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अमित पंघाल: वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर जीतकर रचा इतिहास, किसान पिता के फौजी बेटे की कहानी

Sat, 21 Sep 2019 08:02 PM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: Rajeev Rai Updated Sat, 21 Sep 2019 08:02 PM IST
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Lifestory of Amit Panghal who created history in world boxing championship winning silver medal
अमित पंघाल - फोटो : social media

हरियाणा के लोग अपनी सभ्यता, परंपरा और मेहनत के बीज को कुछ यूं बोते हैं, कि पूरा देश तरक्की से हरा-भरा हो जाता है। खेलों में तो इस राज्य का कोई सानी नहीं। कुश्ती से लेकर निशानेबाज और मुक्केबाजी तक यहां के लाल अपने पसीने को पदकों में बदलने में हमेशा से आगे रहे हैं।

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विदेशी जमीनों पर तिरंगा लहराने के मामले में भी यहां के खिलाड़ी सबसे आगे रहते हैं। रूस के एकातेरिनबर्ग में खेले जा रहे वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में शनिवार को अमित पंघाल ने भी कुछ ऐसा ही कमाल करते हुए इतिहास रच दिया।
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16 अक्टूबर 1995 को हरियाणा के रोहतक जिले में जन्में अमित बॉक्सिंग के इस सबसे बड़े इवेंट में सिल्वर जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष मुक्केबाज बन गए हैं। भारतीय सेना में नायेब सूबेदार अमित को 52 किग्रा फ्लाईवेट कैटेगिरी के फाइनल में उजबेकिस्तान के मुक्केबाज शाखोबिदीन जोइरोव से हार का सामना करना पड़ा बावजूद उन्होंने भारतीय मुक्केबाजी के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया।
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कौन हैं अमित पंघाल और क्या है इनकी संघर्ष की कहानी...

Lifestory of Amit Panghal who created history in world boxing championship winning silver medal
अमित पंघाल - फोटो : ट्विटर

अमित का जन्म हरियाणा में रोहतक जिले के मयाना गांव में हुआ। पिता विजेंदर सिंह पेशे से किसान हैं। घर में बचपन से ही उन्हें मुक्केबाजी का माहौल मिला। बड़े भाई अजय बॉक्सिंग किया करते थे। बताया जाता है कि बड़े भाई अजय ने ही अमित को बॉक्सिंग के लिए प्रेरित किया। बड़े भाई अजय सेना में हैं।

अमित ने भी उनकी सलाह को मानते हुए जी-तोड़ मेहनत की और देश के लिए बेहतरीन प्रदर्शन किया। इस सफलता का पहला श्रेय अमित अपने अग्रज को ही देते हैं। बकौल अमित, 'मेरे बड़े भाई अजय श्रेय के हकदार हैं। वह वास्तव में मेरे लिए सबसे अच्छे कोच हैं। वह हमेशा मेरे लिए रणनीति बनाते और मैं कोशिश करता हूं कि हर मुकाबले से पहले उनसे बात करूं।

अजय खुद एक बेहतरीन मुक्केबाज थे, लेकिन परिवार दोनों भाईयों में से किसी एक ही ट्रेनिंग का खर्च वहन कर सकता था, तब वह अजय ही थे, जिन्होंने सामने आकर अपने छोटे भाई अमित को प्रशिक्षण दिलाने पर जोर दिया।

फर्श से अर्श तक का सफर

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अमित पंघाल - फोटो : social media

अमित पंघाल की सबसे बड़ी उपलब्धि 2017 में आई, जब उन्होंने राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक हासिल किया,  लेकिन प्रसिद्धि मिलनी अभी बाकी थी। 2017 में एशियन चैंपियनशिप का कांस्य पदक जीतते ही वह मीडिया की सुर्खियां बन चुके थे। उस एशियाई चैम्पियनशिप के पदक ने उन्हें विश्व चैंपियनशिप में क्वालीफाई करवा दिया, जहां उन्हें हसनबॉय दुश्मातोव ने क्वार्टरफाइनल में हराया था। उस हार ने पंघाल को और मजबूती से वापसी करने के लिए तैयार किया।

अब मौका था 2018 राष्ट्रमंडल खेल, जहां अमित ने रजत पदक जीता। उसी साल हुए एशियाई खेलों में उन्होंने विश्व चैंपियनशिप की हार का बदला ले लिया। 49 किलोग्राम भारवर्ग में रियो ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट उजबेकिस्तान के दुश्मातोव को धुनते हुए भारत के लिए 14वां गोल्ड हासिल किया।

भारतीय सेना में कार्यरत अमित

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Amit Panghal (File)
भारतीय सेना में नाएब सूबेदार के पद पर तैनात अमित पंघाल ओलंपिक 2020 में भारत के मेडल की बड़ी आस बनकर उभरे हैं। भारतीय मुक्केबाजी में पंघाल के ऊपर चढ़ने का ग्राफ शानदार रहा है जिसकी शुरूआत 2017 एशियाई चैम्पियनशिप में 49 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक से हुई थी। वह इसी साल विश्व चैम्पियनशिप में पदार्पण करते हुए क्वार्टरफाइनल तक पहुंचे थे और फिर उन्होंने बुल्गारिया में प्रतिष्ठित स्ट्रांदजा मेमोरियल में लगातार स्वर्ण पदक हासिल किए और फिर वह 2018 में एशियाई चैम्पियन बने।

पंघाल इकलौते भारतीय मुक्केबाज है जिसने यूरोप के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित प्रतियोगिता स्ट्रांदजा मेमोरियल में लगातार दो बार स्वर्ण पदक हासिल किया। इस साल उन्होंने एशियाई चैम्पियनशिप का स्वर्ण अपने नाम कर किया और फिर 49 किग्रा के ओलंपिक कार्यक्रम से हटने के बाद 52 किग्रा में खेलने का फैसला किया।
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