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Bengaluru Stampede: 'बंगलूरू में भगदड़ के लिए RCB टीम, DNA नेटवर्क और KSCA जिम्मेदार', कर्नाटक सरकार का आरोप

Thu, 17 Jul 2025 02:41 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: स्वप्निल शशांक Updated Thu, 17 Jul 2025 02:41 PM IST
सार

रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि आरसीबी, डीएनए नेटवर्क्स और केएससीए ने मानक प्रक्रियाओं और सुरक्षा उपायों की अनदेखी की, जिसके कारण उल्लंघन और संभावित सार्वजनिक सुरक्षा जोखिम पैदा हुए।

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Karnataka government report blames RCB, DNA Network and KSCA for Bengaluru Chinnaswamy stadium stampede
आरसीबी ने मुआवजे का एलान किया - फोटो : PTI

विस्तार

बंगलूरू के चिन्नास्वामी स्टेडियम में भगदड़ मचने से संबंधित मामले में पेश की गई स्थिति रिपोर्ट में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी), कार्यक्रम के आयोजक मेसर्स डीएनए नेटवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड और कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) पर पूर्व अनुमति के बगैर या शहर के अधिकारियों को अनिवार्य विवरण दिए बिना आरसीबी की विशाल विजय परेड निकालने का आरोप लगाया गया है। इस भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई थी। सरकारी सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौंप दी गई है।
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रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद में आरसीबी और पंजाब किंग्स (पीबीकेएस) के बीच आईपीएल के खिताबी मुकाबले से कुछ घंटे पहले, शाम लगभग 6:30 बजे, डीएनए नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड की ओर से केएससीए ने कब्बन पार्क थाने को एक सूचना पत्र सौंपा। रिपोर्ट के अनुसार, सूचना पत्र में कहा गया, 'अगर आरसीबी टूर्नामेंट में विजयी होती है, तो आरसीबी/डीएनए एंटरटेनमेंट नेटवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड का प्रबंधन एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के आसपास संभावित विजय परेड की योजना बनाना चाहता है, जिसका समापन स्टेडियम में विजय उत्सव के साथ होगा।'
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रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एक सूचना मात्र थी और कानून के तहत अनुमति नहीं मांगी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने, हालांकि अनुमानित भीड़ और कार्यक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी के अभाव में अनुमति देने से इनकार कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रस्ताव भी अल्प सूचना पर प्रस्तुत किया गया था, जिसके कारण उचित कार्यवाही नहीं हो सकी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बावजूद, आरसीबी ने चार जून को एकतरफा कार्यवाही करते हुए, सुबह 7:01 बजे से विभिन्न सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से विधान सौध से चिन्नास्वामी स्टेडियम तक सार्वजनिक ‘विजय परेड’ निकालने की घोषणा कर दी।
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रिपोर्ट के अनुसार, अपराह्न 3:14 बजे अंतिम पोस्ट में घोषणा की गई कि परेड शाम पांच बजे शुरू होगी और उसके बाद स्टेडियम में समारोह आयोजित किया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस पोस्ट में यह बताया गया था कि नि:शुल्क पास ऑनलाइन उपलब्ध हैं, हालांकि इस पोस्ट से पहले ही भारी संख्या में लोग जमा होने शुरू हो गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न सोशल मीडिया पोस्ट को लाखों लोगों ने देखा। रिपोर्ट के मुताबिक, बीएमआरसीएल के यात्रियों से संबंधित आंकड़ों से भीड़ जुटने की बात साबित होती है।

रिपोर्ट में बंगलूरू मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएमआरसीएल) के आंकड़ों के हवाले से कहा गया है कि चार जून को 9.66 लाख यात्रियों ने मेट्रो से सफर किया, जबकि आमतौर पर रोजाना यह संख्या छह लाख रहती है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इसलिए, चार जून को पैदल यात्रा करने वाले, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाले और निजी साधनों के उपयोगकर्ताओं को मिलाकर, अनुमानित संख्या तीन लाख से अधिक हो गई।’ रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि आयोजकों ने कानून के अनुसार कभी भी औपचारिक रूप से पुलिस से अनुमति नहीं मांगी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विशेष रूप से मध्य बंगलूरू में बड़े सार्वजनिक समारोहों वाले आयोजनों के लिए केवल सूचना देना अनुमति मांगने के समान नहीं है।

