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Harbhajan Retirement: टीम इंडिया का कप्तान नहीं बन पाने पर हरभजन का छलका दर्द, कही ये बड़ी बात
Sun, 02 Jan 2022 10:57 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 02 Jan 2022 10:57 AM IST
सार
टीम इंडिया का बेस्ट कप्तान के बारे में पूछे जाने पर भज्जी ने कहा कि उनके लिए सौरव गांगुली बेस्ट कप्तान रहे हैं।
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हरभजन सिंह ने कप्तानी को लेकर बड़ा बयान दिया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत के पूर्व दिग्गज स्पिनर हरभजन सिंह ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था। अब वह कई मामलों पर चुप्पी तोड़ रहे हैं। हाल ही में उन्होंने टीम में शामिल नहीं किए जाने को लेकर अपनी बात रखी थी। अब भज्जी ने टीम इंडिया का कप्तान नहीं बन पाने को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बीसीसीआई पर भी अपना दुख जाहिर किया है।
'मैं कप्तान बनने के लायक था'
हरभजन ने जी न्यूज को दिए इंटरव्यू में करियर, विवाद और कप्तानी से जुड़े सवालों पर जवाब दिया। भज्जी ने कहा कि उनका अभी फिलहाल राजनीति में आने का कोई मन नहीं है। जब वह इस बारे में सोचेंगे तो सबसे पहले अपने फैंस को इसकी जानकारी देंगे। कप्तानी को लेकर सवाल पूछे जाने पर भज्जी ने कहा- ऐसा नहीं है कि मैं कप्तान बनने लायक नहीं था या मुझे कप्तानी नहीं आती थी।
'बीसीसीआई में पैरवी करने वाला कोई नहीं था'
हरभजन ने कहा- मेरे पास पंजाब से कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था, जो बीसीसीआई में ऊंचे पद पर हो। कोई ऐसा नहीं था जो मेरे कप्तान बनने को लेकर ऊपर बात कर सके या मेरा समर्थन कर सके। अगर ऐसा कोई होता, तो शायद मैं भी टीम इंडिया का कप्तान होता। अगर मुझे कप्तानी मिलती तो मैं भी अपना 100 फीसदी देता और टीम को आगे बढ़ने में मदद करता। मैंने एक खिलाड़ी के तौर पर भी हमेशा यही किया है। एक सीनियर खिलाड़ी होने के नाते अपने सभी कप्तानों को पूरा समर्थन दिया है।
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यह रही थी 2007 के बाद कप्तान बनने की कहानी
हरभजन का यह बयान काफी बड़ा है। ऐसा इसलिए क्योंकि राहुल द्रविड़ के बाद महेंद्र सिंह धोनी वनडे और टी-20 के कप्तान बने थे। वहीं, टेस्ट में अनिल कुंबले को कप्तानी सौंपी गई थी। 2008 में कुंबले के बाद धोनी को ही तीनों फॉर्मेट की कप्तानी सौंप दी गई थी। 2014 तक धोनी ही तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया के कप्तान रहे। 2014 में दिसंबर में धोनी ने टेस्ट की कप्तानी छोड़ दी और विराट कोहली टेस्ट कप्तान बने।
तब तक हरभजन सिंह टेस्ट टीम में थे। उन्होंने आखिरी टेस्ट 2015 में खेला था। धोनी को कप्तान बनाने की सलाह सचिन तेंदुलकर ने तब बीसीसीआई अध्यक्ष रहे शरद पवार को दी थी। धोनी ने इसके बाद 2007 टी-20 विश्व कप में जीत भी दिलाई थी और खुद को साबित किया था। हरभजन ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच 2016 में खेला था। यह मैच उन्होंने यूएई के खिलाफ ढाका में खेला था। इसके बाद से वह कभी टीम में नहीं आए। हालांकि, इस दौरान वह आईपीएल खेलते रहे।
