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आसान नहीं है मकोका के तर्क को सही ठहराना
नई दिल्ली/विजय सिंघल
Updated Wed, 05 Jun 2013 02:04 AM IST
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पुलिस ने भले ही श्रीसंत, अजीत चंदीला और अंकित चव्हाण समेत 26 अभियुक्तों पर मकोका लगा दिया हो, लेकिन उसे बहाल रखना पुलिस के लिए काफी मुश्किल होगा।
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हां, इतना जरूर है कि अभियुक्तों की राह में भी कांटे बिछ गए हैं।
जानिए मकोका के बारे में, क्या है मकोका?
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दिल्ली पुलिस ने मकोका लगाने केजो तर्क दिए हैं, उसे साबित करना टेढ़ी खीर होगा। पुलिस के अनुसार, बुकी अश्वनी अग्रवाल दाऊद गिरोह के संपर्क में था।
लेकिन पुलिस ने अदालत में ऐसा नहीं भी बताया कि अन्य अभियुक्तों को इस तथ्य की जानकारी थी या नहीं कि फिक्सिंग में दाऊद लिप्त है या नहीं।
कानून के जानकारों का मानना है कि पुलिस को यह साबित करना होगा कि आरोपी इस तथ्य से अवगत थे कि फिक्सिंग में जो पैसा मिल रहा है, वह डी कंपनी या उसके इशारे पर दिया जा रहा है।
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अश्वनी अग्रवाल के संपर्क पर सभी को दाऊद का साथी या फिर गिरोह का सदस्य करार नहीं दिया जा सकता।
पुलिस ने पहले सभी के खिलाफ मात्र आपराधिक षड्यंत्र व धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था लेकिन बाद में धारा 409 (अमानत में खयानत) जोड़ कर सभी की मुश्किलें बढ़ा दी। अब मकोका परेशानी और बढ़ गई है।
मकोका लगने के बाद अभियुक्तों की जमानत के आसार खत्म हो गए हैं। अब उन्हें ट्रायल कोर्ट में सुनवाई पूरी होने का इंतजार करना पड़ेगा या फिर वे हाईकोर्ट में मकोका को चुनौती दे सकते हैं।
हाईकोर्ट सभी की अलग-अलग भूमिका का अध्ययन करने के बाद उन्हें राहत प्रदान कर सकता है।
हाल ही में पुलिस कुख्यात अपराधी मुन्ना बजरंगी मामले में मुंह की खा चुकी है, क्योंकि अदालत ने उस पर लगाए गए मकोका को गैरकानूनी ठहरा दिया था।
वहीं, क्रिकेटरों की मुश्किलें इस आधार पर भी बढ़ गई हैं कि जांच एजेंसी को आरोपपत्र दायर करने के लिए छह माह का समय मिल गया है।
खिलाड़ियों को क्या परेशानी होगी
इस कानून के लागू होने के बाद जांच एजेंसी को आरोपपत्र दायर करने के लिए छह माह का समय मिल जाता है। इसके अलावा ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान वे जमानत के हकदार नहीं होंगे।
ट्रायल कोर्ट तय करेगी कि उनके खिलाफ मकोका में अपराध बनता है या नहीं। यह प्रक्रिया काफी लंबी है। इसके अलावा अभियुक्तों के पास हाईकोर्ट में पुलिस के निर्णय को चुनौती देने का विकल्प है।
टिंकू व रमेश के प्रोडक्शन वारंट जारी
अदालत ने अश्वनी अग्रवाल उर्फ टिंकू और रमेश व्यास के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी किए हैं। अदालत ने मुंबई पुलिस को दोनों को 10 जून को दिल्ली अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है।
पुलिस ने अदालत के समक्ष आवेदन दायर कर बताया कि टिंकू को मुंबई पुलिस दिल्ली से ले गई थी, जबकि रमेश को मुंबई से गिरफ्तार किया गया था। जांच में पता चला है कि दोनों भी डी-कंपनी के संपर्क में रहे हैं। दोनों से अभी पूछताछ करनी है, अत: उनके खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी किए जाए।
अंकित को छह को करना है समर्पण
इसी मामले में अंकित चव्हाण को अदालत ने हाल ही में विवाह के लिए अंतरिम जमानत प्रदान की थी। उसे अदालत के निर्देशानुसार छह जून को समर्पण करना है।
बचाव पक्ष ने जताई आपत्ति
श्रीसंत समेत सभी अभियुक्तों के अधिवक्ता ने मकोका लगाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मकोका में सबसे पहले यह साबित करना जरूरी है कि जो क्राइम है, वह संगठित अपराध की श्रेणी में आता है, जबकि इस मामले में ऐसा नहीं है।
वहीं, ऐसा जरूरी है कि 10 वर्ष में कम से कम चार बार उस आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया हो, जिसके खिलाफ मकोका लगाया जा रहा है।
इसके अलावा मकोका उसके खिलाफ लगाया जा सकता है, जिस अपराध में कम से कम तीन वर्ष या उससे ज्यादा की सजा का प्रावधान है, जबकि फिक्सिंग मामले में ज्यादा से ज्यादा 3 से 4 माह तक की ही सजा का प्रावधान है।
हालांकि, विशेष पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने बताया कि खिलाड़ियों को अंडरवर्ल्ड के बारे में पूरी जानकारी थी। क्रिकेटरों के अलावा अन्य खिलाड़ियों को यह जानकारी थी कि स्पॉट फिक्सिंग की जो रकम वे ले रहे हैं, वह अंडरवर्ल्ड से भिजवाई जा रही है।
खिलाड़ियों को यह भी पता था कि रकम हवाला के जरिए दुबई व पाकिस्तान से आ रही है। विशेष पुलिस आयुक्त ने दावा किया है कि दिल्ली पुलिस के पास मकोका लगाने के लिए पर्याप्त सबूत व साक्ष्य हैं।
दिल्ली पुलिस ने स्पॉट फिक्सिंग के आरोपियों के खिलाफ मकोका लगाने की प्रकिया करीब एक सप्ताह पहले शुरू कर दी थी। मकोका लगाने के बाद छह माह में चार्जशीट दाखिल होती है। ऐसे में पुलिस के पास छह माह का समय है।