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National Youth Day 2022: राहुल द्रविड़ से लेकर विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर तक, विवेकानंद की सीख मानकर सफल हुए ये क्रिकेटर
Wed, 12 Jan 2022 09:10 AM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Wed, 12 Jan 2022 09:10 AM IST
सार
स्वामी विवेकानंद की बातें क्रिकेट के खिलाड़ियों के लिए भी बेहद उपयोगी हैं। उनकी बातों को मानकर भारत के कई दिग्गज खिलाड़ियों ने कमाल किया है। सचिन से लेकर विराट तक कई खिलाड़ियों ने विवेकानंद की कही बातों का अपने जीवन में अनुकरण किया है।
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सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और विराट कोहली ने विवेकानंद की बातों का अनुकरण किया है
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और विराट कोहली ये तीनों खिलाड़ी भारत के सबसे सफल क्रिकेट खिलाड़ियों में से एक हैं। भारत ही बल्कि पूरी दुनिया में इनके बल्ले की गूंज सुनाई देती है। ये तीनों खिलाड़ी अलग-अलग शैली से खेलते हैं और विराट का समय भी सचिन और द्रविड़ के समय से अलग है, लेकिन तीनों खिलाड़ियों की सफलता के पीछे स्वामी विवेकानंद की सीख छिपी हुई है। शायद इन तीनों खिलाड़ियों में से किसी ने भी विवेकानंद का जिक्र न किया हो, लेकिन इनकी दिनचर्या में वो बातें साफ झलकती हैं, जो विवेकानंद ने हर युवा की दी थीं।
विवेकानंद की कही बातों को इन खिलाड़ियों ने अपने जीवन में उतारा और सफलता के नए आयाम हासिल किए। यहां हम यही बता रहे हैं कि कैसे विवेकानंद की सीख सचिन, द्रविड़ और कोहली के चरित्र में दिखाई देती हैं।
उठो जागो और तब तक रुको नहीं जब तक तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते।
विराट कोहली और महेन्द्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ी जब भी लक्ष्य का पीछा करते हैं, ये बात उनकी बल्लेबाजी में साफ दिखाई देती है। लक्ष्य का पीछा करने के दौरान अक्सर विराट ने अपने शतक पूरे किए हैं। कई रिकॉर्ड बनाए हैं, लेकिन इसके बाद वो रुके नहीं। जब तक उनकी टीम ने लक्ष्य हासिल नहीं किया, तब तक विराट और धोनी अपने काम में लगे रहे। विराट के जीवन का एक किस्सा बहुत चर्चित है, जब उनके पिता का निधन होने पर भी कोहली अपनी टीम को हार से बचाने में लगे रहे थे और घरेलू मैच में दिल्ली की टीम को मुश्किल से बाहर निकालने के बाद ही पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे।
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सीखना जीवनपर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है, जब तक जीना, तब तक सीखना है। अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है।
विवेकानंद की यह सीख हर क्रिकेटर के लिए है। हर खिलाड़ी को लगातार सीखना पड़ता है। नई तरह की गेंदें आती हैं, नए गेंदबाज और बल्लेबाज आते हैं। इन सब के हिसाब से सभी को सीखना और खेलना पड़ता है, जो खिलाड़ी सीखना बंद कर देता है, वह खत्म हो जाता है। विराट, सचिन और द्रविड़ जैसे खिलाड़ी इसी वजह से महान बने क्योंकि ये लगातार सीखते रहे। सिर्फ भारत ही नहीं विदेश के खिलाड़ियों ने भी यह मंत्र अपनाया तभी वो लंबे समय तक खेल पाए।
लोग तुम्हारी स्तुति करें या निंदा, लक्ष्य तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहांत आज हो या युग में, तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न हो।
