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Sudhir Naik Death: पूर्व भारतीय बल्लेबाज, कोच-क्यूरेटर सुधीर नाईक का निधन, 78 वर्ष की उम्र में ली आखिरी सांस
Wed, 05 Apr 2023 10:36 PM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Wed, 05 Apr 2023 10:36 PM IST
सार
नाईक मुंबई क्रिकेट जगत में एक बेहद सम्मानित व्यक्ति और रणजी ट्रॉफी विजेता कप्तान थे। उनके नेतृत्व ने टीम ने 1970-71 सत्र में रणजी खिताब जीता था।
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सुधीर नाईक
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
भारत के लिए 1974 में तीन टेस्ट मैच खेलने वाले पूर्व सलामी बल्लेबाज सुधीर नाईक का संक्षिप्त बीमारी के बाद बुधवार को मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया। मुंबई क्रिकेट संघ के सूत्रों ने उनके निधन की पुष्टि की है। वह 78 वर्ष के थे और उनके परिवार में उनकी एक बेटी है।
नियमित रूप से उनके स्वास्थ्य पर नजर रखने वाले एमसीए के एक सूत्र ने कहा, ‘‘हाल ही में वह बाथरूम के फर्श पर गिरे थे और उनके सिर में चोट लग गई थी जिसके बाद उन्हें मुंबई के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह कोमा में चले गए और फिर ठीक नहीं हुए।’’
नाईक मुंबई क्रिकेट जगत में एक बेहद सम्मानित व्यक्ति और रणजी ट्रॉफी विजेता कप्तान थे। उनके नेतृत्व ने टीम ने 1970-71 सत्र में रणजी खिताब जीता था। नाईक के नेतृत्व की काफी सराहना की गई क्योंकि, मुंबई ने उस सत्र में सुनील गावस्कर, अजीत वाडेकर, दिलीप सरदेसाई और अशोक मांकड़ जैसे बड़े खिलाड़ियों के बिना रणजी ट्रॉफी जीती थी।
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जब 1972 का रणजी सत्र शुरू हुआ तो नाईक को अंतिम एकादश से बाहर कर दिया गया, क्योंकि टीम में मुख्य बल्लेबाज वापस आ गए थे। उन्होंने 1974 में इंग्लैंड दौरे पर बर्मिंघम टेस्ट में पदार्पण किया, जहां उन्होंने दूसरी पारी में हार के दौरान अपना एकमात्र अर्धशतक बनाते हुए 77 रन की पारी खेली। उन्होंने 85 प्रथम श्रेणी मैच खेले और 35 से अधिक के औसत से 4376 रन बनाए, जिसमें एक दोहरा शतक सहित सात शतक शामिल हैं।
नाईक ने कोच के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई। जहीर खान के करियर में उनकी बड़ी भूमिका रही, क्योंकि वह उन्हें मुंबई में क्रिकेट खेलने के लिए लाए और उन्हें अनुभव प्रदान किया। वह मुंबई चयन समिति के अध्यक्ष भी थे। बाद में उन्होंने नि:शुल्क वानखेड़े स्टेडियम के क्यूरेटर के रूप में काम किया।
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नियमित रूप से उनके स्वास्थ्य पर नजर रखने वाले एमसीए के एक सूत्र ने कहा, ‘‘हाल ही में वह बाथरूम के फर्श पर गिरे थे और उनके सिर में चोट लग गई थी जिसके बाद उन्हें मुंबई के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह कोमा में चले गए और फिर ठीक नहीं हुए।’’
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नाईक मुंबई क्रिकेट जगत में एक बेहद सम्मानित व्यक्ति और रणजी ट्रॉफी विजेता कप्तान थे। उनके नेतृत्व ने टीम ने 1970-71 सत्र में रणजी खिताब जीता था। नाईक के नेतृत्व की काफी सराहना की गई क्योंकि, मुंबई ने उस सत्र में सुनील गावस्कर, अजीत वाडेकर, दिलीप सरदेसाई और अशोक मांकड़ जैसे बड़े खिलाड़ियों के बिना रणजी ट्रॉफी जीती थी।
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जब 1972 का रणजी सत्र शुरू हुआ तो नाईक को अंतिम एकादश से बाहर कर दिया गया, क्योंकि टीम में मुख्य बल्लेबाज वापस आ गए थे। उन्होंने 1974 में इंग्लैंड दौरे पर बर्मिंघम टेस्ट में पदार्पण किया, जहां उन्होंने दूसरी पारी में हार के दौरान अपना एकमात्र अर्धशतक बनाते हुए 77 रन की पारी खेली। उन्होंने 85 प्रथम श्रेणी मैच खेले और 35 से अधिक के औसत से 4376 रन बनाए, जिसमें एक दोहरा शतक सहित सात शतक शामिल हैं।
नाईक ने कोच के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई। जहीर खान के करियर में उनकी बड़ी भूमिका रही, क्योंकि वह उन्हें मुंबई में क्रिकेट खेलने के लिए लाए और उन्हें अनुभव प्रदान किया। वह मुंबई चयन समिति के अध्यक्ष भी थे। बाद में उन्होंने नि:शुल्क वानखेड़े स्टेडियम के क्यूरेटर के रूप में काम किया।