ICC का परिणाम भी BCCI को नहीं मंजूर, देना होगा टेस्ट
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संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन के कारण जिस प्रतिबंधित गेंदबाज को आईसीसी ने अपनी हरी झंडी दे दी है उसे आईपीएल में खेलने के लिए फिर से टेस्ट देना ही होगा।
दिलचस्प है कि आईसीसी की अगुवाई में हुए टेस्ट के दौरान कैरेबियाई फिरकी गेंदबाज सुनील नारायन ने सफलतापूर्वक अपना टेस्ट पास कर लिया है लेकिन बीसीसीआई को यह परीक्षण स्वीकार्य नहीं है और वह अपने स्तर पर परीक्षण करवाना चाहता है।
बीसीसीआई के अध्यक्ष जगमोहन डालमिया ने बुधवार को यह स्पष्ट कर दिया कि कोलकाता नाइटराइडर्स के फिरकी गेंदबाज सुनील नारायन को खेलने की अनुमति पाने के लिए बोर्ड की ओर से चेन्नई में आयोजित गेंदबाजी एक्शन पर अपना टेस्ट दे सकते है।
1989-90 में रणजी ट्रॉफी जीतने वाली बंगाल टीम की सफलता के 25 वर्ष पूरे होने पर बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के बाद उन्होंने कहा, "मैंने उनसे (केकेआर प्रबंधन) से कह दिया है कि उन्हें फिर से टेस्ट के लिए आना पड़ेगा। हो सकता है कि यह एक बार हो या दो बार।" यह टेस्ट चेन्नई के श्री रामचंद्र यूनिवर्सिटी में होगा।
बीसीसीआई की तकनीकी समिति की बैठक 7 को कोलकाता में होगी। इस दिन आईपीएल का उद्धाटन समारोह होगा।
पिछले साल CLT20 टूर्नामेंट में लगा था बैन
करिश्माई गेंदबाज सुनील नारायन पर पिछले साल भारत में खेले गए चैंपियंस लीग टी-20 टूर्नामेंट में उनकी संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन के कारण बीसीसीआई प्रायोजित किसी भी टूर्नामेंट में गेंदबाजी करने से प्रतिबंधित कर दिया गया था।
गेंदबाजी पर प्रतिबंध के कारण वह चैंपियंस लीग का फाइनल मैच चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ नहीं खेल सके थे। कोलकाता की टीम को इससे बड़ा नुकसान हुआ और टीम 8 विकेट से मुकाबला हार गई। नारायन करिश्माई गेंदबाज होने के साथ-साथ बेहद चतुर गेंदबाज भी माने जाते हैं और अपनी चतुराई भरी गेंदबाजी से बल्लेबाजों को खूब परेशान कर अपनी टीम की जीत का रास्ता बनाते हैं। कोलकाता को आईपीएल चैंपियन बनवाने में नारायन का अहम योगदान रहा है।
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से नारायन को गेंदबाजी के लिए प्रतिबंधित किए जाने के बाद वेस्टइंडीज ने नवंबर में भारत दौरे के लिए घोषित टीम में भी नहीं रखा, साथ ही उन्हें वर्ल्ड कप के लिए टीम शामिल नहीं किया। बाद में उन्होंने अपने एक्शन में काफी सुधार किया और आईसीसी की ओर से आयोजित बॉयोमैकेनिकल टेस्ट को सफलतापूर्वक पास भी कर लिया था।
हालांकि उनके मामले में आईसीसी की ओर से किसी अंतरराष्ट्रीय मैच में उनका परीक्षण नहीं किया गया था। वह जिस टूर्नामेंट में गेंदबाजी के लिए प्रतिबंधित किए गए थे उसका संचालन बीसीसीआई की ओर से किया जाता है। बीसीसीआई नियमों के मुताबिक अगर वह दूसरी बार परीक्षण के लिए बुलाए जाते हैं तो उन पर बीसीसीआई के टूर्नामेंट में खेलने पर बैन लग जाएगा।