक्का मुझे लगा है उसके कुछ कारण मैं आप लोगों से शेयर करना चाहता हूं--
1- मैं नास्तिक तो नहीं हूं पर भगवान को कम मानता हूं। जब सचिन वनडे मैचों में शतक के करीब पहुंचते हैं तो मैं पूरी तरह भगवान की प्रार्थना करने लगता हूं। मैं भगवान से कहता हूं कि हे भगवान सचिन का शतक जरूर पूरा करवा दें। सचिन ने मुझे भगवान में विश्वास करना सिखाया। आने वाले समय में अब ऐसा होना मुमकिन नहीं होगा।
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2- क्रिकेट का प्रशंसक होने के अलावा मैं क्रिकेट खेलता भी हूं। मैच देखते हुए कभी-कभी मुझे लगने लगता है कि क्रिकेट बोरिंग हो रहा है। ऐसे में सचिन का शानदार स्ट्रेट ड्राइव मुझे इतना रोमांचित कर देता है कि मैं क्रिकेट से फिर प्यार करने लगता हूं। सचिन के जाने के बाद अब शायद मेरा क्रिकेट से प्यार कम होने लगेगा।
3- सचिन जब बल्लेबाजी करने उतरते हैं तो पूरा भारत एक साथ उनके स्वागत में खड़ा हो जाता है। यह हमारी अखंडता को दर्शाने का बेहतरीन उदाहरण है। अब जब सचिन मैदान पर नहीं उतरेंगे तो हम भारतवासी कितनी बार एक साथ होंगे इस पर संदेह है।
4- सचिन जब मैदान पर उतरते हैं तो उनको देखते हुए मैं अपना ध्यान उनके खेल पर केंद्रित करता हूं। इस कारण मेरे अंदर concentration power बहुत बढ़ती है। अब सचिन का खेल देखे बगैर मैं इस पॉवर को नहीं बढ़ा पाउंगा।
5- मैने जब से क्रिकेट खेलना और देखना शुरू किया तब से सचिन को ही पसंद करता हूं। सचिन का वनडे क्रिकेट छोड़ने के बाद अब मेरे लिए क्रिकेट वैसे ही जैसे बिना केबल का रंगीन टीवी।