क्या प्रणब धनावड़े कलयुगी एकलव्य बन गए हैं?
मुंबई अंडर 16 टीम में प्रणव धनावड़े का चयन न होने और भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन के चुने जाने पर सोशल मीडिया में बहस बढ़ती जा रही है।
प्रणव धनावड़े स्कूली क्रिकेट में 1,009 रन की अपनी चमत्कारी पारी से देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गए थे। उस पारी पर सचिन तेंदुलकर समेत कई लोगों ने प्रणव को बधाई दी थी।
प्रणव के पिता ऑटो रिक्शा चालक हैं। प्रणव का चयन नहीं होने पर मोहन श्रोत्रिय ने फेसबुक पर लिखा है, ''यह तो होना ही था।।।कांबली के साथ भी हुआ था न? प्रणव धनावड़े हमारे समय का एकलव्य"।
महेंद्र यादव ने तो अर्जुन तेंदुलकर की एक काल्पनिक चिट्ठी पोस्ट की है, "मेरे प्रिय मित्र प्रणव धनवाड़े, तुम अभी सिर्फ बधाई से काम चलाओ।।।मैं भी महान बनने के बाद तुम्हें याद करता रहूंगा"।
ट्वीट के जरिए लोगों की नाराजगी निकली
पत्रकार शाहिद नकवी लिखते हैं, "राजनीति में जब विरासत चलती है तो तमाम सवाल खड़े किये जाते हैं, लेकिन जब यही विरासत क्रिकेट में चलती है तो लोग बड़ी उत्सुकता से इंतज़ार करते हैं"।
दलित समाज इंडिया ने ट्वीट किया है, "#pranavdhanvade #arjuntendulkar @sachin_rt सचिन को देश को इस #discrimination #injustice अन्याय और भेदभाव के लिए अपनी सफाई देनी चाहिए"।
"फिर से द्रोणाचार्य ने एकलव्य का अंगूठा काट दिया"
कोटा से लखन गौतम ने अपनी फ़ेसबुक वॉल पर लिखा है, "टीना डाबी को कोसने वाले लोग, प्लीज़ अब आप प्रणव धनावड़े के लिए कुछ नहीं बोलेंगे।"
शिव पासी महेंद्र यादव की पोस्ट को शेयर करते हुए कमेंट करते हैं, "फिर से द्रोणाचार्य ने एकलव्य का अंगूठा काट दिया"।