स्वामी विवेकानंद की यह सीख सभी के लिए मददगार है। हर क्रिकेटर को यह बात समझनी बेहद जरूरी है। खासकर खराब फॉर्म की वजह से खिलाड़ियों की खासी निंदा होती है और जो खिलाड़ी इन बातों को तूल देने लगता है, वह कभी वापसी नहीं कर पाता और उसका करियर खत्म हो जाता है। मौजूदा समय में विराट कोहली के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है। खराब फॉर्म के चलते उनकी काफी आलोचना हो रही है, लेकिन वो इन बातों पर ध्यान दिए बगैर अपना खेल पर जोर दे रहे हैं। कुछ समय बाद विराट की फॉर्म भी वापस आएगी और वो फिर से बड़ी पारियां खेलेंगे। वो ईमानदारी से अपना काम करने में लगे हैं।
खुद पर विश्वास रखना सीखो, क्योंकि खुद पर विश्वास रखें बिना जीवन में सफलता संभव नहीं।
हर क्रिकेट खिलाड़ी को अपने जीवन में इस बात पर अमल करना पड़ता है। जब तक किसी खिलाड़ी को खुद पर विश्वास नहीं होता तब तक वह सफल नहीं हो सकता। खासकर कैरियर की शुरुआत में अगर कोई खिलाड़ी खुद पर विश्वास नहीं कर पाता है तो वह नई चुनौतियों से नहीं निपट सकता ऐसे में उसका कैरियर कुछ ही मैच में खत्म हो जाता है। रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी आज सफल क्योंकि उन्होंने खुद पर विश्वास जताया और ओपनिंग करने की चुनौती स्वीकारी। धोनी ने भी शुरुआत में मलिंगा जैसे गेंदबाजों के खिलाफ बड़े शॉट खेले थे और खुद पर भरोसा जताकर ही वो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फिनिशर बने।
किसी भी काम में सफलता के लिए यह जरूरी है कि एक बार में एक ही काम करो और पूरी तरह उसमें डूबकर काम करो।
टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजों के लिए स्वामी विवेकानंद की यह सीख बहुत जरूरी है। राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और अब पुजारा जैसे खिलाड़ी इसके उदाहरण हैं। ये खिलाड़ी एक बार में एक ही बात अपने दिमाग में रखते हैं और सिर्फ उसी पर ध्यान देते हैं। उनकी नजरें स्कोरबोर्ड पर नहीं होती हैं। मैच में छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर उनको हासिल करते जाते हैं और अंत में एक बड़ी पारी खेलकर अपनी टीम को मैच जिता देते हैं। द्रविड़ और सचिन कई बार यह कारनामा कर चुके हैं।
संघर्ष से कभी घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि संघर्ष जितना बड़ा होगा, सफलता उतनी ही बड़ी मिलेगी
हर क्रिकेटर, हर इंसान को अपने जीवन में कभी न कभी संघर्ष करना पड़ता है। सचिन ने भी अपने कैरियर में कई बार संघर्ष किया है। विराट ने भी 2014 में इंग्लैंड दौरे में संघर्ष किया, लेकिन दोनों दिग्गज मुश्किल वक्त से लड़े और लड़कर जीत हासिल की। इसके बाद हजारों रन बनाए और कई कीर्तिमान हासिल किए।
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विवेकानंद की कही बातों को इन खिलाड़ियों ने अपने जीवन में उतारा और सफलता के नए आयाम हासिल किए। यहां हम यही बता रहे हैं कि कैसे विवेकानंद की सीख सचिन, द्रविड़ और कोहली के चरित्र में दिखाई देती हैं।
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उठो जागो और तब तक रुको नहीं जब तक तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते।
विराट कोहली और महेन्द्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ी जब भी लक्ष्य का पीछा करते हैं, ये बात उनकी बल्लेबाजी में साफ दिखाई देती है। लक्ष्य का पीछा करने के दौरान अक्सर विराट ने अपने शतक पूरे किए हैं। कई रिकॉर्ड बनाए हैं, लेकिन इसके बाद वो रुके नहीं। जब तक उनकी टीम ने लक्ष्य हासिल नहीं किया, तब तक विराट और धोनी अपने काम में लगे रहे। विराट के जीवन का एक किस्सा बहुत चर्चित है, जब उनके पिता का निधन होने पर भी कोहली अपनी टीम को हार से बचाने में लगे रहे थे और घरेलू मैच में दिल्ली की टीम को मुश्किल से बाहर निकालने के बाद ही पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे।
