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डालमिया को मिला नया नाम, बने 'किंग ऑफ कमबैक्स'

Mon, 03 Jun 2013 04:37 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 03 Jun 2013 04:37 PM IST
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jagmohan dalmiya became king of comebacks
एक समय दुनिया के बेहतरीन खेल प्रशासकों में शुमार होने वाले जगमोहन डालमिया फिर से सुर्खियों में हैं और अब लोग उन्हें एक नए नाम 'किंग ऑफ कमबैक्स' के रूप में पुकाराने लगे हैं।
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भारतीय क्रिकेट के मैकेयावैली कहे जाने वाले डालमिया रविवार को चेन्नई में चली जोरदार बहस के बाद बीसीसीआई के अंतरिम अध्यक्ष चुने गए। उन्हें बीसीसीआई के शीर्ष पद पर दूसरी बार पहुंचने का मौका तब मिला जब अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने इस्तीफा देने से इंकार कर दिया।
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73 साल के कोलकातावासी और उद्योगपति डालमिया एक बार फिर बीसीसीआई के मुखिया बनाए गए हैं। हालांकि इस बार उनकी ताजपोशी ऐसे समय हुई है जब बोर्ड स्पॉट फिक्सिंग जैसे बदनुमा दाग से पीड़ित है और क्रिकेटप्रशंसकों के बीच क्रिकेट की गरिमा गिरी है।
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डालमिया को बीबीसी ने 1996 में दुनिया के छह शीर्ष खेल प्रशासकों में शुमार किया था।

90 के दशक से शुरू हुआ डालमिया राज

डालमिया 1979 में बीसीसीआई से जुड़े और वह 1983 में कोषाध्यक्ष बने। इसके बाद वह धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत करते हुए शीर्ष पद तक पहुंच गए। बीसीसीआई में डालमिया राज 90 के दशक से शुरू होता है जो 2005 तक कायम रहा। डालमिया का भी व्यवहार श्रीनिवासन की तरह ही रहा और कई मौकों पर नियम-कायदों में बदलाव कराए। बीसीसीआई के अलावा वह बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन (कैब) से भी जुड़े रहे और उसके अध्यक्ष पद को सुशोभित किया।


आईसीसी के भी बने बॉस
बीसीसीआई में अपनी स्थिति मजबूत करने के बाद वह 1997 में आईसीसी के अध्यक्ष बने। और आईसीसी को पैसे कमाने के ढेरों तरीके भी सिखाए। हालांकि उनमें से कुछ विवादित भी रहे। आईसीसी के अध्यक्ष पद पर पहुंचकर उन्होंने पश्चिमी जगत का वर्चस्व भी तोड़ा। तीन साल बाद 2000 में उनका कार्यकाल खत्म हुआ और वह उसके एक साल बाद बीसीसीआई के बॉस बन गए।


डालमिया राज का पतन
भले ही डालमिया ने भारतीय क्रिकेट को बुलंदियों तक पहुंचाया हो लेकिन उनके प्रतिद्वंद्वीयों को उनकी लोकप्रियता और बढ़ती ताकत नागवार गुजरी। विपक्षी गुट ने उन्हें हटाने की कई कोशिशें की। 2004 में अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में उनके खिलाफ दिग्गज राजनीतिक हस्ती शरद पवार खड़े थे। डालमिया के पास बोर्ड सदस्य और कैब के प्रतिनिधि के तौर पर दो वोट देने का अधिकार था। साथ ही अगर परिणाम टाई होता है तो निर्णायक मत देने का अधिकार बतौर अध्यक्ष के पास था। चुनाव के दौरान जब मत बराबर हो गए तो उन्होंने निर्णायक मत देकर अपने उम्मीदवार रणवीर सिंह को विजयी घोषित कर दिया। लेकिन पवार गुट ने एक साल बाद ही जबर्दस्त पलटवार करते हुए डालमिया को हटा दिया और उनकी जगह शरद पवार अध्यक्ष बन गए। पवार ने अध्यक्ष बनते ही डालमिया को न सिर्फ बीसीसीआई से निलंबित कर दिया बल्कि उन पर 1996 विश्व कप में मेजबानी के दौरान पैसों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाकर केस भी दर्ज करा दिया।


कैब से भी निकाले गए डालमिया
बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन (कैब) जहां उनकी हमेशा तूती बोलती थी वहां से भी उनके बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। कैब से बाहर किए जाने के बाद लगने लगा कि उनका समय खत्म हो गया है। विश्व की शीर्ष क्रिकेट नियामक संस्था आईसीसी के अध्यक्ष्ा रहे डालमिया का स्वर्णिम युग खत्म हो गया है। डालमिया के लाडले रहे सौरव गांगुली तक उनके खिलाफ हो गए। डालमिया ने ही गांगुली को भारतीय टीम का कप्तान बनाया था और उनकी हर मांग पूरी की।
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