तेज होने लगी मांग, टेस्ट क्रिकेट 5 नहीं अब 4 दिनों का हो
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क्रिकेट वर्ल्ड में टी-20 के आगमन के बाद से इस खेल के सबसे पुराने स्वरूप टेस्ट को बचाने को लेकर कवायद लगातार जारी है। फटाफट क्रिकेट की लोकप्रियता को देखते हुए इस खेल से जुड़े दिग्गज लोगों का यह मांग तेज होने लगी है कि टेस्ट में दिनों की संख्या में कटौती कर दिया जाए।
टेस्ट को बचाने और दर्शकों को स्टेडियम तक बुलाने को लेकर पिछले साल क्रांतिकारी कदम उठाते हुए पिंक बॉल के साथ दिन-रात का टेस्ट मैच खेला गया। पिछले साल नवंबर में एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच पहली बार दिन-रात का टेस्ट मैच कराया गया और वह भी परंपरागत लाल गेंद के बजाए पिंक बॉल से।
क्रिकेट वर्ल्ड में इसे अब तक का सबसे बड़ा प्रयोग करार दिया गया। अब टेस्ट को लेकर एक और मांग जोर पकड़ने लगी है। इस खेल से जुड़ी बड़ी हस्तियां का मानना है कि 5 दिन के खेल के दिन की संख्या को घटाते हुए 4 दिनों का कर दिया जाए। इस बात की सलाह देने वालों में नया नाम न्यूजीलैंड क्रिकेट के प्रमुख डेविड व्हाइट का है जिन्होंने यह सुझाव दिया है कि टेस्ट में दिनों की संख्या घटाकर न सिर्फ खेल के रोमांच को बनाए रखा जा सकता है बल्कि खिलाड़ियों पर काम का दबाव कम कराया जा सकता है।
लगातार मिल रहा है 4 दिन के टेस्ट को समर्थन
न्यूजीलैंड क्रिकेट के प्रमुख डेविड व्हाइट का कहना है कि टेस्ट को बचाए रखने के लिए लगातार इसको लेकर प्रयोग किए जाने चाहिए। उनका विचार है कि टेस्ट को 5 दिन के बजाए 4 दिनों का कर दिया जाना चाहिए। इससे खिलाड़ियों को भी आराम मिल जाएगा।
टेस्ट में दिन की संख्या घटाने को लेकर सबसे पहले यह विचार दिया था ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान मार्क टेलर ने। टेलर के इस सलाह को ऑस्ट्रेलिया के ही पूर्व महान क्रिकेटरों शेन वार्न और ग्रेग चैपल के साथ-साथ इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड चेयरमैन कोलिन ग्रेव्स का समर्थन भी मिल चुका है।
व्हाइट ने क्रिकइंफो से कहा, "हमें इस पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। इस समय यह सबसे बड़ी चुनौती भी है क्योंकि अगर आप 3 मैचों की टेस्ट सीरीज खेलते हैं तो यह 4 हफ्ते तक खेला जाता है। 4 हफ्ता बहुत लंबा समय होता है।" उन्होंने आगे कहा, "लेकिन अगर आप 3 टेस्ट सीरीज 4-4 दिनों की खेलते हैं तो यह 3 हफ्ते में खत्म हो जाएगी और इससे एक हफ्ता बचेगा।"
व्हाइट ने बताया कि हमें टेस्ट क्रिकेट में 2 स्तरीय खेल को भी लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर 2 स्तरीय खेल (प्रमोशन और रिलेगेशन) इसमें लागू होता है तो इस खेल का रोमांच बढ़ सकता है, इसमें कोई शक नहीं है। कमजोर टीमें (जिम्बाब्वे और बांग्लादेश) भी अपने खेल का स्तर बढ़ाकर प्रदर्शन में सुधार लाने की कोशिश कर सकती हैं।
पहले भी क्रिकेट में हुए हैं बेहद गजब के बदलाव
क्रिकेट में पहले भी लगातार बदलाव किए जाते रहे हैं। 1920 से 30 के दशक तक 'टाइमलेस क्रिकेट' खेला जाता है और मैच पूरी टीम के आउट होने तक होता था। 1939 में दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के बीच डरबन में खेला गया टेस्ट मैच 10 दिन तक खींच गया था। इस मैच को ड्रॉ पर खत्म कराया गया क्योंकि पर्यटक अपने घर जाने को बेकरार थे और मैच नहीं देखना चाहते थे।
इसी तरह कवर्ड विकेट, अंडर-आर्म बॉलिंग पर रोक और एक ओवर में 8 की जगह 6 गेंद डालने के नियम बनाए जा चुके हैं। पिछले साल पिंक बॉल के साथ दिन-रात का पहला टेस्ट मैच खेला जा चुका है और दर्शकों ने दुधिया रोशनी में इस खेल को देखने में अपनी रुचि दिखाई थी।