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IND vs SA: गाबा के बाद सेंचुरियन भी फतह करने की तैयारी, 26 में से सिर्फ दो टेस्ट हारी है दक्षिण अफ्रीकी टीम
Sun, 26 Dec 2021 11:57 AM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, सेंचूरियन
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, सेंचूरियन
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Sun, 26 Dec 2021 11:57 AM IST
सार
गाबा में ऑस्ट्रेलिया का घमंड तोड़ने के बाद भारतीय टीम सेंचूरियन में अफ्रीका को भी हराने के इरादे से उतरेगी। यह मैदान अफ्रीकी टीम का गढ़ माना जाता है। प्रोटेस टीम ने यहां 26 मैच खेले हैं और दो मैच गंवाए हैं।
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गाबा के बाद सेंचूरियन में भी भारत जीत हासिल करना चाहेगा
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारतीय टीम का अफ्रीका दौरा बॉक्सिंग डे टेस्ट के साथ शुरू हो रहा है। इस दौरे में भारत के सामने कई चुनौतियां हैं। लंबे समय तक विवादों में रहने के बाद कप्तान कोहली और बाकी खिलाड़ियों के सामने अच्छे प्रदर्शन की चुनौती है। वहीं अफ्रीका में भारत का रिकॉर्ड बहुत ही खराब है। टीम इंडिया यहां अब तक सिर्फ तीन टेस्ट मैच ही जीत पाई है। टेस्ट सीरीज का पहला मैच सेचूरियन के मैदान पर खेला जाएगा। जहां अफ्रीका का रिकॉर्ड बेहद शानदार है। अफ्रीकी टीम ने यहां 26 मैच खेले हैं और सिर्फ दो मैच में उसे हार का सामना करना पड़ा है।
सेचूरियन के मैदान में सिर्फ ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की टीम ही अफ्रीका को हरा पाई हैं। अफ्रीकी टीम यहां आखिरी मैच साल 2000 में हारी थी। इसके बाद हुए चार मैचों में अफ्रीका ने तीन जीत हैं, जबकि एक मैच ड्रा रहा है। वहीं भारतीय टीम यहां दो मैच खेली और दोनों में उसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। पहला मैच भारत 2010 में पारी और 25 रन से हारा था, जबकी 2018 में हुए दूसरे मैच में टीम इंडिया को 135 रन से हार झेलनी पड़ी थी।
सेंचूरियन में 80 फीसदी मैच जीता है अफ्रीका
सेंचूरियन के मैदान में अफ्रीका का रिकॉर्ड बेहतरीन है और एक ही मैदान में सबसे ज्यादा टेस्ट जीतने के मामले में अफ्रीकी टीम दूसरे नंबर पर है। पाकिस्तान ने कराची में 43 में ले 23 मैच जीते हैं और इस सूची में पहले नंबर पर है, लेकिन वहां पाकिस्तान का जीत प्रतिशत 53.49 का है, जबकि सेंचूरियन में अफ्रीका ने 80.77 फीसदी मैच जीते हैं। वहीं इंग्लैंड ने क्राइस्टचर्च में 15 में से आठ और भारत ने मोहाली में 13 में से सात मैच जीते हैं। इंग्लैंड डरबन में 16 में से छह मैच जीता है।
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वहीं जीत और हार का प्रतिशत देखा जाए तो कराची में पाकिस्तान का जीत और हार का प्रतिशत 11.5 का है, जबकि सेंचूरियन में अफ्रीका का जीत और हार का प्रतिशत 10.5 का है। हालांकि कराची में पाकिस्तान ने 43 में से 18 मैच ड्रॉ खेले हैं, लेकिन सेंचूरियन में अफ्रीका ने 26 में से सिर्फ तीन मैच ड्रॉ किए हैं। इस मैदान में भारत के लिए मैच बचाना भी मुश्किल होगा। ऐसे में कोहली की टीम ड्रॉ की बजाय जीत हासिल करने की कोशिश करेगी।
अफ्रीका टीम की खराब फॉर्म का फायदा उठाना चाहेगा भारत
अफ्रीका की टीम अपने घर में पिछले आठ में से पांच टेस्ट मैच हारी है। ऐसे में भारत भी इस टीम के खराब फॉर्म का फायदा उठाकर जीत हासिल करना चाहेगा। टीम इंडिया चाहेगी कि अफ्रीका को हराकर पहली बार यहां टेस्ट सीरीज जीती जाए। हालांकि सेंचूरियन में अफ्रीका का रिकॉर्ड कमाल का है। यहां अफ्रीकी टीम ने 26 मैच खेले हैं और 21 में जीत हासिल की है। इस दौरान सिर्फ दो मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा है। 2000 में अफ्रीका और इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी बिना कोई गेंद खेले घोषित कर दी थी और मैच का नतीजा निकालने के लिए सिर्फ एक पारी का मैच हुआ था। इस मैच में इंग्लैंड ने दो विकेट से जीत हासिल की थी। यह आखिरी मौका था, जब अफ्रीका इस मैदान में हारा था।
