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IPL spot fixing: किस कानून में लिखा कि शर्त लगाना है अपराध?
अमर उजाला/दिल्ली
Updated Mon, 20 Apr 2015 10:59 PM IST
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आईपीएल-6 स्पॉट फिक्सिंग मामले में पुलिस की जांच पर कोर्ट ने सोमवार को बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। कोर्ट ने पुलिस की मैच फिक्सिंग थ्योरी पर सवाल उठाते हुए कहा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे लगे आरोपियों ने मैच फिक्स किए थे। मामले की अगली सुनवाई को कोर्ट ने 8 मई की तारीख तय की है।
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पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नीना कृष्णा बंसल ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा आरोपियों के बीच टेलीफोन पर हुई जिस बातचीत का हवाला दे रही है उससे नहीं लगता इस मामले में मैच फिक्सिंग हुई थी। इस बातचीत में केवल शर्त का जिक्र है। इसमें कहीं भी मैच फिक्सिंग का जिक्र नहीं है।
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अदालत ने मामले में आरोप निर्धारण पर दलीलें सुनते हुए कहा कि विशेष लोक अभियोजक राजीव मोहन से पूछा कि क्या शर्त लगाना अपराध है? इसके जवाब में राजीव मोहन ने कहा कि शर्त लगाना गैरकानूनी है लेकिन अपराध नहीं है।
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अदालत ने पूछा कानून के किस प्रावधान के तहत शर्त लगाना गैरकानूनी है। किस आपराधिक कानून में शर्त लगाना गैरकानूनी है?
इसके जवाब में राजीव मोहन ने कहा कि शर्त लगाना आपराधिक कानून नहीं बल्कि दीवानी कानून में गैरकानूनी है।
मामले में आरोपों पर विशेष अधिवक्ता राजीव मोहन ने टेलीफोन पर बातचीत का हवाला देते हुए कहा आरोपी मैच फिक्सिंग व शर्त लगाने में शामिल थे। उन्होंने कहा कि कॉल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) से साफ है कि गिरफ्तार आरोपी पैसा कमाने के लिए आपराधिक सिंडीकेट का हिस्सा थे।
अदालत ने अभियोजन की इस दलील पर कहा कि जो आप कह रहे है वह सौ फीसदी सही है लेकिन इसे साबित करने के लिए साक्ष्य कहां है?