जैसे-तैसे जीते: आखिरी ओवर तक कैच टपकाती रही टीम इंडिया, इसलिए फंसा मैच
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भारत और इंग्लैंड के बीच एकदिवसीय सीरीज का तीसरा और निर्णयायक मुकाबला 28 मार्च को खेला गया। दोनों टीमों के बीच पुणे में खेला गया ये काफी रोमांचक रहा। एक समय लगा कि भारत आसानी से मैच जीत लेगा। लेकिन भारतीय क्षेत्ररक्षकों ने जिस तरह से इंग्लैंड के बल्लेबाजों के कैच टपकाए उसके चलते इंग्लिश टीम ने मैच में वापसी की। अगर भारतीय फील्डर इतने कैच न छोड़ते तो भारत ये मुकाबला बहुत पहले जीत सकता था। एक समय ऐसा भी आया जब लगा कि मैच भारत के हाथ से फिसल जाएगा। इंग्लैंड की तरफ जुझारू पारी खेलने वाले सैम करन भारत की जीत में आड़े आ रहे थे।
भारतीय क्षेत्ररक्षकों ने पूरे मैच के दौरान खराब फील्डिंग की। भारतीय फील्डरों ने सैम करन का भी कैच छोड़ा। जिसके चलते सैम करन 95 रनों की नाबाद पारी खेलने में सफल रहे। इस मैच में भारत के जाने-माने फील्डर हार्दिक पांड्या बिलकुल भी रंग में नहीं थे। मैच के दौरान उन्होंने 2 कैच टपकाए। इनमें से पांड्या ने पहले बेन स्टोक्स का कैच छोड़ा। वहीं बेन स्टोक्स जिन्होंने दूसरे वनडे में इंग्लैंड को जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
— Maqbool (@im_maqbool) March 28, 2021
अगर पाड्या बेन स्टोक्स का कैच लपक लेते तो वह और जल्दी आउट हो जाते। ये सही है कि बेन स्टोक्स इस मैच में ज्यादा लंबी पारी नहीं खेल पाए और बाद में 35 रन बनाकर आउट हुए। टी नटराजन की गेंद पर जब बेन स्टोक्स का कैच शिखर धवन ने पकड़ा तो उस समय पांड्या ने धवन को झुककर सलाम किया।
पांड्या के अलावा शार्दुल ठाकुर ने भी एक कैच छोड़ा। वैसे शार्दुल भारत के तेज-तर्रार फील्डर माने जाते हैं। लेकिन तीसरे वनडे मैच के दौरान शार्दुल के हाथ में गेंद आ गई थी लेकिन वह गेंद थाम नहीं सके। इसके अलावा टी नटराजन से भी एक छोड़ा था।
कुल मिलाकर भारत ने इस मुकाबले में चार कैच टपकाए थे। अगर भारत ये सभी कैच लपक लेता तो टीम इंडिया को जीतने के लिए इतनी जद्दोजहद नहीं करनी पड़ती। ऐसा कहा जा सकता है कि भारत तीसरा वनडे भाग्य के भरोसे जीता। वर्ना जिस तरह से सैम करन खेल रहे थे उसे देखकर यही लगा कि इंग्लैंड की जीत तय है। लेकिन अंत में भारत ने इस मैच में इंग्लैंड को 7 रनों से शिकस्त देकर मुकाबला जीत लिया। इस जीत के साथ ही भारत ने तीन वनडे मैचों की सीरीज पर 2-1 से कब्जा करने में सफल रहा।