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न शोर न शराबा बैक डोर से हुई टीमों की एंट्री
नई दिल्ली/हेमंत रस्तोगी
Updated Sat, 05 Jan 2013 12:47 AM IST
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यह मंजर पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए ही नहीं बल्कि सुरक्षा कर्मियों को भी हैरान करने वाला था। भारत और पाकिस्तान की टीमें होटल में प्रवेश कर रही थीं लेकिन हर दो कदम पर खड़े सुरक्षा कर्मियों और इक्का-दुक्का लोगों को छोड़ कोई नहीं था। न कोई अपने चहेते खिलाड़ियों का दीदार करने वाला था और न ही एक दूसरे पर टूट पड़ने वाली स्थिति। हां, सुरक्षा कर्मियों ने अपनी ड्यूटी जिम्मेदारी से निभाई। दोनों टीमों को मुख्य गेट के स्थान पर होटल के साइड से प्रवेश कराया गया।
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पहले पाकिस्तानी टीम ने होटल के पिछले दरवाजे से प्रवेश किया उसके दस मिनट बाद भारतीय टीम होटल के अंदर दाखिल हो गई। इस नजारे के लिए जहां सुरक्षा कर्मियों ने राहत की सांस ली इसके ठीक उलट हलचल फिरोजशाह कोटला में थी। जावेद मियांदाद के आगमन को लेकर आयोजक ज्यादा ही परेशान थे।
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लेकिन डीडीसीए उपाध्यक्ष चेतन चौहान ने साफ कर दिया जावेद को कोई विशेष सुरक्षा मुहैया नहीं कराई जाएगी। ड्रेसिंग रूम के नीचे वाले बे एरिया में जहां दूसरे पाकिस्तानी अतिविशिष्ट व्यक्तियों को बिठाया जाना है, वहीं जावेद बैठेंगे। लेकिन जैसे ही खबर आई कि जावेद नहीं आ रहे हैं आयोजकों के चेहरे पर राहत साफ देखी जा सकती थी।
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चेतन चौहान के मुताबिक यहां आने वाले सौ अति विशिष्ट व्यक्तियों में पाकिस्तानी ग्रेट हनीफ मुहम्मद सपत्नीक उनके भाई मुश्ताक मुहम्मद, सादिक मुहम्मद के अलावा वजीर अली, इंतखाब आलम, वसीम बारी पूर्व टेस्ट क्रिकेटर हैं। इनके अलावा पाकिस्तानी बोर्ड के ऑफिशियल्स व उनके परिजन इस जत्थे में शामिल हैं।
हनीफ के लिए फिरोजशाह कोटला का दौरा यादगार रहेगा। यह वही मैदान है जहां से उन्होंने 1952 में भारत के खिलाफ अपने टेस्ट कैरियर की शुरूआत की थी। पारी की शुरूआत करते हुए उन्होंने अपनी पहली ही टेस्ट पारी में जुझारू 51 रनों की पारी खेली थी। इसके बाद वह यहां 1960 में एक और टेस्ट खेले। देर शाम पाकिस्तान दूतावास के आमंत्रण पर पाकिस्तानी टीम डिनर पर शामिल हुई।