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सीखना जीवनपर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है, जब तक जीना, तब तक सीखना है। अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है।
विवेकानंद की यह सीख हर क्रिकेटर के लिए है। हर खिलाड़ी को लगातार सीखना पड़ता है। नई तरह की गेंदें आती हैं, नए गेंदबाज और बल्लेबाज आते हैं। इन सब के हिसाब से सभी को सीखना और खेलना पड़ता है, जो खिलाड़ी सीखना बंद कर देता है, वह खत्म हो जाता है। विराट, सचिन और द्रविड़ जैसे खिलाड़ी इसी वजह से महान बने क्योंकि ये लगातार सीखते रहे। सिर्फ भारत ही नहीं विदेश के खिलाड़ियों ने भी यह मंत्र अपनाया तभी वो लंबे समय तक खेल पाए।
लोग तुम्हारी स्तुति करें या निंदा, लक्ष्य तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहांत आज हो या युग में, तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न हो।
स्वामी विवेकानंद की यह सीख सभी के लिए मददगार है। हर क्रिकेटर को यह बात समझनी बेहद जरूरी है। खासकर खराब फॉर्म की वजह से खिलाड़ियों की खासी निंदा होती है और जो खिलाड़ी इन बातों को तूल देने लगता है, वह कभी वापसी नहीं कर पाता और उसका करियर खत्म हो जाता है। मौजूदा समय में विराट कोहली के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा है। खराब फॉर्म के चलते उनकी काफी आलोचना हो रही है, लेकिन वो इन बातों पर ध्यान दिए बगैर अपना खेल पर जोर दे रहे हैं। कुछ समय बाद विराट की फॉर्म भी वापस आएगी और वो फिर से बड़ी पारियां खेलेंगे। वो ईमानदारी से अपना काम करने में लगे हैं।
खुद पर विश्वास रखना सीखो, क्योंकि खुद पर विश्वास रखें बिना जीवन में सफलता संभव नहीं।
हर क्रिकेट खिलाड़ी को अपने जीवन में इस बात पर अमल करना पड़ता है। जब तक किसी खिलाड़ी को खुद पर विश्वास नहीं होता तब तक वह सफल नहीं हो सकता। खासकर कैरियर की शुरुआत में अगर कोई खिलाड़ी खुद पर विश्वास नहीं कर पाता है तो वह नई चुनौतियों से नहीं निपट सकता ऐसे में उसका कैरियर कुछ ही मैच में खत्म हो जाता है। रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी आज सफल क्योंकि उन्होंने खुद पर विश्वास जताया और ओपनिंग करने की चुनौती स्वीकारी। धोनी ने भी शुरुआत में मलिंगा जैसे गेंदबाजों के खिलाफ बड़े शॉट खेले थे और खुद पर भरोसा जताकर ही वो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फिनिशर बने।
किसी भी काम में सफलता के लिए यह जरूरी है कि एक बार में एक ही काम करो और पूरी तरह उसमें डूबकर काम करो।
टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजों के लिए स्वामी विवेकानंद की यह सीख बहुत जरूरी है। राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और अब पुजारा जैसे खिलाड़ी इसके उदाहरण हैं। ये खिलाड़ी एक बार में एक ही बात अपने दिमाग में रखते हैं और सिर्फ उसी पर ध्यान देते हैं। उनकी नजरें स्कोरबोर्ड पर नहीं होती हैं। मैच में छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर उनको हासिल करते जाते हैं और अंत में एक बड़ी पारी खेलकर अपनी टीम को मैच जिता देते हैं। द्रविड़ और सचिन कई बार यह कारनामा कर चुके हैं।
संघर्ष से कभी घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि संघर्ष जितना बड़ा होगा, सफलता उतनी ही बड़ी मिलेगी
हर क्रिकेटर, हर इंसान को अपने जीवन में कभी न कभी संघर्ष करना पड़ता है। सचिन ने भी अपने कैरियर में कई बार संघर्ष किया है। विराट ने भी 2014 में इंग्लैंड दौरे में संघर्ष किया, लेकिन दोनों दिग्गज मुश्किल वक्त से लड़े और लड़कर जीत हासिल की। इसके बाद हजारों रन बनाए और कई कीर्तिमान हासिल किए।