गाबा में तोड़ा ऑस्ट्रेलिया का घमंड
गाबा के मैदान में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को तीन विकेट से हराकर उसका घमंड चूर-चूर किया था। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया इस मैदान में 1988 में हारा था, जब वेस्टइंडीज ने उसे मात दी थी। इसके बाद से ऑस्ट्रेलिया ने हर टीम को गाबा के मैदान में हराया था। 1988 के बाद ऑस्ट्रेलिया ने इस मैदान में 31 टेस्टे खेले थे और 24 में जीत हासिल की थी, जबकि सात मैच ड्रॉ हुए थे। इसके बाद भारत की कमजोर टीम ने ही ऑस्ट्रेलिया को हराया था, जिसमें विराट, बुमराह, शमी और अश्विन जैसे दिग्गज खिलाड़ी नहीं थे।
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सेचूरियन के मैदान में सिर्फ ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की टीम ही अफ्रीका को हरा पाई हैं। अफ्रीकी टीम यहां आखिरी मैच साल 2000 में हारी थी। इसके बाद हुए चार मैचों में अफ्रीका ने तीन जीत हैं, जबकि एक मैच ड्रा रहा है। वहीं भारतीय टीम यहां दो मैच खेली और दोनों में उसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। पहला मैच भारत 2010 में पारी और 25 रन से हारा था, जबकी 2018 में हुए दूसरे मैच में टीम इंडिया को 135 रन से हार झेलनी पड़ी थी।
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सेंचूरियन में 80 फीसदी मैच जीता है अफ्रीका
सेंचूरियन के मैदान में अफ्रीका का रिकॉर्ड बेहतरीन है और एक ही मैदान में सबसे ज्यादा टेस्ट जीतने के मामले में अफ्रीकी टीम दूसरे नंबर पर है। पाकिस्तान ने कराची में 43 में ले 23 मैच जीते हैं और इस सूची में पहले नंबर पर है, लेकिन वहां पाकिस्तान का जीत प्रतिशत 53.49 का है, जबकि सेंचूरियन में अफ्रीका ने 80.77 फीसदी मैच जीते हैं। वहीं इंग्लैंड ने क्राइस्टचर्च में 15 में से आठ और भारत ने मोहाली में 13 में से सात मैच जीते हैं। इंग्लैंड डरबन में 16 में से छह मैच जीता है।
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वहीं जीत और हार का प्रतिशत देखा जाए तो कराची में पाकिस्तान का जीत और हार का प्रतिशत 11.5 का है, जबकि सेंचूरियन में अफ्रीका का जीत और हार का प्रतिशत 10.5 का है। हालांकि कराची में पाकिस्तान ने 43 में से 18 मैच ड्रॉ खेले हैं, लेकिन सेंचूरियन में अफ्रीका ने 26 में से सिर्फ तीन मैच ड्रॉ किए हैं। इस मैदान में भारत के लिए मैच बचाना भी मुश्किल होगा। ऐसे में कोहली की टीम ड्रॉ की बजाय जीत हासिल करने की कोशिश करेगी।
अफ्रीका टीम की खराब फॉर्म का फायदा उठाना चाहेगा भारत
अफ्रीका की टीम अपने घर में पिछले आठ में से पांच टेस्ट मैच हारी है। ऐसे में भारत भी इस टीम के खराब फॉर्म का फायदा उठाकर जीत हासिल करना चाहेगा। टीम इंडिया चाहेगी कि अफ्रीका को हराकर पहली बार यहां टेस्ट सीरीज जीती जाए। हालांकि सेंचूरियन में अफ्रीका का रिकॉर्ड कमाल का है। यहां अफ्रीकी टीम ने 26 मैच खेले हैं और 21 में जीत हासिल की है। इस दौरान सिर्फ दो मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा है। 2000 में अफ्रीका और इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी बिना कोई गेंद खेले घोषित कर दी थी और मैच का नतीजा निकालने के लिए सिर्फ एक पारी का मैच हुआ था। इस मैच में इंग्लैंड ने दो विकेट से जीत हासिल की थी। यह आखिरी मौका था, जब अफ्रीका इस मैदान में हारा था।
गाबा में तोड़ा ऑस्ट्रेलिया का घमंड
गाबा के मैदान में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को तीन विकेट से हराकर उसका घमंड चूर-चूर किया था। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया इस मैदान में 1988 में हारा था, जब वेस्टइंडीज ने उसे मात दी थी। इसके बाद से ऑस्ट्रेलिया ने हर टीम को गाबा के मैदान में हराया था। 1988 के बाद ऑस्ट्रेलिया ने इस मैदान में 31 टेस्टे खेले थे और 24 में जीत हासिल की थी, जबकि सात मैच ड्रॉ हुए थे। इसके बाद भारत की कमजोर टीम ने ही ऑस्ट्रेलिया को हराया था, जिसमें विराट, बुमराह, शमी और अश्विन जैसे दिग्गज खिलाड़ी नहीं थे।