बीसीसीआई ही नहीं कई नामी क्रिकेटर भी आएंगे लपेटे में
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जस्टिस आरएम लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों से सिर्फ बीसीसीआई ही झंझावत में नहीं फंसी है बल्कि कई-नामी गिरामी क्रिकेटर भी इसके लपेटे में आ रहे हैं। कमेटी की सिफारिशें अगर लागू हुईं तो बृजेश पटेल, देबांग गांधी जैसे पूर्व टेस्ट क्रिकेटरों को अपनी अकादमी या फिर खेल प्रशासन में से किसी को एक को चुनना पड़ सकता है।
यही नहीं सचिन तेंदुलकर के पुत्र अर्जुन तेंदुलकर मुंबई के लिए आयु वर्ग की क्रिकेट खेल रहे हैं। जाहिर है आने वाले समय में अर्जुन मुंबई टीम में चयन के दावेदार भी बनेंगे। ऐसे में पिता सचिन को बीसीसीआई और मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन से दूरी बनाकर रखनी होगी। इस वक्त सचिन को बीसीसीआई ने अपना एडवाइजर बनाकर रखा है। यही कारण है कि इन सिफारिशों को चुनौती देने के लिए बीसीसीआई को कई नामी-गिरामी खिलाड़ियों का समर्थन मिलने की भी उम्मीद है।
हितों के टकराव पर जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने सिफारिश की है कि अगर कोई पुत्र राज्य या फिर देश की टीम में चयन का दावेदार है, ऐसे में उसके पिता अगर चयनकर्ता हैं या फिर बोर्ड या राज्य एसोसिएशन में पदाधिकारी हैं या फिर प्रतिनिधि हैं तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा।
एक पर गिर चुकी है पद छोड़ने की गाज
सबसे बड़ा उदाहरण हाल ही में राष्ट्रीय चयनसमिति पद से इस्तीफा देने वाले रोजर बिन्नी हैं, जिनके पुत्र स्टुअर्ट बिन्नी के देश के लिए खेलने पर उन्हें चयन समिति से बाहर होना पड़ा। हालांकि बोर्ड ने बिन्नी को तो हटा दिया, लेकिन कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव और पूर्व टेस्ट क्रिकेटर बृजेश पटेल के पुत्र उदित पटेल अभी भी कर्नाटक के लिए खेल रहे हैं।
इसी तरह सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव निरंजन शाह भी मुश्किल में फंस सकते हैं। उनके पुत्र जयदेव शाह सौराष्ट्र के लिए लंबे समय से खेल रहे हैं। इसी तरह कमेटी ने यह भी सिफारिश की है कि कोई भी पूर्व खिलाड़ी एक से ज्यादा भूमिकाएं नहीं निभा सकता है।
चयनकर्ता, कोच, मैनेजर, कमेंटेटर, खेल लेखक, गवर्निंग काउंसिल सदस्य या फिर अकादमी चलाने जैसी भूमिकाएं एक साथ नहीं निभाई जा सकती है। बंगाल रणजी टीम के मुख्य चयनकर्ता और पूर्व टेस्ट क्रिकेटर देबांग गांधी भी अपनी अकादमी चलाते हैं। बृजेश पटेल की भी अकादमी चलती है। इन क्रिकेटरों को भी पद या फिर पेशे में से एक को चुनना पड़ सकता है।