हरमनप्रीत की टी-शर्ट देख मां को हो गया था कामयाबी का एहसास
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भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने शुक्रवार को जब टी-20 विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ 51 गेंदों पर 103 रन बनाए तो क्रिकेट इतिहास में उनका नाम दर्ज हो गया। हरमनप्रीत कौर टी-20 क्रिकेट में शतक लगाने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
पंजाब के मोगा की रहने वाली हरमनप्रीत कौर के परिवार के लिए ये एक ऐसा दिन था जिसका वे कई सालों से इंतजार कर रहे थे। क्रिकेट के अलावा हरमनप्रीत हॉकी और तमाम दूसरे खेलों में हाथ आजमाया करती थीं। लेकिन उनकी असल रुचि सिर्फ क्रिकेट में थी।
बेटी के इस कारनामे पर उनके पिता हरमिंदर सिंह भुल्लर कहते हैं, "बचपन में जब हरमन क्रिकेट खेला करती थी तो हमने हमेशा उसको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।" वह कहते हैं, "बच्चियों को कोख में ही खत्म नहीं करना चाहिए। उन्हें आगे बढ़ने देना चाहिए। उन्हें देश का नाम आगे बढ़ाने का मौका देना चाहिए जिस तरह हरमनप्रीत सिंह ने पंजाब समेत पूरे देश का नाम रौशन किया है।"
जब हरमन ने अपने पिता के खेत में लड़कों के साथ खेलना शुरू किया था तो उनके रिश्तेदारों को ये बात बेहद नागवार गुजरी थी। बेटी के संघर्ष भरे दिनों को याद करते हुए हरमिंदर सिंह भुल्लर कहते हैं, "हरमनप्रीत की उपलब्धि ने लोगों का मुंह बंद कर दिया है।" हरमनप्रीत की मां सतविंदर कौर कहती हैं कि उसका ध्यान हमेशा से खेल की तरफ था, इसलिए हमने भी उसे आगे बढ़ने का मौका दिया।
हरमनप्रीत कौर का जन्म अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस यानी आठ मार्च को हुआ था। बीते साल ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए मैच को याद करते हुए हरमन की मां बताती हैं कि हरमन ने उस दिन जो टी शर्ट पहनी हुई थी उस पर जीत का निशान बना हुआ था, हमें उस दिन ही लगा था कि वो कुछ बड़ा जरूर करेगी। हरमनप्रीत कौर की बहन हेमजीत कौर भी जिला स्तर पर बैडमिंटन खेलती रही हैं।
टीम के खिलाड़ियों के बीच हैरी नाम से मशहूर हरमन ने साल 2009 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में 91 मीटर का छक्का लगाया था जिसके बाद ये सवाल उठे कि कोई महिला इतना लंबा छक्का कैसे लगा सकती है। इसके बाद उनका डोप टेस्ट कराने की मांग की गई। लेकिन कई साल बाद 2017 में हरमनप्रीत कौर ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 171 रन बनाकर ऑस्ट्रेलियाई टीम की गेंदबाज़ी की बखिया उधेड़ दी। इसी के बाद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान एलेक्स ब्लैकवैल ने हरमनप्रीत कौर को अपनी जर्सी गिफ्ट की जिसकी तस्वीर उन्होंने ट्विटर पर भी शेयर की।
शुक्रवार को हुए मैच में भी उन्होंने आठ छक्के लगाए। उनका स्ट्राइक रेट 201 से ज्यादा रहा। मैच के बाद उन्होंने बताया कि उन्हें पेट में दर्द था, इसलिए उन्होंने तय किया कि दौड़कर रन बनाने के बजाय वह ज्यादा से ज्यादा बड़े शॉट लगाएं।
हरमिंदर सिंह भुल्लर बताते हैं कि जब हरमन ने दसवीं पास की तो एक नजदीकी स्कूल के कोच कमलदीप सिंह सोढ़ी हरमन को अपने स्कूल ले गए। इसके बाद कोच के बेटे यादविंदर सिंह सोढ़ी ने हरमन को कोचिंग देनी शुरू की। भुल्लर बताते हैं, "जब हरमन ग्राउंड में लड़कों के साथ खेलती थीं तभी उन्होंने कह दिया था कि हमें अपनी लड़की को कोचिंग देने का मौका दीजिए।"
कारों को लेकर हरमन की दीवानगी के बारे में उनकी बहन हेमजीत बताती हैं, "वह क्रिकेट को लेकर बहुत जुनूनी हैं लेकिन उसे कार, मोबाइल और प्ले स्टेशन का भी बहुत शौक है। जब भी कोई नया मोबाइल लॉन्च होता है तो हरमन चाहती हैं कि वो मोबाइल उनके पास होना चाहिए। हरमन जब भी घर आती है तो रात के दो बजे तक क्रिकेट की बातें करती है। कई बार तो उसकी बातें सुनकर-सुनकर हम बोर हो जाते हैं।"
मोबाइल फोनों को लेकर उन्होंने अपनी रुचि सोशल मीडिया पर भी जाहिर की है। क्रिकेट की दुनिया में धाकड़ बल्लेबाज़ी करने वाली हरमन फर्ज़ी डिग्री विवाद की वजह से चर्चा में आ चुकी हैं।
पंजाब पुलिस में नौकरी मिलने के बाद हरमनप्रीत पर फर्जी डिग्री रखने का आरोप लगाया गया। इसके बाद मांग की गई कि हरमनप्रीत को डीएसपी पद से हटा दिया जाए।
इस मामले पर डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने बीबीसी को बताया था कि जांच के दौरान उनकी स्नातक की डिग्री नकली पाई गई जिसकी वजह से उनको डीएसपी के पद से हटाया गया। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा था कि हरमनप्रीत अपनी शैक्षिक योग्यता को सही सिद्ध करने के बाद अपने पद को दोबारा संभाल सकती हैं। हरमनप्रीत कौर को स्पोर्ट्स कोटे में पंजाब पुलिस में डीएसपी रैंक दी गई थी।