पहले बल्लेबाजी से इंडिया इतिहास बदल सकेगी!
वर्ल्ड कप में पाकिस्तान पर लगातार जीत का रिकॉर्ड बनाने वाली टीम इंडिया के सामने अब एक बेहद खराब रिकॉर्ड को खत्म करने की चुनौती है।
यह अजीब सा संयोग है कि 2 बार वर्ल्ड कप खिताब जीतने वाली टीम इंडिया जहां पाकिस्तान को टूर्नामेंट के इतिहास में रिकॉर्ड 6 बार हरा चुकी है वहीं उसे एक ऐसी टीम से आज तक एक भी जीत नसीब नहीं हुई जो कभी फाइनल में भी नहीं पहुंच सकी। हम यहां बात कर रहे हैं दक्षिण अफ्रीका की, जिसने वर्ल्ड कप में टीम इंडिया को हर बार हराया है। दोनों के बीच क्रिकेट के इस महाकुंभ में अब तक 3 बार भिड़ंत हुई है और तीनों ही बार भारत हारा है।
महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में टीम इंडिया इस बार 23 साल से चले आ रहे दक्षिण अफ्रीका के हाथों हार के सिलसिले को तोड़ने की पूरी योजना बना रही है। आखिरी बार दक्षिण अफ्रीका ने टीम इंडिया को 2011 के वर्ल्ड कप में नागपुर में हराया था। पिछली बार धोनी की टीम में अनुभवी खिलाड़ियों की पूरी जमात थी लेकिन इस बार युवाओं की भरमार है और उन्हीं पर इस चुनौती का सामना करने का पूरा दारोमदार है।
मेलबर्न में होने वाले इस मुकाबले में खिलाड़ियों के अलावा एक और चीज है जिसकी भूमिका बेहद खास होगी और वह भी टीम इंडिया के लिए। हम यहां बात कर रहे हैं टॉस को लेकर। भारत को हार का सिलसिला तोड़ने के लिए इस मैच में लक्ष्य का पीछा करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।
लगातार चौथी बार पहले बल्लेबाजी में बदलेगा इतिहास!
मेलबर्न में भारत और दक्षिण अफ्रीका की टीमें रविवार की सुबह आमने-सामने है। वर्ल्ड कप में दोनों के बीच यह चौथी भिडंत है और इस मैच में भी भारत के लिए टॉस बेहद अहम होने वाला है। टॉस जीतने की सूरत में भारत के पास यह अधिकार होगा कि वह तय कर सके कि पहले बल्लेबाजी की जाए या गेंदबाजी।
कप्तान धोनी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया है। शुरुआत में यह फैसला सही भी माना जा रहा है। हालांकि वर्ल्ड कप इतिहास में भारत दक्षिण अफ्रीका से खेले सभी तीनों मैच हार चुका है और तीनों ही बार उसने पहले बल्लेबाजी की थी। ऐसे में माना जा रहा था कि धोनी इतिहास बदलने के क्रम में पहला कदम टॉस जीतने की सूरत में पहले क्षेत्ररक्षण करने का फैसला लेंगे, लेकिन पिच को देखते हुए बल्लेबाजी का फैसला लिया।
आइए, देखते हैं पिछले खेले गए तीनों मैचों में क्या हुआ था।
वर्ल्ड कप में खेले गए पिछले तीनों मुकाबलों में भारत ने पहले बल्लेबाजी की थी। 1992 के वर्ल्ड कप मैच में भारत टॉस हारा तो उसे पहले बल्लेबाजी करने को कहा गया, फिर इसके बाद 1999 (होव) और 2011 (नागपुर) के वर्ल्ड कप में भारत टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला ले लिया। लेकिन तीनों ही मैचों में उसे क्रमशः 6 विकेट, 4 विकेट और 3 विकेट से हार का सामना करना पड़ा।
इस लिहाज से देखा जाए तो भारत को इस बार के मुकाबले में लक्ष्य का पीछा करना ही फायदेमंद साबित हो सकता है। पिछले 3 मौकों पर उसने अफ्रीकी टीम को टॉरगेट दिया लेकिन गेंदबाज मैच जीता नहीं सके। गेंदबाजों की लगातार नाकामी के बाद इस बार बल्लेबाजों को जीत दिलाने का मौका दिया जाना चाहिए। वैसे भी पिछले कुछ सालों में टीम इंडिया ने लक्ष्य का पीछा करते हुए जीत हासिल की है, जिसमें कुछ तो 300 से ज्यादा के लक्ष्य भी शामिल हैं।
अब पूरा दारोमदार भारतीय बल्लेबाजों पर है जिन्हें बड़ा स्कोर खड़ा करना होगा और इसके बाद गेंदबाज को उस लक्ष्य का बचाना होगा। ऐसे में वर्ल्ड कप में अफ्रीकी टीम के खिलाफ लगातार चौथी बार पहले बल्लेबाजी कर पहली जीत का स्वाद भारत आज जरूर चखना चाहेगा।