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आखिर क्यों मैच खत्म होते ही अस्पताल भाग पड़ते हैं पार्थिव पटेल, दुख की घड़ी में निभा रहे फर्ज

Sat, 13 Apr 2019 03:34 PM IST
Sumit kumar स्पोर्ट्स न्यूज, अमर उजाला
स्पोर्ट्स न्यूज, अमर उजाला Published by: Sumit kumar Updated Sat, 13 Apr 2019 03:34 PM IST
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parthiv patel father suffering from Brain Hemorrhage during IPL 2019
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इंडियन टी-20 का 12वां सीजन खेला जा रहा है, जिसमें विराट कोहली की बैंगलोर ने अपने पिछले सभी 6 मुकाबलों में हार देखी है। इस टीम के ओपनर बल्लेबाज पार्थिव पटेल को छोड़ दें तो लगभग पूरी टीम के खिलाड़ियों ने निराश किया है। कई मैचों में पार्थिव अकेले अंत तक लड़े हैं, लेकिन टीम की नाकामयाबी ने हमेशा उनके योगदान को ढके रखा।


 

parthiv patel father suffering from Brain Hemorrhage during IPL 2019
parthiv patel

वहीं दूसरी ओर क्या आपको मालूम है कि पार्थिव इंडियन टी-20 लीग का कोई भी मुकाबला खेलने के बाद सीधे अस्पताल की तरफ रुख कर लेते हैं। इसकी वजह यह है कि पार्थिव के पिता काफी बीमार हैं और वो हैदराबाद के किसी अस्पताल में दाखिल हैं।

parthiv patel father suffering from Brain Hemorrhage during IPL 2019
parthiv patel

बैंगलोर के विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल इन दिनों दोहरी जिम्मदारियों का सामना कर रहे हैं। वह मैच के बाद बीमार पिता की देखभाल के अस्पताल जाते हैं। उनके पिता ब्रेन हैमरेज की वजह से अहमदाबाद में हैं। इसके अलावा पार्थिव को मैच खेलने के लिए लगातार दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है।

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parthiv patel father suffering from Brain Hemorrhage during IPL 2019
पार्थिव पटेल

पार्थिव के पिता फरवरी से अस्पताल में भर्ती हैं। इसके चलते हर वक्त उनका ध्यान अपने फोन पर रहता है। फोन के जरिए ही उन्हें पिता की सेहत के बारे में पता चलता है। हालांकि मैच के दौरान पार्थिव का परिवार उन्हें फोन नहीं करता। पार्थिव ने बताया कि मैच के बाद जब भी वे फोन उठाते हैं तो उन्हें डर लग रहा होता है।

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parthiv patel father suffering from Brain Hemorrhage during IPL 2019
पार्थिव पटेल

पार्थिव ने खुद एक अंग्रेजी अखबार को बताया, 'जब मैं खेल रहा होता हूं तब मेरे दिमाग में कुछ नहीं होता है लेकिन जैसे ही मैच पूरा होता है मेरा दिल घर को सोचने लगता है। सुबह उठते ही पापा की सेहत के बारे में पूछता हूं, डॉक्टरों से बात करता हूं। कभी कभी कुछ कड़े फैसले लेने होते हैं। मेरी मां और बीवी घर पर हैं लेकिन आखिरी फैसला लेने से पहले मुझसे ही पूछा जाता है। शुरुआती दिन काफी अहम थे- क्या कुछ दिन के लिए वेंटिलेटर बंद कर दें या कितना ऑक्सीजन दिया जाना चाहिए। ऐसे फैसले लेना काफी कठिन होता है।'

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