अधिकारियों ने दावा किया कि प्रतिभागियों की संख्या, सभा स्थल, समय, जिम्मेदार आयोजकों के नाम और संपर्क विवरण, और यातायात एवं भीड़ नियंत्रण की योजना जैसी आवश्यक जानकारी पूरी तरह से गायब थी। इस जानकारी के अभाव के कारण पुलिस कार्यक्रम के पैमाने का आकलन करने या पर्याप्त सुरक्षा उपाय करने में असमर्थ रही। इसके अलावा, सार्वजनिक निर्देशों के लिए कोई साइनेज या लाउडस्पीकर नहीं थे, प्रवेश द्वारों और बैठने की जगहों पर भीड़ प्रबंधन के लिए कोई प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं थे, और लाउडस्पीकर के उपयोग या पुलिस बंदोबस्त के लिए कोई पूर्व अनुरोध नहीं किया गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आयोजक 22 मई, 2019 के सरकारी आदेश के अनुसार पुलिस तैनाती का खर्च भी नहीं उठा पाए। समन्वय या अनुमोदन के अभाव के बावजूद, बंगलूरू सिटी पुलिस ने जमीनी स्तर पर स्थिति को संभालने के लिए कई उपाय लागू किए। चार जून को सुबह 10 बजे संयुक्त पुलिस आयुक्त के कार्यालय में एक बैठक बुलाई गई, जहां यातायात और कानून प्रवर्तन योजना को अंतिम रूप दिया गया। कुल 654 यातायात कर्मियों को तैनात किया गया, जिनमें 4 डीसीपी, 6 एसीपी, 23 पीआई, 57 पीएसआई, 104 एएसआई और 462 कांस्टेबल शामिल थे।

आरसीबी टीम द्वारा एचएएल से ताज वेस्ट एंड, विधान सौधा और अंत में चिन्नास्वामी स्टेडियम तक लिए गए मार्ग को व्यवधान को कम करने के लिए नियंत्रित किया गया था। प्रेस, सोशल मीडिया और एफएम रेडियो के माध्यम से एक यातायात सलाह और मानचित्र जारी किया गया, जिसमें जनता को सीमित पार्किंग के कारण केंद्रीय क्षेत्रों से बचने और मेट्रो या अन्य सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की सलाह दी गई। एहतियात के तौर पर नौ डायवर्जन पॉइंट बनाए गए और 125 बैरिकेड्स लगाए गए, साथ ही 11 अतिरिक्त बैरिकेडिंग जोन भी बनाए गए। स्थानीय स्कूलों को दोपहर तक बंद करने का अनुरोध किया गया।

बीएमटीसी ने अपनी सारथी टीमों को तैनात किया और एम्बुलेंस प्रबंधन के लिए ई-पथ ऐप को सक्रिय किया गया। एक समर्पित नियंत्रण कक्ष ने पूरे आयोजन के दौरान यातायात की गतिविधियों पर नजर रखी। आठ प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई जहाँ जनता के नियमन और प्रबंधन के लिए पुलिसकर्मी तैनात किए गए। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि आरसीबी, डीएनए नेटवर्क्स और केएससीए ने मानक प्रक्रियाओं और सुरक्षा उपायों की अनदेखी की, जिसके कारण उल्लंघन और संभावित सार्वजनिक सुरक्षा जोखिम पैदा हुए।


समय से पहले अनुमति प्राप्त करने और अधिकारियों के साथ समन्वय करने में उनकी विफलता के कारण नगर प्रशासन के पास उस आयोजन पर प्रतिक्रियात्मक प्रतिक्रिया देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा, जो पहले ही सोशल मीडिया पर लोगों के बीच जागरूकता के कारण गति पकड़ चुका था। रिपोर्ट में कहा गया है, 'कानून प्रवर्तन पदानुक्रम में जवाबदेही की आवश्यकता को समझते हुए, सरकार ने 5 जून, 2025 को पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की। एक सरकारी आदेश के तहत पांच पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया, जिनमें तीन महत्वपूर्ण पदों के आईपीएस अधिकारी शामिल हैं।
 
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