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आईसीसी ने फैसलों पर चूक भी मानी और बचाव भी किया
इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 17 Jul 2013 05:52 PM IST
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आईसीसी ने एशेज सीरीज के पहले टेस्ट मैच में अंपायरों और डीआरएस से कुछ हुई गलतियों को स्वीकार तो कर लिया है, लेकिन क्रिकेट की इस शीर्ष संस्था ने इन दोनों का बचाव भी किया।
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने ट्रेंटब्रिज टेस्ट में डिसिजन रिव्यू सिस्टम (डीआरएस) तकनीक समेत अंपायरिंग स्तर पर होने वाली तीन गलतियों पर आश्चर्य जताया, लेकिन खेल में तकनीक के इस्तेमाल का समर्थन भी किया।
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आईसीसी ने माना कि अंपायरों पर दबाव बहुत बढ़ गया है। साथ ही परिषद के मुख्य कार्यकारी डेविड रिचर्डसन ने भी अंपायरों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में बढ़िया काम किया।
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रिचर्डसन ने कहा, 'मैच में कुल 72 फैसले लिए गए। एक डीआरएस टेस्ट मैच की तुलना में यह औसत (49) से भी ज्यादा है।'
अंपायरों ने कुल सात गलतियां की जिसमें से चार डीआरएस से दुरुस्त की गई। इसका अर्थ यह हुआ कि अंपायरों ने 90.3 फीसदी फैसले सही दिए और डीआरएस का प्रयोग करने के बाद सही फैसलों का ग्राफ बढ़कर 95.8 फीसदी हो गया।
मैच में तीन फैसले पूरी तरह गलत थे जिसमें इंग्लैंड के बल्लेबाज जोनाथन ट्रॉट को डीआरएस के प्रयोग के बावजूद गलती से आउट दे दिया गया। इस चूक में हॉट स्पॉट तकनीक के ऑपरेटर की गलती थी।
दो अन्य गलत फैसलों में एक इंग्लैंड के बल्लेबाज स्टुअर्ट ब्रॉड का मामला है, लेकिन यहां पर ऑस्ट्रेलिया के पास रेफरल ही नहीं बचे थे।
रिचर्डसन ने कहा, 'अंपायरों ने मुश्किल परिस्थितियों में बेहतरीन काम को अंजाम दिया। उच्च स्तर पर अंपायरों अलीम दार, कुमार धर्मसेना और मॉरियस एरासमस का लगातार बढ़िया प्रदर्शन उनकी क्षमता को दर्शाता है।'
हर पारी में मिलते हैं दो-दो रेफरल
हर टीम को प्रत्येक पारी में दो बार रेफरल लेने का मौका मिलता है। अगर टीम रेफरल का सही प्रयोग करती है तो वह रेफरल बचा रह जाता है।
ऑस्ट्रेलिया ने इस मैच में कुल नौ रेफरल प्रयोग किए, जबकि इंग्लैंड ने महज चार बार ही इसका प्रयोग किया।
दोनों टीमों की तुलना की जाए तो इंग्लैंड को तीन में सफलता मिली जबकि ऑस्ट्रेलिया इस मामले में दो ही बार सफल रहा।