IND vs AFG: 'अब लग रहा है कि मैं वापस आ गया हूं', पांच महीने बाद लौटे हर्षित राणा; बयां किया चोट का दर्द
घुटने की चोट के कारण 5 महीने तक क्रिकेट के मैदान से दूर रहने के बाद तेज गेंदबाज हर्षित राणा की भारतीय टीम में वापसी हुई है। उन्होंने इस मुश्किल दौर और टी20 वर्ल्ड कप मिस करने के अपने दर्द को साझा किया है।
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भारतीय तेज गेंदबाज हर्षित राणा ने घुटने की चोट के कारण पांच महीने तक खेल से दूर रहने के बाद राष्ट्रीय टीम के सेटअप में वापसी पर बड़ी राहत महसूस की है। उन्होंने स्वीकार किया है कि क्रिकेट से इतनी लंबी अनुपस्थिति उनके अब तक के करियर का सबसे कठिन दौर था।
बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में अपना रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) पूरा करने के बाद, 24 वर्षीय यह गेंदबाज अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे वनडे मैच से पहले एक बार फिर भारतीय टीम के साथ जुड़ गया है। टीम में वापसी के बाद उन्होंने अपनी रिकवरी के सफर, टी20 वर्ल्ड कप खिताबी जीत का हिस्सा न बन पाने के भावनात्मक दर्द और वापसी में मददगार रहे सपोर्ट सिस्टम पर खुलकर बात की।
वॉर्म-अप मैच में लगी चोट ने तोड़ा वर्ल्ड कप खेलने का सपना
हर्षित राणा के लिए दोबारा भारतीय जर्सी पहनने का अवसर बहुत खास और अतिरिक्त महत्व रखता है। दरअसल, एक वॉर्म-अप मैच के दौरान लगी चोट के कारण उन्हें टीम के सफल टी20 वर्ल्ड कप अभियान को बाहर बैठकर देखना पड़ा था। बीसीसीआई के एक वीडियो में राणा ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा "मेरे लिए यह समय विशेष रूप से बहुत कठिन था। क्योंकि एक बच्चे के रूप में, मेरा सपना वर्ल्ड कप में खेलना था। भारत ने इसे जीता भी, लेकिन मैं चोट की वजह से इसका हिस्सा बनने से चूक गया। मगर मेरे पास पांच महीने का समय था। मेरा मतलब है कि मैं पांच महीने तक क्रिकेट से दूर रहा, लेकिन इस दौरान मैंने हर चीज पर बहुत काम किया है।"
रिकवरी में 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ने निभाई बड़ी भूमिका
राणा ने अपने रिहैबिलिटेशन का एक बड़ा हिस्सा बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में बिताया। उन्होंने अपनी रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए वहां की आधुनिक सुविधाओं और सपोर्ट स्टाफ को पूरा श्रेय दिया। उनका मानना है कि सीओई का माहौल चोटिल खिलाड़ियों को मजबूत होकर लौटने के लिए हर जरूरी संसाधन देता है।
शारीरिक से ज्यादा कठिन थी मानसिक चुनौती
शारीरिक रिकवरी में लगातार सुधार के बीच, राणा ने स्वीकार किया कि प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से इतने लंबे समय तक दूर रहने की मानसिक चुनौती उनके लिए और भी ज्यादा कठिन साबित हुई। खेल से कभी भी इतने लंबे समय तक दूर न रहने की बात कहते हुए उन्होंने बताया कि ड्रेसिंग रूम में वापस लौटना उन्हें बेहद संतुष्टि दे रहा है।
'भारतीय टीम के अभ्यास सत्र की तीव्रता बेजोड़'
अब दोबारा भारतीय टीम का हिस्सा बनने के बाद, राणा ने कहा कि रिहैब से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने के इस बदलाव ने उन्हें फिर से याद दिलाया है कि देश का प्रतिनिधित्व करना किसी भी अन्य अनुभव से बिल्कुल अलग क्यों है। उन्होंने भारतीय टीम के अभ्यास सत्रों की तीव्रता (इंटेनसिटी) को बेजोड़ बताया। अब जबकि उनका रिहैब पूरा हो चुका है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट एक बार फिर उनके सामने है, हर्षित राणा का पूरा ध्यान रिकवरी के दौर से आगे बढ़कर भारत की जर्सी में मिले इस दूसरे मौके का पूरा फायदा उठाने पर केंद्रित हो गया है।