'गांगुली मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ कप्तान'
टीम इंडिया का बेस्ट कप्तान के बारे में पूछे जाने पर भज्जी ने कहा कि उनके लिए सौरव गांगुली बेस्ट कप्तान रहे हैं। उन्होंने कहा- गांगुली ने मुझे तब चुना था, जब मैं टीम से बाहर था। 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुझे मौका मिला और मैंने 32 विकेट लिए। टेस्ट में हैट्रिक लेने वाला मैं भारत का पहला गेंदबाज बना। धोनी ने भी टीम को अच्छे से संभाला। धोनी ने 2011 तक टीम को काफी अच्छी से लीड किया। भारत विश्व चैंपियन बना। पर मैं गांगुली को अपना सर्वश्रेष्ठ कप्तान मानूंगा, क्योंकि एक गेंदबाज के तौर पर उन्होंने मुझे पूरी आजादी दी थी।
'कप्तान होता तो 2015-16 में संन्यास ले लेता'
यह पूछे जाने पर कि क्या कप्तान बनने पर वह 2020 तक खेलते? इसके जवाब में भज्जी ने कहा कि मैंने कभी इतना खेलने के बारे में नहीं सोचा था। कप्तान बनता तो मैं 2015-16 तक क्रिकेट को अलविदा कह देता। मैं चाहता था कि ज्यादा से ज्यादा टेस्ट खेलूं और अपने 500 विकेट पूरे करूं। हालांकि, सब कुछ आपके पक्ष में हो ऐसा नहीं हो सकता। जो हुआ अच्छे के लिए हुआ। इस दौरान मुझे अच्छे-बुरे की भी पहचान हो गई।
टेस्ट में 400 विकेट लेने वाले दूसरे भारतीय स्पिनर
हरभजन सिंह भारत के दूसरे स्पिनर हैं, जिन्होंने टेस्ट में 400 से ज्यादा विकेट लिए थे। उनसे पहले अनिल कुंबले ने यह करनामा किया था। भज्जी ने अपने 103 टेस्ट मैच के करियर में 417 विकेट लिए थे। वहीं 236 वनडे में उनके नाम 269 विकेट रहे थे। उनकी इकोनॉमी भी 4.31 की रही थी। वहीं 28 टी-20 मैच में भज्जी ने 25 विकेट झटके। आईपीएल में हरभजन ने 163 मैच खेलकर 150 विकेट अपने नाम किए।
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'मैं कप्तान बनने के लायक था'
हरभजन ने जी न्यूज को दिए इंटरव्यू में करियर, विवाद और कप्तानी से जुड़े सवालों पर जवाब दिया। भज्जी ने कहा कि उनका अभी फिलहाल राजनीति में आने का कोई मन नहीं है। जब वह इस बारे में सोचेंगे तो सबसे पहले अपने फैंस को इसकी जानकारी देंगे। कप्तानी को लेकर सवाल पूछे जाने पर भज्जी ने कहा- ऐसा नहीं है कि मैं कप्तान बनने लायक नहीं था या मुझे कप्तानी नहीं आती थी।
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'बीसीसीआई में पैरवी करने वाला कोई नहीं था'
हरभजन ने कहा- मेरे पास पंजाब से कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था, जो बीसीसीआई में ऊंचे पद पर हो। कोई ऐसा नहीं था जो मेरे कप्तान बनने को लेकर ऊपर बात कर सके या मेरा समर्थन कर सके। अगर ऐसा कोई होता, तो शायद मैं भी टीम इंडिया का कप्तान होता। अगर मुझे कप्तानी मिलती तो मैं भी अपना 100 फीसदी देता और टीम को आगे बढ़ने में मदद करता। मैंने एक खिलाड़ी के तौर पर भी हमेशा यही किया है। एक सीनियर खिलाड़ी होने के नाते अपने सभी कप्तानों को पूरा समर्थन दिया है।
