IND vs SA DRS Controversy: क्या तकनीक का गलत फायदा उठाकर टेस्ट सीरीज जीतना चाहता है अफ्रीका, क्या है डीआरएस विवाद, जानिए पूरा मामला
डीन एल्गर के विवादित डीआरएस के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या दक्षिण अफ्रीकी टीम तकनीक का गलत फायदा उठाकर टेस्ट सीरीज जीतना चाहती है। यहां जानिए पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ और हॉक आई तकनीक क्या है ?
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विस्तार
यहां हम बता रहे हैं कि पूरा मामला क्या है, कैसे यह विवाद शुरू हुआ, डीआरएस क्या हैं और हॉक आई तकनीक कैसे काम करती है।
क्या है मामला ?
यह विवाद केपटाउन टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका की दूसरी पारी के 21वां ओवर में शुरू हुआ, जब अश्विन की गेंद डीन एल्गर के पैर में जाकर लगी और भारत ने एलबीडब्ल्यू की अपील की। अंपायर ने उन्हें आउट दे दिया। एल्गर ने अपने साथी खिलाड़ी कीगन पीटरसन से कुछ बात की और अंपायर के फैसले को चुनौती दी। रीप्ले में साफ दिख रहा था कि गेंद एल्गर के पैड में घुटने से नीचे लगी है, लेकिन जब हॉक आई तकनीकि ने गेंद को स्टंप के ऊपर जाता दिखाया तो अफ्रीकी टीम के अलावा कोई भी इस पर यकीन नहीं कर पाया। रीप्ले देखने के बाद खुद अंपायर के मुंह से निकला "यह असंभव है।"
ओवर खत्म होने के बाद अश्विन ने स्टंप माइक के पास आकर कहा कि आपको केपटाउन में जीतने का कोई दूसरा तरीका निकालना चाहिए था। बाद में विराट कोहली, लोकेश राहुल और ऋषभ पंत ने भी स्टंप माइक के पास आकर अपनी नाराजगी जाहिर की। अब भारतीय फैंस और क्रिकेट जगत के दिग्गज भी इस मामले पर सोशल मीडिया में अपनी बात कह रहे हैं।
Even Erasmus said - that's impossible. How can #Elgar survives! 🤔The first impression shows that ball clearly hitting the stumps but review shows that ball would have gone over the stumps. #ViratKohli is deeply frustrated.#INDvsSA #Ashwin#SAvIND pic.twitter.com/wkRH2KzTAi
— 𝗔𝗯𝗵𝗶𝘀𝗵𝗲𝗸 𝗔𝗴𝗻𝗶𝗵𝗼𝘁𝗿𝗶🇮🇳 (@Sachin10fans) January 13, 2022
वसीम जाफर और आकाश चोपड़ा जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने भी इस मामले पर हैरानी जताई है। मैच के दौरान कमेंट्री कर रहे सुनील गावस्कर ने भी कहा था कि डीन एल्गर के घुटने में लगने वाली गेंद स्टंप्स के ऊपर से कैसे जा सकती है।
तीसरे दिन जमकर हुई छींटाकशी
मैच के तीसरे दिन एल्गर के विवादित डीआरएस के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी नाराजगी बाहर निकाली और कप्तान कोहली सहित राहुल और पंत जैसे खिलाड़ियों ने अपना गुस्सा जाहिर किया। इस बीच विराट ने अफ्रीकी बल्लेबाजों से भी काफी बातचीत की। एल्गर और पीटरसन ने कई बार इसका जवाब भी दिया। मैच के बाद एनगिडी ने कहा कि भारतीय टीम दबाव में है और उनकी हताशा साफ झलक रही है।
I'm chirping for 13 years now, do you think you can stop me now virat to elgar😂 #viratkholi
— 🔥 (@BeingDope_007) January 13, 2022
Never ever dare to mess With Him
He is just in badphase When ever He comes back that day I will answer all of u
ComeBack 👑 ASAP pic.twitter.com/NyPC6jQ5nP
क्या है डीआरएस
डीआरएस को अंग्रेजी में डिसीजन रिव्यू सिस्टम भी कहते हैं। इसके जरिए खिलाड़ियों को मैदानी अंपायर के फैसले को चुनौती देने का मौका मिलता है। टेस्ट मैच की एक पारी में दोनों टीम के पास तीन डीआरएस रहते हैं। अगर कप्तान या बल्लेबाज की मांग सही रहती है और तीसरे अंपायर को मैदानी अंपायर का फैसला बदलना पड़ता है तो डीआरएस नहीं खर्च होता, लेकिन जब खिलाड़ियों की मांग गलत साबित होती है, तब डीआरएस खर्च हो जाता है और तीन गलत मांग करने के बाद टीम के पास कोई डीआरएस नहीं बचता है।
कैसे काम करता है डीआरएस
डीआरएस सिस्टम में तीन तरह की तकनीक के जरिए मैदानी अंपायर के फैसले को सही या गलत ठहराया जाता है। सबसे पहले अल्ट्राएज और वीडियो फुटेज के जरिए यह देखा जाता है कि गेंद बल्ले पर लगी है या नहीं। अल्ट्राएज तकनीकि स्टंप माइक के जरिए आवाज सुनती है और एकदम हल्की आवाज भी पकड़ लेती है। ऐसे में बल्ले का महीन किनारा लगने पर भी इस तकनीक के जरिए आउट या नॉटआउट का फैसला हो जाता है। कैच आउट के लिए या यह पता करने के लिए कि गेंद बल्ले से लगी है या नहीं, इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
डीआरएस में हॉट स्पॉट तकनीक का भी इस्तेमाल होता है। इसमें बल्ले का रंग काला कर दिया जाता है और गेंद को सफेद रंग से दिखाया जाता है। बल्ले का जो हिस्सा गेंद के संपर्क में आता है, वह सफेद रंग का हो जाता है। बहुत हद तक यह तकनीक एक्सरे की तरह काम करती है। हालांकि यह काफी महंगी है और अधिकतर मैदानों पर यह सुविधा नहीं है। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच सीरीज में भी इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
कैसे काम करती है हॉक आई तकनीक
हॉक आई तकनीक के जरिए यह अनुमान लगाया जाता है कि गेंद पिच पर गिरने के बाद कहां जाती और स्टंप पर लगती या नहीं। इसका इस्तेमाल एलबीडब्ल्यू के फैसले देने में होता है। इस तकनीक में पहले दिखाया जाता है कि गेंद कहां टप्पा खाई और इसके बाद कितना कांटा बदला। अगर बल्लेबाज के पैर से नहीं टकराती तो उसी एंगल के साथ गेंद कहां जाती। लेकिन इस तकनीक पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि हर पिच में उछाल अलग-अलग होता है और उसका जो सटीक अनुमान मैदान में खड़ा अंपायर लगा सकता है, वह कंप्यूटर के बस की बात नहीं है।
भारत और अफ्रीका के मैच में भी इसी तकनीक को लेकर विवाद हो रहा है। अंपायर सहित अधिकतर खिलाड़ियों का मानना है कि अश्विन की गेंद एल्गर के पैड पर नहीं लगती तो लेग और मिडिल स्टंप पर जाकर लग रही थी, लेकिन हॉक आई तकनीक के अनुसार यह गेंद स्टंप के ऊपर से जा रही थी।