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यह रही थी 2007 के बाद कप्तान बनने की कहानी
हरभजन का यह बयान काफी बड़ा है। ऐसा इसलिए क्योंकि राहुल द्रविड़ के बाद महेंद्र सिंह धोनी वनडे और टी-20 के कप्तान बने थे। वहीं, टेस्ट में अनिल कुंबले को कप्तानी सौंपी गई थी। 2008 में कुंबले के बाद धोनी को ही तीनों फॉर्मेट की कप्तानी सौंप दी गई थी। 2014 तक धोनी ही तीनों फॉर्मेट में टीम इंडिया के कप्तान रहे। 2014 में दिसंबर में धोनी ने टेस्ट की कप्तानी छोड़ दी और विराट कोहली टेस्ट कप्तान बने।
तब तक हरभजन सिंह टेस्ट टीम में थे। उन्होंने आखिरी टेस्ट 2015 में खेला था। धोनी को कप्तान बनाने की सलाह सचिन तेंदुलकर ने तब बीसीसीआई अध्यक्ष रहे शरद पवार को दी थी। धोनी ने इसके बाद 2007 टी-20 विश्व कप में जीत भी दिलाई थी और खुद को साबित किया था। हरभजन ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच 2016 में खेला था। यह मैच उन्होंने यूएई के खिलाफ ढाका में खेला था। इसके बाद से वह कभी टीम में नहीं आए। हालांकि, इस दौरान वह आईपीएल खेलते रहे।
'गांगुली मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ कप्तान'
टीम इंडिया का बेस्ट कप्तान के बारे में पूछे जाने पर भज्जी ने कहा कि उनके लिए सौरव गांगुली बेस्ट कप्तान रहे हैं। उन्होंने कहा- गांगुली ने मुझे तब चुना था, जब मैं टीम से बाहर था। 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुझे मौका मिला और मैंने 32 विकेट लिए। टेस्ट में हैट्रिक लेने वाला मैं भारत का पहला गेंदबाज बना। धोनी ने भी टीम को अच्छे से संभाला। धोनी ने 2011 तक टीम को काफी अच्छी से लीड किया। भारत विश्व चैंपियन बना। पर मैं गांगुली को अपना सर्वश्रेष्ठ कप्तान मानूंगा, क्योंकि एक गेंदबाज के तौर पर उन्होंने मुझे पूरी आजादी दी थी।
'कप्तान होता तो 2015-16 में संन्यास ले लेता'
यह पूछे जाने पर कि क्या कप्तान बनने पर वह 2020 तक खेलते? इसके जवाब में भज्जी ने कहा कि मैंने कभी इतना खेलने के बारे में नहीं सोचा था। कप्तान बनता तो मैं 2015-16 तक क्रिकेट को अलविदा कह देता। मैं चाहता था कि ज्यादा से ज्यादा टेस्ट खेलूं और अपने 500 विकेट पूरे करूं। हालांकि, सब कुछ आपके पक्ष में हो ऐसा नहीं हो सकता। जो हुआ अच्छे के लिए हुआ। इस दौरान मुझे अच्छे-बुरे की भी पहचान हो गई।
टेस्ट में 400 विकेट लेने वाले दूसरे भारतीय स्पिनर
हरभजन सिंह भारत के दूसरे स्पिनर हैं, जिन्होंने टेस्ट में 400 से ज्यादा विकेट लिए थे। उनसे पहले अनिल कुंबले ने यह करनामा किया था। भज्जी ने अपने 103 टेस्ट मैच के करियर में 417 विकेट लिए थे। वहीं 236 वनडे में उनके नाम 269 विकेट रहे थे। उनकी इकोनॉमी भी 4.31 की रही थी। वहीं 28 टी-20 मैच में भज्जी ने 25 विकेट झटके। आईपीएल में हरभजन ने 163 मैच खेलकर 150 विकेट अपने नाम किए।